'कौन सा पाप किया कि सर पर बाल नहीं रहे?'

  • 21 मार्च 2017
इमेज कॉपीरइट Ketaki Jani

"जब पति मर जाता है तब औरतें गंजी हुआ करती थीं. तुम्हारा तो पति ज़िंदा है फिर भी तुम्हारे बाल नहीं तो ऐसा कौन सा पाप किया होगा तुमने?"

46 वर्षीय केतकी जानी ने अर्से तक ऐसे चुभते सवालों का सामना किया.

2011 में केतकी ने जब 40 की उम्र का पड़ाव पार किया तो उन्हें कल्पना भी नहीं थी कि उनकी ज़िंदगी पूरी तरह से बदलने वाली है.

इमेज कॉपीरइट Ketaki Jani

केतकी पुणे में महाराष्ट्र राज्य पाठ्यक्रम ब्यूरो में गुजराती भाषा विभाग में स्पेशल ऑफिसर के पद पर काम करती थी. एक दिन दफ्तर में सर पर हाथ फेरते समय बालों के बीच गोल बिंदी जैसा चकत्ता महसूस हुआ.

सहकर्मी ने पुष्टि की तो केतकी जानी दफ्तर के बाद तुरंत अपने डॉक्टर से मिलने निकल गईं जहां उन्हें पता चला कि वो "एलोपेसिया" की शिकार है.

"एलोपेसिया" एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज़ के शरीर से बाल झड़ जाते हैं और कभी भी उगते नहीं हैं.

गंजा होने के अपने फ़ायदे भी हैं

जहां गंजे मनाते हैं गंजेपन का जश्न

अपनी बीमारी के बारे में जानकार केतकी जानी के पैरों तले ज़मीन ख़िसक गई. वो नहाने जातीं तो पूरा स्नानघर उनके बालों से भर जाता. अपने बाल बचाने के लिए केतकी को जिसने जो दवाई बताई, उन्होंने आजमाई.

इमेज कॉपीरइट Ketaki Jani

पैसे और दूसरी चीज़ों की परवाह किए बिना उन्होंने हर कोशिश की पर केतकी के शरीर ने बाल बचाने की कोशिश में उनका साथ नहीं दिया. देखते ही देखते तीन से चार महीने में वो अपने सारे बाल खो बैठीं.

बाल बचाने के लिए केतकी इतनी बेक़रार हो गई थीं कि वो "स्टेरॉइड" की दवाइयां भी लेने लगीं जिससे नए बाल तो आए पर इसका बुरा प्रभाव उन्हें शरीर पर दिखने लगा.

वो अपनी दिनचर्या में ध्यान नहीं लगा पा रही थीं. उनका वज़न 50 किलो से 85 किलो हो गया था. उनकी याददाश्त कमज़ोर होने लगी थी.

परिजन के आग्रह पर उन्होंने "स्टेरॉइड" का सेवन बंद कर दिया. सिर्फ़ 15 दिन में उनके नए बाल झड़ गए और वो फिर गंजेपन की शिकार हो गईं.

इमेज कॉपीरइट Ketaki Jani

केतकी बताती हैं, "मेरी गयनाक्लॉजिस्ट कहती थीं कि मेरे बाल डिम्पल कपाड़िया जैसे दिखते हैं. वो साढ़े तीन साल मेरी ज़िंदगी के सबसे बुरे साल रहे. सरकारी नौकरी करती थी तो काम पर जाना अनिवार्य था. सुबह दुपट्टा ओढ़कर छुपते-छुपाते दफ़्तर पहुंचती और ज़ल्द घर आने की कोशिश करती. सिर्फ़ रात का इंतज़ार करती ताकि कोई मुझे देख ना सके. दुआ करती कि सुबह ही ना आए. बाथरूम में रोया करती और सोचती थी कि मौत आ जाए."

वो कहती हैं, "मुझे लोगों से डर लगने लगा था. वो लोग नहीं सवाल थे. सबको लगता कि मैं कैंसर की पीड़िता हूं. मोहल्ले के छोटे बच्चों की सभी माँ बच्चों से कहती कि ये आंटी कुछ दिन में मर जाएंगी. बूढ़े बुज़ुर्ग कहते कि जब कोई घोर पाप किया हो तभी ऐसे रोग होते हैं. कोई कहता कि पति के मर जाने के बाद औरत के बाल नहीं होते तो कोई पूछता क्या आपने कोई मन्नत मांगी थी जो पूरी होने पर वादा नहीं रखा तभी भगवान ने ऐसा किया."

हमारे यहां हीरो गंजे क्यों नहीं होते?

इमेज कॉपीरइट Ketaki Jani

समाज की कठोर टिप्पणियों की वजह से केतकी जानी डिप्रेशन में चली गईं. समाज से कटा हुआ महसूस कर रही केतकी जानी को उस दौरान क़िताबों ने संभाला.

