कांग्रेस में कई लोग कुंडली मार कर बैठे हैं: संदीप दीक्षित

  • 12 मार्च 2017
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पंजाब और गोवा में कांग्रेस को उम्मीद के मुताबिक सफलता मिली लेकिन उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से गठबंधन के बावजूद उसे हार का मुंह देखना पड़ा. कांग्रेस को मात्र सात सीटें मिली और कांग्रेस-सपा गठबंधन को 54 सीटें.

यूपी में पहले शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था लेकिन बाद में उनका नाम हटा लिया गया. इसके बाद राहुल गांधी भी मैदान में उतरे और सपा के साथ गठबंधन में पार्टी ने विधानसभा चुनाव लड़ा.

यूपी में कांग्रेस की हार के कारणों पर पार्टी के नेता और दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने बात की बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से.

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संदीप दीक्षित कहते हैं, "जब से हमने यूपी में अपनी यात्रा शुरू की है, पंद्रह-बीस सालों के बाद पहली बार कांग्रेस ने ज़मीनी स्तर पर काम करना शुरू किया था. उस पूरे अभियान को हमने तोड़ा या रोका, वो बुरा किया."

वो कहते हैं, "आज हमारे पास कुछ सीटें हैं और वो तो हमें वैसे भी आ जातीं. लेकिन कम से कम हर ज़िले, तहसील में कांग्रेस का नाम होता. मोदी लहर के बीच भी कांग्रेस अपना वर्चस्व रख पाती."

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उत्तर प्रदेश में चुनावों को लेकर नेतृत्व के सवाल पर संदीप दीक्षित कहते हैं, "मुझे संदेह है कि यूपी के कुछ नेताओं में ये दमखम नहीं था कि वो ज़मीनी स्तर पर लड़ें. कुछ नेता स्थिति का फायदा लेना चाहते थे और समझते थे कि सपा के कंधों पर चढ़ कर सरकार बना लेंगे, शायद उन लोगों ने व्यक्तिगत स्वार्थ के चक्कर में पार्टी के हित को धराशायी कर दिया."

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संदीप दीक्षित कहते हैं, "हम कई चीज़ों में परिस्थितियों का बदलना नहीं समझ पाए हैं. कांग्रेस ने बदलते हुए समय में आर्थिक रूप से बदलने में काफी योगदान किया लेकिन यह नहीं समझ पाए कि जब आर्थिक बदलाव आते हैं तो सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां भी बदलती हैं. नए लोग आते हैं और नई ऊर्जा आती है और तब आप पुराने ढर्रे पर राजनीति नहीं कर सकते."

वे कहते हैं, "हमने यूपी में ना ही नया नेतृत्व बनाया, ना ही नए लोगों को मौका दिया. जब हम मैनेजर को लीडर बनाते हैं तो ये परिस्थिति बनती है."

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Image caption भाई राहुल गांधी के साथ प्रियंका भी चुनाव प्रचार करने पहुंची थीं.

कांग्रेस का क्षेत्र माने जाने वाले अमेठी में चारों सीटों पर कांग्रेस को हार मिली है. यहां पर तीन सीटें भाजपा के खाते में गई हैं और एक पर समाजवादी पार्टी की जीत हुई है.

संदीप दीक्षित कहते हैं, "रायबरेली और अमेठी में हम पहले भी हारते रहे हैं. पार्टी में एक कमज़ोरी आ गई है कि हम अपने ऊपर न सवाल खड़े होने देते हैं ना ही उनका जवाब देते हैं. उससे हम समझ नहीं पाते हैं कि इनमें से कई सवाल वाजिब होते हैं और जब हम ऐसे सवालों के जवाब नहीं देते तो कमज़ोर हो जाते हैं."

पार्टी नेतृत्व की जवाबदेही पर संदीप दीक्षित कहते हैं, "सोनिया गांधी से सवाल कुछ वरिष्ठ नेता पूछते होंगे, लेकिन हमारे यहां जवाबदेही की या चर्चा की या विचार-विमर्श की और नए लोगों को लाने की प्रथा बंद हो गई है."

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इसका कारण भी संदीप दीक्षित बताते हैं, "ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे यहां बहुत से लोग कुंडली मार के बैठे हुए हैं. पूरे देश में नया नेतृत्व आ रहा है, नई सोच के लोग आ रहे हैं. हमारे यहां जो लोग हैं उन्हें ये दिक्कत है कि नयापन आएगा तो सबसे पहले उनका ही वर्चस्व ख़त्म हो जाएगा."

उन्होंने कहा "ख़ासकर दिल्ली और इसके आसपास जो चालीस-पचास नेता हैं, इसके लिए वो ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने बिल्डिंग को घेर रखा है और यहां न हवा आने देते हैं न ही नए विचार और नए लोग ही आने देते हैं."

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पंजाब में आम आदमी पार्टी को 20 सीटों पर जीत मिली है और यहां वो नंबर दो पार्टी बनकर उभरी है.

लेकिन क्या आने वाले दिनों में ये और बड़ी बन सकती है, इस पर संदीप दीक्षित कहते हैं, "इस चुनावों में मुझे एक बड़ा मौका भी दिखता है. हिंदुस्तान की नंबर दो की पार्टी या बीजेपी को कोई चुनौती दे सकता है तो वो हम हैं ये बात उभर कर आई है."

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वो कहते हैं, "आम आदमी पार्टी एक तरीके से किनारे चली गई है. लगभग हर राज्य में हम नंबर दो या तीन नंबर की पार्टी हैं और अगर हम सही कसरत कर के दौड़ना चाहेंगे तो कभी वो आगे आएंगे कभी हम रहेंगे."

संदीप दीक्षित कांग्रेस को राय देते हैं, "हम लोग अपने को दुरुस्त करें, मज़बूत करें. हम हमेशा आंदोलन की पार्टी रहे हैं, आंदोलन की पार्टी बनिए, लोग अपने आप पास आएंगे."

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