दलित सिरीज़- 'अंबेडकर वाले रिंगटोन के कारण सागर को मार डाला'

  • 20 मार्च 2017
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(दलितों पर अत्याचार पर बीबीसी हिंदी की ख़ास सिरीज़ की अंतिम कड़ी में शेजवाल परिवार पर हुए अत्याचार की कहानी.)

सागर शेजवाल की हत्या केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि उनके मोबाइल फ़ोन का रिंग टोन डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रशंसा करने वाला था.

इस पर यक़ीन करना भले मुश्किल हो लेकिन 24 साल के नर्सिंग के छात्र सागर की हत्या मई, 2015 में शिरडी के पास ऊंची जाति के लोगों ने कर दी थी.

सागर महाराष्ट्र के दलित समुदाय महार से आते थे और उनकी हत्या करने वाले लोग शराब के नशे के साथ साथ ऊंची जाति की दबंगई में भी धुत थे.

सिरीज़ की पहली कड़ी- कुआं खोदने पर दलित को मार डाला था

एक कमरे के घर में सागर का परिवार शिरडी के राहाटा फाटा कॉलोनी में रहता है, जिस घर की दीवार पर सागर की एक बड़ी तस्वीर लगी है. एक तस्वीर डॉ. अंबेडकर की भी है.

लेकिन उनकी मां की आंखों में गमों का पहाड़ नज़र आता है. उनके युवा बेटे की जातिगत हिंसा में हत्या हुई, उस दिन को याद कर वे सुबकने लगती हैं.

मई, 2015 में सागर अपने एक दोस्त की शादी में शरीक होने के लिए शिरडी आए हुए थे. शादी के जश्न में शामिल होने के दौरान वे अपने दो चचेरे भाइयों के साथ स्थानीय बीयर की दुकान तक गए.

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वहां पहले से ही मराठा समुदाय के नौ लोग बैठे हुए थे. उन्होंने सागर के फ़ोन के रिंगटोन पर आपत्ति जताई. ये रिंग टोन था- तुम्हीं करारे किती हाला, लाइ मज़बूत भीमच्चा किला (आप चाहे जितने हमले कर लो, भीम का किला मज़बूत बना रहेगा). यह डॉ. अंबेडकर और उनके आदर्शों को प्रतिध्विनित करता है.

उन लोगों ने सागर से इस रिंगटोन को बदलने के लिए कहा, जिससे सागर ने इनकार कर दिया. बातों से शुरू होकर वो हाथापाई पर उतर आए. उन्होंने सागर और उसके दोनों भाइयों को नीचे गिराकर घसीटना शुरू किया.

इस खींचतान में सागर के दोनों भाई भागने में कामयाब हुए. लेकिन वे सागर को अपनी मोटरबाइक पर लेकर मनमाड हाईवे से सटे जंगल के इलाके में ले गए. वहां उन्होंने उसकी नृशंस हत्या कर दी और उसके शरीर के अंगों को क्षत विक्षत कर दिया और नग्न स्थिति में शव को वहीं छोड़ दिया.

उधर सागर के परिवार वालों ने अपने लड़के की तलाश शुरू की. वे जब पुलिस के पास मदद मांगने पहुंचे तो पुलिस का रवैया भी टालमटोल वाला था.

सागर की बड़ी बहन अश्विनी बताती हैं, "हमने सोचा कि वह शादी में गया है, लेकिन उसके फ़ोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा था. हम लोगों ने उसे हर जगह तलाशा. "

सिरीज़ की दूसरी कड़ी- 'बेटे को ऐसे मार डाला जैसे पागल कुत्ते को मारते हैं'

"जब हमारे रिश्तेदार पुलिस स्टेशन गए तो पुलिस वालों ने कहा कि वे गर्मी में बाहर नहीं निकल सकते. वे एअर कंडीशनर कार चाहते थे. ऐसे में हमारे रिश्तेदारों ने एअर कंडीशनर कार का इंतज़ाम किया. लेकिन वे तब भी सागर को नहीं तलाश पाए."

उन्होंने बताया कि सागर को वे लोग बीयर शॉप से कोई 12 किलोमीटर दूर रूई ले गए थे, जहां पर उनकी हत्या हुई थी, वे शेट्टी महामंडल की ज़मीन थी.

