एसटी युवक के साथ मारपीट और नस्लवादी हमला होने का आरोप

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Image caption हिजियो गंग्ते का कहना है कि उन्हें जूता चाटने को मजबूर कर दिया गया

पूर्वोत्तर के एक छात्र का आरोप है कि उन्हें बेंगलुरु में बुरी तरह पीटा गया और कथित तौर पर जूता चाटने पर मजबूर किया गया.

अरुणाचल के रहने वाले हिजियो गंग्ते का कहना है कि वे इतने डर गए कि उन्होंने पुलिस से शिकायत तक नहीं की. गंग्ते इसे नस्लवादी हमला बता रहे हैं.

हिजियो गंग्ते के मुताबिक उनका 'कसूर' सिर्फ़ इतना था कि उन्होंने पानी का नल ग़लती से खुला छोड़ दिया था.

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बेंगलुरु की नॉर्थ ईस्ट हेल्पलाइन के हस्तक्षेप के बाद ही पुलिस में मामला दर्ज कराया जा सका.

बाद में हिजियो गंग्ते के माता पिता ने अलग से एक शिकायत दर्ज कराई और इस पर ज़ोर दिया कि अनुसूचित जाति/जनजाति क़ानून के तहत मामला दर्ज कराया जाए.

हिजियो अरुणाचल की अनुसूचित जनजाति समुदाय के हैं.

पेशे से वकील अभियुक्त हेमंत कुमार ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है और अदालत से उन्हें ज़मानत मिल गई है.

पुलिस मामले की जांच कर रही है.

'जूता चाटने पर मजबूर किया'

हिजियो गंग्ते ने बीबीसी से कहा, " हेमंत कुमार मेरे मकान मालिक हैं. मुझसे पानी का नल भूल से खुला छूट गया था. मैंने इसके लिए माफ़ी भी मांग ली. पर वे मुझे मां की गाली देने लगे. मैंने जब इसका विरोध किया तो वे मुझे पीटने लगे. वे मुझे घसीट कर तीसरे तल्ले तक ले गए और कम से कम आधे घंटे तक बुरी तरह पीटा."

वे आरोप लगाते हैं, "मेरी ठुड्डी और मेरे मुंह से ख़ून निकलने लगा. इसके बाद उन्होंने मेरी मां का बलात्कार करने की धमकी दे डाली."

लेकिन बात यहीं नहीं रुकी. हिजियो गंग्ते ने बीबीसी से कहा, "जब वे मुझे पीट रहे थे, उनके जूते का फ़ीता खुल गया. उन्होंने मुझे वह फ़ीता बांधने को कहा. मैंने यह भी कर दिया."

वे आगे जोड़ते हैं, "इसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि जूता चाटो. मेरे मना करने पर वे फिर पीटने लगे. अंत में मुझे जूता चाटने पर मजबूर कर दिया गया."

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