तमिलनाडु के किसान खोपड़ी लेकर क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन

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तमिलनाडु के किसानों ने कहा सूखे के कारण उनके साथी कर रहे हैं आत्महत्या

जंतर मंतर दिल्ली का प्रदर्शन स्थल है. वहां नीली रंग की लुंगी पहने पहने, हाथ में नर खोपड़ी लिए सी पलनीस्वामी सड़क पर बैठे थे.

ये खोपड़ियां उन किसानों और उनके परिवारवालों की हैं जिन्होंने तमिलनाडु में कर्ज़ के बोझ या फिर पानी की कमी के कारण सूख रहे खेतों को देखकर आत्महत्या की.

किसानों की आत्महत्या नहीं पेट दर्द से मौतें

तमिलनाडु में भारी सूखे की मार और कर्ज़ के बोझ के तले दबे करीब 100 किसान यहां भूख आंदोलन पर बैठे हैं.

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सी पलनीस्वामी त्रिची से हैं. वो बताते हैं कि किसानों पर 50 हज़ार से पांच लाख तक का कर्ज़ है.

वो कहते हैं, "सरकार ने छोटे किसानों की दिखावे के लिए मदद की लेकिन ज़्यादातर किसानों को कोई मदद नहीं मिली. हमारी मांग है कि किसानों के कर्ज़ माफ़ हों. उन्हें नए कर्ज़ दिए जाएं ताकि वो काम जारी रख सकें."

लेकिन क्या आत्महत्या करने वाले किसानों की खोपड़ियां लेकर प्रदर्शन करना सही है?

किसानों की आत्महत्या के आंकड़े कैसे कम हुए?

एक किसान ने कहा, "हमने ये कदम सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया था. हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था."

पास ही नाचम्मा खड़ी थीं. तमिलनाडु के मरम्मा ज़िले की नाचम्मा के शरीर पर पेटीकोट था और बाकी का तन पत्तों से ढका था.

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वो कहते हैं, "हम किसान हैं. बैंक ने हमारे जेवरों की नीलामी कर दी. हमारे पास पानी नहीं हैं, बीज नहीं है. कर्ज़ लेकर 700 फीट गहराई कर कुंआ खुदवाया लेकिन पानी नहीं निकला. जिनसे पैसे उधार लिए वो कहते हैं जब उधार लौटा नहीं सकते तो लेते क्यों हैं. ये कपड़े पहनने की क्या ज़रूरत है, नंगे घूमो."

नाचम्मा के ऊपर तीन लाख का कर्ज़ है. उनके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं हैं. उनके दो लड़के हैं लेकिन इसके बावजूद भी वो मज़दूर कर पेट पालने पर मजबूर हैं.

किसान आत्महत्या: 5 बदतर राज्यों की तस्वीर

नाचम्मा कहती हैं, "जब तक न्याय नहीं मिलेगा, हम गांव नहीं जाएंगे." सेलम्मा के ऊपर पांच लाख का कर्ज़ है. वो कहती हैं, "पीने के लिए पानी नहीं है तो खेती कैसे करेंगे."

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उनके पति ने कहा, "दो साल पहले जो सूखा था वो बढ़ गया है. कूआं खोदने के लिए गहरा खोदते हैं 300-400 फीट में भी सूखा है. पूरे तमिलनाडु में सूखा है. हम मनरेगा पर निर्भर हैं."

एक अन्य किसान ने कहा, "जब सरकारें कंपनी के कर्ज़ों को माफ़ कर देती हैं, तो इन किसानों के कर्ज़ क्यों माफ़ नहीं करतीं. तमिलनाडु रेगिस्तान बन रहा है. कावेरी डेल्टा सूखा है. खाने पीने के लिए भी कुछ नहीं है."

किसान मिल्क्योराज के चाचा की बेटी ने आत्महत्या कर ली थी.

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वो कहते हैं "किसान अपने सूखे खेत देखकर आत्महत्या कर रहे हैं. पिछले साल 400 किसानों ने आत्महत्या की."

एक अन्य किसान ने कहा, "हमने अपने घर के जेवर गिरवी रखकर गन्ने के खेत की खेती की लेकिन सारे पैसे चले गए. डेल्टा में मिट्टी की तस्करी होती है जिससे सूखा बढ़ता है."

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