देवबंद का नाम क्यों बदलना चाहते हैं भाजपा विधायक?

  • 17 मार्च 2017
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे अभी हाल में आए हैं और नई सरकार ने अब तक शपथ भी नहीं ली है. लेकिन विवादित बयानों का दौर शुरू हो गया है.

देवबंद सीट से चुनाव जीतने वाले भाजपा विधायक कुंवर बृजेश सिंह का एक बयान काफ़ी चर्चा में है.

बृजेश सिंह देवबंद का नाम बदलकर देववृंद कराना चाहते हैं.

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जब बीबीसी हिंदी ने नए भाजपा विधायक से बात की तो उन्होंने अपनी मांग दोहराई और इसकी वजह भी गिनाईं.

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उन्होंने कहा, ''देवबंद का नाम वास्तव में देववृंद है और मेरे क्षेत्र की जनता ने मांग की थी कि चुने जाने के बाद क्षेत्र का नाम देववृंद करने का प्रस्ताव रखिएगा. और मैंने जनता से वादा किया था कि चुने जाने के बाद मेरा जो पहला प्रस्ताव होगा, वो यही होगा.''

देवबंद का नाम देववृंद क्यों?

ये पूछने पर कि देववृंद का क्या मतलब है, बृजेश सिंह ने कहा, ''यहां कई ऐसी चीज़ें हैं जिनके आधार पर देववृंद को महाभारत काल से जोड़ा जाता है. गांव रणखंडी है, पांडु सरोवर है और शक्तिपीठ भी है.''

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Image caption देश भर से नौजवान दारुल उलूम मदरसे में तालीम लेने आते हैं

भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा दिया था ऐसे में क्या ये एजेंडे से भटकना नहीं है, भाजपा विधायक ने कहा, ''हमें इसलिए जीत मिली है क्योंकि तीन साल केंद्र में सरकार ने अच्छा प्रदर्शन किया है. और हमारा एजेंडा विकास ही रहेगा.''

विकास का मुद्दा कहां गया?

बृजेश सिंह का कहना है कि वो हम देवबंद को विकास की तरफ़ ले जाना चाहते हैं और देवबंद बनाम देववृंद से जुड़ी बात इसके आड़े नहीं आएगी.

उनका कहना है कि वो जब विधानसभा पहुंचने पर देवबंद का नाम बदलकर देववृंद करने का प्रस्ताव ज़रूर सामने रखेंगे.

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भाजपा विधायक का कहना है, ''मेरी बात को मुद्दा बनाया जा रहा है. मैने तो यह भी कहा कि मुझे तीन तलाक़ के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं का वोट मिला है, लेकिन उस पर कोई बात नहीं कर रहा.''

विकास में कोई हिंदू-मुसलमान नहीं

विधायक के मुताबिक भाजपा सरकार विकास में यक़ीन रखती है और विकास में कोई हिंदू-मुसलमान नहीं होता.

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उन्हें 102244 वोट मिले जबकि दूसरे नंबर पर रहे बहुजन समाज पार्टी के माजिद अली 72844 वोट बटोरने में कामयाब रहे. 55385 वोट के साथ समाजवाद पार्टी के माविया अली तीसरे पायदान पर रहे.

देवबंद में दारूल उलूम मदरसा है. ऐसा माना जाता है कि मिस्र के इस्लामी मदरसे अल अज़हर के बाद ये दूसरा सबसे अहम इस्लामी शिक्षण संस्थान है.

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