पचास साल में पंजाब की पहली मुस्लिम मंत्री

  • 17 मार्च 2017
रजिया सुल्तान, पंजाब सरकार में मंत्री

पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 77 सीटें कांग्रेस की झोली में गई हैं. इसके साथ ही यह भी तय हो गया है कि सरकार गठन में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ही चलेगी.

भले ही पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल और पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ जैसे क़द्दावर नेता चुनाव हार गए हों, कई और अनुभवी नेता कैबिनेट में लिए जाने की आस में थे.

गुरुवार को जब अमरिंदर सिंह अपनी काबीना के साथ शपथ ग्रहण कर रहे थे, उनके आठ मंत्रियों के नामों को लेकर पहले से कयास जारी थे.

लेकिन मलेरकोटला की विधायक रज़िया सुल्तान का नाम कई लोगों के लिए सुखद आश्चर्य की तरह था.

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Image caption अमरिंदर सिंह के मंत्रिपरिषद में शामिल होने के बाद रज़िया सुल्तान (सबसे दाएं)

50 साल पहले जब आज के पंजाब की नींव रखी गई थी, तब से अब तक किसी मुसलमान को इस सूबे में मंत्री बनने का मौका नहीं मिला था.

संसदीय सचिव

तीसरी बार विधानसभा चुनाव जीतने वाली रज़िया सुल्तान ने सिख बहुल पंजाब की पहली मुसलमान मंत्री होने का रिकॉर्ड बनाया है.

अमरिंदर सिंह की पिछली सरकार में 50 वर्षीया रज़िया सुल्तान मुख्य संसदीय सचिव थीं.

पंजाब में मुख्य संसदीय सचिव को राज्य मंत्री का दर्जा हासिल होता है, लेकिन उसके पास मंत्री का कोई अधिकार नहीं होता है.

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Image caption रज़िया को शपथ दिलाते पंजाब के राज्यपाल

साल 2007 में जब अमरिंदर सिंह सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी, उस समय भी रज़िया सुल्तान अपनी सीट बचाने में कामयाब रही थीं. लेकिन वे 2012 में चुनाव हार गईं.

जीत का मार्जिन

उनके पति मोहम्मद मुस्तफ़ा 1985 बैच के पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. वे फ़िलहाल पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग में पुलिस महानिदेशक हैं.

इस बार के चुनाव में रज़िया ने अकाली दल के उम्मीदवार मोहम्मद ओवैस को 12,700 मतों से हराया.

मलेरकोटला की सीट पर आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहा.

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अमरिंदर कैबिनेट में रज़िया स्वतंत्र प्रभार की राज्य मंत्री की हैसियत से शामिल की गई हैं.

सकारात्मक संकेत

रज़िया के अलावा दो हिंदुओं को अपने कैबिनेट में जगह देकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने साफ़ संकेत दिया है कि वे समाज के सभी तबकों को साथ लेकर चलना चाहते हैं.

पंजाब में मुसलमानों की तादाद केवल 1.93 फ़ीसद है. मलेरकोटला इकलौती सीट है, जहां वे बहुमत में हैं.

इस सीट से जीत कर आई रज़िया को कैबिनेट में लिया जाना सकारात्मक संकेत है.

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रज़िया सुल्तान को पंजाब में मंत्री बनाए जाने को इस बात से भी जोड़कर देखा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी ने 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया.

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ग़ौर करने वाली बात यह भी है कि बंटवारे और आज़ादी के बाद से ही मलेरकोटला में अमन चैन बरक़रार है.

हर कोई जानता है कि बंटवारे के वक़्त पंजाब के कई इलाक़ों में हिंसा हुई थी, ख़ासकर उन रास्तों के इर्द-गिर्द जो पाकिस्तान की तरफ जाते थे.

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लेकिन उस समय मलेरकोटला से कोई अप्रिय ख़बर नहीं आई थी. बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के समय भी मलेरकोटला ने अमन का दामन नहीं छोड़ा था.

हाल के विधानसभा चुनावों के कुछ पहले यहां सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिशें ज़रूर हुई थीं.

तत्कालीन विधायक फरज़ाना आलम के घर पर हमला हुआ था. लेकिन बात बिगड़ने से पहले संभल गई थी.

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