सागर के दोस्तों ने एक अभियुक्त की पहचान की, बीयर शॉप में लगे सीसीटीवी फ़ुटेज के ज़रिए, जो रूई गांव का था. इसके बाद वे लोग वहां गए, तो वह शराब के नशे में था. उसने एक अन्य आरोपी का नाम लिया, तब सागर के दोस्त शिंगवे शिवारे के पास पहुंचे. वे दोस्त दोनों अभियुक्तों को लेकर पुलिस के पास गए, लेकिन पुलिस वालों ने कुछ नहीं किया.

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सागर के साले का दावा है कि पुलिस को शायद मालूम था कि अभियुक्त कौन लोग हैं और इसलिए उन्होंने जांच को जानबूझ कर धीमा रखा. शिकायत दर्ज करने में भी आनाकानी थी.

जब ये लोग शिंगवे शिवारे के घर पहुंचे तो एक मज़दूर ने सागर के रिश्तेदारों को बताया कि उसने नग्न अवस्था में पड़ा एक शव पास के खेत में देखा है. जब ये लोग वहां पहुंचे तो वहां सागर का शव विकृत अवस्था में पड़ा हुआ था.

शाम के सात बजे पुलिस ने शव का पंचनामा किया और उसके बाद शिकायत दर्ज की. पहले तो पुलिस ने हत्या की वजह पारिवारिक विवाद आदि ठहराने की कोशिश की.

अश्विनी बताती हैं, "पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के क्रास चेक करने के बाद ही दलितों पर अत्याचार रोकने संबंधी अधिनियम लगाया गया. बीयर की दुकान पुलिस स्टेशन के पास थी, लिहाजा मामला दर्ज होने के बाद पुलिस वालों ने पूरी मदद की है."

इस मामले की मौजूदा स्थिति क्या है?

इस मामले में नौ आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया, वे जेल में हैं. उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 395, 201, 109 और अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 (2) (V) और 3 (1) (X) धारा लगाई गई. हालांकि आरोपी अब वकील की अनुपलब्धता या फिर बीमारी का बहाना बनाकर जांच की प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं.

सागर के छोटे भाई आकाश का दावा है कि एक आरोपी का चाचा, स्थानीय दबंग है और वो गांव वालों को डरा धमका रहा है. डर के असर से गांव वाले गवाही देने से इनकार कर चुके हैं. ऐसी सूरत में मामला सीआईडी को सौंपा गया है, लेकिन सागर के परिवार वालों को इसके बाद कोई ख़बर नहीं मिली है. मामला अभी भी कोपारगांव अदालत में लंबित है और शिरडी पुलिस की देखरेख में चल रहा है.

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राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग ने परिवार को 1.75 लाख रुपये की मदद दी है. परिवार वालों ने राज्य के मुख्यमंत्री से आरोपियों को मौत की सजा दिलाने और उन्हें नई जगह बसाने का अनुरोध किया है. हालांकि उनके अनुरोध पर अब तक जवाब नहीं मिला है.

सागर शेजवाल के पिता सुभाष शेजवाल शिरडी के साईबाबा संस्थान के स्वास्थ्य विभाग में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते हैं. वे कहते हैं, "सागर अच्छा लड़का था, वह अपनी ज़िम्मेदारियों को समझने लगा था. जीवन की दिशा ही बदल गई है. रिटायर होने के बाद पेंशन भी नहीं मिलेगी. छोटे बेटे के करियर बनाने के लिए भी समय नहीं बचा है मेरे पास. सरकार को मेरे छोटे बेटे को नौकरी देनी चाहिए."

सागर की दुखी मां अनिता शेजवाल आरोपियों को मौत की सजा देने की मांग करते हुए कहती हैं, "मुख्य आरोपी मराठा समुदाय से हैं, उन्हें हमारे प्रति इतना ग़ुस्सा क्यों है."

नर्सिंग के छात्र सागर अप्रेंटिसशिप कर रहे थे, जो एक महीने में पूरी होने वाली थी. परिवार उम्मीदों के साथ उनकी नौकरी और बेहतर भविष्य की ओर देख रहा था. लेकिन बाबा साहब अंबेडकर की प्रशंसा वाला रिंग टोन पूरे परिवार के लिए अंधकार का सबब बन गया, आप चाहें तो इसे तथाकथित ऊंची जाति की दबंगई भी कह सकते हैं.

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