केशव मौर्य और दिनेश शर्मा: उत्तर प्रदेश के दो उप-मुख्यमंत्री

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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ के नाम के साथ उप मुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा के नामों की घोषणा भी हुई.

ये दोनों नाम मुख्यमंत्री के देवादारों की लिस्ट में भी देखे जा रहे थे. केशव प्रसाद पिछड़े वर्ग का चेहरा माने जाते हैं तो दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने अगड़ों को ख़ुश करने की कोशिश की गई लगती है.

पार्टी में दोनों ही नेताओं की अहमियत है.

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केशव प्रसाद मौर्य

यूपी में पिछड़ों और दलितों का चेहरा माने जाने वाले केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष हैं. उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सत्ता में आने का श्रेय केशव प्रसाद मौर्य को भी जाता है.

केशव पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं, पिछड़े वर्ग से आते हैं और उनका संघ से भी जुड़ाव रहा है. बीजेपी में केशव प्रसाद मौर्य का राजनीतिक जीवन 2012 में शुरू हुआ.

2012 में इलाहाबाद की सिराथू सीट से वह MLA बने. 2014 में वह फूलपुर सीट से सांसद बने और 2016 में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बन गए.

बीजेपी में उनका राजनीतिक जीवन 4 साल का ही है लेकिन वीएचपी और बजरंग दल में वह 12 साल रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह ही मौर्य भी बचपन में चाय बेचते थे.

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दिनेश शर्मा

उप मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरा नाम है लखनऊ के मेयर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद क़रीबी डॉक्टर दिनेश शर्मा का जो भले ही ज़्यादा चर्चा में न रहे हों लेकिन मोदी के अच्छे संबंधों का उन्हें ज़बर्दस्त फ़ायदा मिला है.

वो अमित शाह के अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भी पसंदीदा माने जाते हैं.

केंद्र में सरकार बनने के तुरंत बाद पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की कुर्सी मिली और उन्हें अमित शाह ने अध्यक्ष बनते ही गुजरात का प्रभारी बना दिया. साफ़-सुथरी छवि भी उनकी दावेदारी को प्रभावी बनाती है.

लखनऊ विश्वविद्यालय में वाणिज्य के प्रोफ़ेसर दिनेश शर्मा लगातार दो बार से लखनऊ के मेयर हैं.

साल 2014 में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद पार्टी ने उन्हें न सिर्फ़ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया बल्कि गुजरात का प्रभार भी सौंपा.

कहा जाता है कि दिनेश शर्मा उन कुछ लोगों में शामिल हैं, जिन्हें पार्टी के 'अच्छे दिनों' में सबसे ज़्यादा पुरस्कार मिला.

नवंबर 2014 में उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय सदस्यता प्रभारी बनाया गया. उस समय बीजेपी के सदस्यों की एक करोड़ हुआ करती थी, अब यह संख्या 11 करोड़ पार कर गई है.

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