मोहसिन रज़ा: यूपी की सियासी पिच का इकलौता मुसलमान मंत्री

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क्रिकेटर से राजनेता बने मोहसिन रजा योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री बनाए गए हैं.

उन्होंने फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट खेला. रणजी में हिस्सा लिया. और अब मध्यम गति के तेज़ गेंदबाज़ रहे मोहसिन रज़ा इस बार सियासी पिच पर उतरे हैं.

मोहसिन रज़ा को भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार का एकलौता मुसलमान मंत्री बनाया है.

'हमारी सरकार की मंशा साफ़'

बीबीसी हिंदी से किए फ़ेसबुक लाइव में मोहसिन रज़ा ने कहा, "राजनीति और क्रिकेट दोनों टीम गेम है. क्रिकेट भी मैं देश के लिए खेल रहा था और राजनीति भी एक राष्ट्रीय पार्टी बीजेपी के लिए कर रहा हूं. यहां भी मुझे देश के लिए ही काम करना है."

लेकिन मोहसिन का महकमा फिलहाल तय नहीं है. विभागों के बंटवारे पर अनिश्चितता बनी हुई है. बीजेपी ने राज्य में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तय करने में लंबा वक़्त लिया.

बीबीसी के इन सवालों पर मोहसिन रज़ा का जवाब था, "यूपी बड़ा सूबा है. यहां से प्रधानमंत्री चुने जाते हैं. उत्तर प्रदेश की जनता ने मोदी जी पर ही भरोसा जताया है. हमें सारी चीज़ों को देखना है. क़ानून व्यवस्था बड़ा मुद्दा था.

योगी जी की सरकार ने अभी शपथ भी नहीं ली थी कि पुलिस ने कई अभियुक्त मंत्रियों को जेल भेजना शुरू कर दिया था. हमारी सरकार की मंशा साफ है. हम सबके साथ सबका विकास करेंगे."

उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार का मुस्लिम चेहरा बने मोहसिन रज़ा

'निज़ाम बदला है, लोग नहीं बदले'

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'विपक्ष ने लोगों को गुमराह किया'

क्या भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किसी मजबूरी में एक मुसलमान को अपना मंत्री बनाया है क्योंकि विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी ने टिकट तो किसी को नहीं दिया था ?

इसपर मोहसिन कहते हैं, "विपक्ष ने लोगों को बहुत ज़्याादा गुमराह किया है. मायावती जी ने सौ टिकट बांट दिए मुसलमानों को. अखिलेश ने बड़ी तादाद में मुसलमानों को टिकट दिए. हमको अलग करने के लिए बांटने की राजनीति तो विपक्ष ने की है.

भारतीय जनता पार्टी के पास कोई था ही नहीं जिसे टिकट दिया जा सके. ज़ाहिर सी बात है कि जीतने वाले उम्मीदवार को ही टिकट दिया जा सकता था. भारतीय जनता पार्टी ने कभी भी बांटने की राजनीति नहीं की है. न मैं एमएलसी हूं और न विधायक हूं. मैं मोहसिन रज़ा एक मामूली सा कार्यकर्ता हूं. भारतीय जनता पार्टी ने मुझे करोड़ों मुसलमानों की नुमाइंदगी का मौक़ा दिया है."

वे सियासत में आने से पहले खिलाड़ी रहे हैं, इसलिए ज़ाहिर है कि राज्य में उनसे खेलों के विकास की उम्मीद की जाएगी.

वे कहते हैं, "मैंने इसका ज़िक्र अपने डिप्टी सीएम और सीएम से भी किया है. मैं खेलों के विकास पर काम करना चाहता हूं. हम राज्यों के नौजवानों का रुझान खेलों में बढ़ाने के लिए हर कोशिश करेंगे."

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'योगी कठोर प्रशासक हैं''

योगी आदित्यनाथ को राज्य की राजनीति में कट्टर हिंदुत्व के चेहरे के तौर पर देखा जाता है. मोहसिन अपने मुख्यमंत्री के बारे में निजी तौर पर क्या सोचते हैं.

उन्होंने कहा, "वे कठोर प्रशासक हैं. मोदी जी ने पूरे हिंदुस्तान की नौकरशाही को दुरुस्त कर दिया. योगी जी भी मोदी जी की तरह ही काम करेंगे. योगी जी प्रधानमंत्री जी की पसंद हैं."

मोहसिन 1996 से ही बीजेपी से जुड़े हुए हैं. वो पार्टी में वाजपेयी का दौर था. वो कहते हैं कि तब मैं क्रिकेट छोड़कर वाजपेयी जी को सुनने जाया करता था और इस तरह से पार्टी की विचारधारा से जुड़ गया.

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2013 में वो स्पोर्ट्स कोटे पर मिली सरकारी नौकरी छोड़कर मोदी की बीजेपी से आधिकारिक तौर पर जुड़ गए.

बीजेपी और अल्पसंख्यकों के बीच की दूरियां हमेशा से सुर्खियों में रही हैं. ये सवाल बीबीसी ने मोहसिन से पूछा कि भाजपा सत्ता में आने पर इस दूरी को मिटाने के लिए क्या करेगी. मोहसिन कहते हैं, "बीजेपी ने हमेशा सभी तबकों को साथ लेकर चलने की बात कही है. ये बात पार्टी के घोषणापत्र में भी है."

राम मंदिर के सवाल पर मोहसिन का कहना है कि कोर्ट के फैसले के मुताबिक ही अमल किया जाएगा.

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