ख़ुशी-ख़ुशी बात करने वाला भाई आत्महत्या कैसे कर सकता है

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वो आस लगाए बैठे थे कि इस महीने की 16 तारीख़ को बेटा घर पहुँचेगा. लेकिन पहुँची बेटे मुथुकृष्णनन की कथित आत्महत्या की ख़बर.

इस ख़बर से मुथुकृष्णनन का परिवार बुरी तरह टूट गया है.

जेएनयू के दलित छात्र ने की कथित तौर पर ख़ुदकुशी

तमिलनाडु के सलेम में रहने वाले जीवानंदम और अलामेलू की तीन बेटियाँ और एक बेटा था- मुथुकृष्णन.

पढ़ाई-लिखाई का था शौक

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माँ अलामेलू ने सेलम में पत्रकारों को बताया, "वो हमेशा कुछ न कुछ पढ़ता रहता था. दूसरे के झमेलों से वो दूर ही रहता था. जब हमने शनिवार को उसे कॉल किया था तो उसने बताया था कि 16 मार्च को वो घर आएगा. हमने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा."

मेरा बेटा आत्महत्या नहीं कर सकता: जीवानंदम

1989 में जन्मे मुथुकृष्णन की एक बड़ी बहन है और दो छोटी बहनें.

हालांकि जीवानंदम और अलामेलू दिहाड़ी मज़दूर थे लेकिन उन्होंने सुनिश्चित किया कि मुथुकृष्णन लिटल फ्लावर स्कूल में पढ़ाई करे जो वहाँ का प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल था.

आईएएस अधिकारी के फ़ैन

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लोग बताते हैं कि मुथुकृष्णन आईएएस अधिकारी इरई अनबू को अपनी प्रेरणा मानते थे.

बहन जयंती ने बताया कि इरई अनबू के बारे में आने वाले हर टीवी कार्यक्रम को मुथुकृष्णन देखा करते थे.

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इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद मुथुकृष्णन ने बीएड की पढ़ाई की जिसके बाद एमफ़िल करने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ़ हैदराबाद में दाख़िला लिया.

बाद में वो दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में दाख़िला लेने में कामयाब रहे.

एमफ़िल पूरी होने के बाद मुथुकृष्णन डॉक्ट्रेट के लिए अपना नाम दर्ज कराने की कोशिश में थे जब कथित तौर पर आत्महत्या की ख़बर आई.

'कभी नहीं लगा कि वो उदास है'

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बहन जयंती ने बताया, "भाई ने यूनिवर्सिटी में कभी किसी दिक्कत के बारे में बात नहीं की. वो फ़ोन पर भी ख़ुशमिजाज़ ही सुनाई पड़ते थे."

"शनिवार को भी जब बात हुई तो कभी नहीं लगा कि वो उदास है या थके हुए हैं. उन्होंने मेरी परीक्षा के बारे में पूछा और कहा कि अगले हफ़्ते घर आएँगे."

मुथुकृष्णन ने रविवार को भी अपने परिवार से बात की थी लेकिन सोमवार को किसी से बात नहीं हुई.

सोमवार को वो होली मनाने के लिए अपने दोस्त के साथ थे और दोपहर के खाने के बाद एक कमरे में सोने के लिए चले गए. जब वो वापस नहीं आए तो शाम को पाँच बजे दरवाज़ा तोड़ा गया.

जयंती के पास कई सवाल है. उन्होंने कहा, "हमने एक फ़ोटो देखी है जिसमें वो फाँसी पर लटके हुए थे. उनके पैर ज़मीन पर थे. वो आत्महत्या कैसे कर सकते हैं जब एक दिन पहले वो हमसे ख़ुशी-ख़ुशी बात कर रहे थे."

परिवार पूछ रहा है सवाल

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अपने दोस्तों के बीच कृष के नाम से मशहूर मुथुकृष्णन को लोग खुशदिल इंसान के रूप में याद करते हैं.

उन्हें कविताएँ और लघु कहानियाँ लिखने का शौक था जिनमें से कुछ अख़बारों में छपी भी हैं.

जयंती ने बताया, "रोहित वेमुला की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों में मुथुकृष्णन शामिल थे. अब उनकी मौत भी वैसे ही हुई है. वो कायर नहीं थे कि ख़ुदकुशी करें. कुछ तो गड़बड़ है."

जनवरी 2016 में हुई घटना में दलित छात्र रोहित वेमुला ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ हैदराबाद में आत्महत्या कर ली थी. इसके बाद देश भर में प्रदर्शन हुए थे.

इस बीच तमिलनाडु सरकार ने मुथुकृष्णन के परिवार को तीन लाख रुपए देने की घोषणा की है.

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