'योगी जनता की आवाज़ हैं और विधायक प्रतिनिधि'

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योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला कैसा है? इस पर लखनऊ में कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया इस प्रकार है.

"जनता ने विधायकों को चुना है और जनता की ही आवाज़ है कि योगी जी मुख्यमंत्री बनें, इसलिए उन्हें बनाया गया. विधायकों की योग्यता या अयोग्यता का सवाल नहीं है."

योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा के बाद लोकभवन के बाहर मौजूद कानपुर की एक बीजेपी नेता कलावती सिंह का ये कहना था.

वहीं जालौन से आए रवींद्रनाथ का कहना था कि बीजेपी ने हिन्दुत्व के नाम पर विधानसभा चुनाव जीता है, इसलिए हिन्दुत्व के प्रतीक योगी आदित्यनाथ को ही मुख्यमंत्री बनाना उचित है.

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रवींद्रनाथ और कलावती सिंह की तरह लोकभवन के बाहर खड़े तमाम कार्यकर्ताओं की यही राय थी कि योगी आदित्यनाथ ही बीजेपी के 'सर्वश्रेष्ठ' मुख्यमंत्री उम्मीदवार थे.

यह पूछे जाने पर कि यदि योगी आदित्यनाथ ही एकमात्र उम्मीदवार थे तो पार्टी ने उन्हें चुनाव से पहले क्यों नहीं घोषित किया, इस सवाल पर कई कार्यकर्ता भड़क तक गए.

प्रतापगढ़ से आए कई कार्यकर्ता मोदी-मोदी के नारे लगा रहे थे.

मेरे इस सवाल पर कुछ लोग कहने लगे, "ये पार्टी का काम है कि किसे मुख्यमंत्री बनाए या न बनाए, आप को या किसी और को इससे क्या करना. पार्टी ने सबसे सही व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया है."

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दरअसल बीजेपी के मुख्यमंत्री नाम का चयन यूं तो विधायकों की बैठक में होना था, लेकिन इसकी क़वायद पार्टी के केंद्रीय नेताओं के बीच चल रही थी.

पहले तो दिल्ली में होने वाली बैठकों में तमाम नाम सामने आते रहे, लेकिन योगी आदित्यनाथ का नाम शुरुआती चर्चाओं में रहने के बावजूद सामने नहीं आ रहा था.

लेकिन शनिवार को अचानक उनका नाम सुर्खियों में आया और उनके समर्थकों ने ज़बर्दस्त दबाव भी बनाया.

बताया जा रहा है कि इसी दबाव का नतीजा है कि पार्टी आलाकमान को मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हीं के नाम को स्वीकृत करना पड़ा.

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हालांकि योगी के नाम को अंतिम रूप विधायकों की बैठक में ही दिया गया और विधायकों की ओर से योगी के अलावा किसी दूसरे नाम का प्रस्ताव तक नहीं आया.

लेकिन ऐसा नहीं था कि सभी विधायक योगी आदित्यनाथ को ही मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाह रहे थे.

विधायकों की बैठक से बाहर निकले एक नवनिर्वाचित विधायक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "सिर्फ़ कहने के लिए विधायक दल की बैठक में नेता यानी मुख्यमंत्री चुना जाता है. वास्तव में उसे मनोनीत करके केंद्रीय नेता ही भेजते हैं और हमें तो सिर्फ़ हाथ उठा देना होता है."

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