वो सिंगल जिन्होंने सियासत में 'जमाया' है सिक्का!

  • 20 मार्च 2017
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पहले मनोहर लाल खट्टर, फिर सर्बानंद सोनोवाल और अब योगी आदित्यनाथ.

तीन राज्यों की कमान संभालने वाले इन तीनों नेताओं में एक ख़ास समानता है.

खट्टर, सोनोवाल और आदित्यनाथ तीनों ही सिंगल हैं. आप चाहें तो इसे महज़ संयोग मान सकते हैं या फिर इस नतीजे तक पहुंच सकते हैं कि भारतीय जनता पार्टी में उस नेता के गद्दी पर बैठने की संभावना बढ़ जाती है, जो सिंगल हो.

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इसके सबसे बड़े उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं. उनकी शादी ज़रूर हुई थी और शादी के बारे में अपने हलफ़नामे को लेकर वे विवादों में भी रहे.

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लेकिन मोदी जब से राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हुए हैं, तब से वे अकेले ही रह रहे हैं- चाहे गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर, या अब प्रधानमंत्री की भूमिका में.

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राज्यों की तरफ देखें तो ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सिंगल ही हैं.

बीजू जनता दल के मुखिया और 2000 से ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक अपने पिता बीजू पटनायक के निधन के बाद राजनीति में आए.

राज्य में कांग्रेस पर हमला करने के लिए वे अपने 'सिंगल' होने का सहारा लेते रहे हैं और कहते रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी की तरह उनकी पार्टी में वंशवाद नहीं चलेगा, क्योंकि उनका परिवार ही नहीं है.

ये बात दूसरी है राजनीति में वे अपने पिता की जगह लेने के लिए आए थे.

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जबकि ममता बनर्जी भी इस बात का प्रचार करती रही हैं कि वो किसी को लाभ क्यों पहुंचाएंगी जब उनका कोई नहीं है.

यानी मौजूदा समय में पांच राज्यों की कमान एक तरह से 'कुंवारों' के हाथों में ही है. पिछले साल के अंत में निधन होने तक जयललिता भी अविवाहितों की इस सूची में शामिल थीं.

दरअसल सिंगल होने की सबसे ख़ास बात तो यही है कि ये नेता आम मतदाताओं को ऐसा समझा पाते हैं कि 'हम हर पल आपके लिए काम करेंगे और मेरा अपना है कौन जिसके लिए मुझे भ्रष्टाचार करने की ज़रूरत है.'

इनके अलावा भी तीन राज्यों के मौजूदा मुख्यमंत्री लंबे समय से अकेले रह रहे हैं. इन लोगों ने शादी ज़रूर की, लेकिन अलग अलग वजहों से अब अकेले हैं.

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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की शादी धौलपुर के महाराजा से 1972 में हुई. लेकिन एक साल बाद ही दोनों अलग हो गए.

वसुंधरा तब बेहद कम उम्र की थीं, लेकिन उनकी गोद में बेटा दुष्यंत भी था. इसके बाद वसुंधरा ने शादी नहीं की. 1984 में वे सक्रिय राजनीति में आईं और 2003 में राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं.

जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी अपने पिता की विरासत संभाल रही हैं.

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पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के कहने पर उन्होंने रिश्ते में चाचा लगने वाले जावेद इक़बाल से शादी तो की लेकिन कुछ ही सालों में दोनों का तलाक हो गया. तब तक महबूबा दो बेटियों की मां बन चुकी थीं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अकेले हैं. दरअसल उनकी पत्नी मंजु कुमारी सिन्हा का निधन 2007 में हो गया था. तब नीतीश राज्य के मुख्यमंत्री बन चुके थे.

इनके अलावा फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल उमा भारती ने भी शादी नहीं की है.

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हालांकि यूपी चुनाव में करारी हार के बाद उनके सामने राजानीतिक अस्तित्व का संकट उत्पन्न हो गया है.

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लगातार हार का सामना कर रहे कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी सिंगल ही हैं.

अब तो सोशल मीडिया पर इस बात के चटखारे भी लिए जाने लगे हैं कि सोनिया गांधी को ना तो बहू मिल रही है और ना ही बहुमत.

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वैसे अतीत में भी सिंगल रहे नेता भारतीय राजनीति में शिखर पर पहुंचते रहे हैं. अटल बिहारी वाजपेयी अब तक देश के इकलौते कुंवारे प्रधानमंत्री रहे हैं.

उनसे पहले, जवाहर लाल नेहरू जब प्रधानमंत्री थे, जो उस समय अकेले ही थे. 17 साल तक भारत के प्रधानमंत्री रहे नेहरू की पत्नी कमला नेहरू का देहांत 1936 में ही हो गया था.

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नेहरू के अलावा इंदिरा गांधी भी 1966 में जब पहली बार प्रधानमंत्री बनीं थीं तब उनके पति फिरोज़ गांधी का देहांत हुए छह साल बीत चुके थे.

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