हालांकि उनके सहकर्मी उन्हें दफ़्तर में घर जैसा माहौल देने की पूरी कोशिश करते.

सर पर बाल न होने के कारण आस-पड़ोस के लोगों का नज़रिया उनके प्रति बदल गया लेकिन गली- मोहल्लों के कुत्तों को खाना खिलाने वाली केतकी के लिए जानवरों के प्यार में कोई बदलाव नहीं आया.

इमेज कॉपीरइट Ketaki Jani

मां की तकलीफ़ को महसूस कर रही कशोर उम्र की बेटी पुण्यजा ने केतकी को एक शाम अपने पास बिठाया और कहा,"आप बहुत खूबसूरत हो. मैं भी अपना सर मुंडवा लेती हूं फिर हम दोनों साथ-साथ बाहर जाएंगे. 3 साल आपने ये सोचने में गुज़ार दिए कि लोग क्या सोच रहे हैं. ये उनकी परेशानी है. अब आप अपने बारे में सोचो."

बेटी के बोल ने केतकी को हिम्मत दी और एक दिन बिना दुप्पटा लिए वो काम के लिए निकल पड़ीं. रास्ते में मिलने वाले सभी लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं लेकिन केतकी ने पीछे पलट कर नहीं देखा. उनमें पनपे नए आत्मविश्वास ने उन्हें आक्रामक बना दिया था. जब कोई उनके गंजेपन पर टिप्पणी या मज़ाक करता उसे वो पलट कर जवाब दे देतीं.

इमेज कॉपीरइट Ketaki Jani

टैटू की हमेशा से चाह रखने वाली केतकी ने 4-5 महीने में तय किया कि वो अपने सर पर मंडोला टैटू बनवाएंगी जो पूरे ब्रह्मांड को दर्शाता हो.

समाज की परवाह किए बिना केतकी ने जीना शुरू कर दिया था. तभी सोशल मीडिया पर उन्हें "मिसेज इंडिया वर्ल्ड वाइड" प्रतिस्पर्धा के बारे में पता चला जिसमें उम्र की श्रेणी 25-45 साल थी.

अपनी जिज्ञासा के लिए उन्होंने नामांकन भर दिया और उन्हें स्पर्धा के चुनाव के लिए मुंबई बुलाया गया.

'मेरा हीरो तो गंजा, बुड्ढा और बदसूरत है'

इमेज कॉपीरइट Ketaki Jani

जवान और खूबसूरत चेहरे और बालों वाली प्रतियोगियों की नज़रों ने केतकी के आत्मविश्वास को फिर से डगमगा दिया था. लेकिन केतकी का चयन हुआ और स्पर्धा में उन्होंने ज़ीनत अमान के हाथों "इंस्परेशन अवॉर्ड" भी मिला.

ज़ीनत अमान ने केतकी को गले लगाकर कहा,"भले ही ख़िताब किसी को भी मिले मेरे लिए तुम विजेता हो. फ़िल्म इंडस्ट्री में 50 - 60 फ़ीसदी ऐसे लोग हैं जो बिना विग (नकली बाल) के बाहर नहीं निकलते."

ज़ीनत अमान के इन शब्दों ने केतकी को हिम्मत दी.

ख़िताब लेकर केतकी जब अपने शहर पहुंची तो लोगों का उनके प्रति नज़रिया बिलकुल बदल चुका था. नई ज़िंदगी में केतकी ने अपने ऊपर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है.

इमेज कॉपीरइट Ketaki Jani

वो ज़िंदगी के हर एक पल को जीना चाहती है. वो अब मन चाहे कपडे पहनती हैं. अपने दोस्तों के साथ पार्टी में जाती हैं. अब वो अपनी बेटी की सभी सहेलियों की सहेली भी बन चुकी हैं.

केतकी के मुताबिक, "भारतीय समाज असफल है क्योंकि यहां बालों वाली महिला को खूबसूरत करार दिया जाता है. पुराणों में भी गंजी महिलाओं का उल्लेख नहीं है और पति के मर जाने के बाद ही गंजी औरत का उल्लेख है."

गंजे सिर पर दोबारा उग सकेंगे बाल

बीते वक़्त को याद करते हुए केतकी कहती हैं," बिना बाल वाली औरत को अपशगुन माना जाता है और अछूतों जैसा बर्ताव किया जाता है. समाज की ज़िम्मेदारी होती है कि जो लोग ज़िंदगी के बुरे दौर से गुज़र रहे हैं उनकी हिम्मत बनाए रखने में मदद करें.

पर समाज इसमें पूरी तरह से असफल हुआ है. आज भी एलोपेसिया की शिकार कई महिलाएं समाज के नज़रिए से डर कर विग और दुप्पटे का सहारा लेती है या अपने आप को घर में कैद कर लेती हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे