अजमेर धमाके के गुनहगार देवेंद्र और भावेश हैं कौन?

  • 22 मार्च 2017
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राजस्थान में सूफ़ी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में कोई नौ साल पहले हुए धमाके में दोषी करार दिए गए भावेश पटेल, देवेंद्र गुप्ता और दिवंगत सुनील जोशी का संबंध हिंदूवादी संगठनों से रहा है.

2007 के इस विस्फोट में तीन लोग मारे गए थे और 17 लोग घायल हुए थे. यह विस्फोट साल 2007 में 11 अक्टूबर को रमज़ान के महीने में हुआ था.

छह मार्च 2017 को इस मामले में कोर्ट ने तीन लोगों को दोषी ठहराया था. ये तीन हैं- देवेंद्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी. देवेंद्र गुप्ता और सुनील जोशी आरएसएस के पूर्व कार्यकर्ता रहे हैं.

अजमेर विस्फोट- दो को उम्रकैद की सज़ा-

असीमानंद कौन हैं

तीनों को एनआईए कोर्ट ने बम प्लांट करने और धार्मिक भावना भड़काने के मामले में दोषी ठहराया था. देवेंद्र गुप्ता और भावेश पटेल को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया था जबकि सुनील जोशी की धमाके के ठीक बाद रहस्यमय तरीके से मौत हो गई थी.

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Image caption असीमानंद

इस मामले में असीमानंद, चंद्रशेखर लेवे, मुकेश वसानी, भारत मोहन रतेश्वर, लोकेश शर्मा, मेहुल कुमार और हर्षद सोलंकी को रिहा कर दिया गया था. इसके साथ ही सुरेश नायर, संदीप डांगे और रामचंद्र को भगोड़ा घोषित कर दिया गया था.

इनमें देवेंद्र गुप्ता और सुनील जोशी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे और बाद में उन्होंने अपनी अलग राह निकाल ली. हालांकि आरएसएस इनके संगठन से जुड़े होने के दावों से इनकार करती है. संघ का कहना है कि उनका संगठन ऐसी किसी भी गतिविधि में विश्वास नहीं रखता है. जयपुर की अदालत ने इन दोनों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है.

धमाके की इस घटना में कसूरवार ठहराए गए देवेंद्र गुप्ता और भावेश पटेल अभी जेल में हैं. मगर तीसरे दोषी सुनील जोशी की इस धमाके की घटना के कुछ महीने बाद ही मध्य प्रदेश में हत्या हो गई थी.

जोशी की हत्या के मामले में मध्य प्रदेश के विदिशा में मुकदमा भी चला, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला.

पिछले महीने ही अदालत ने इस मामले में आरोपों का सामना कर रहे आठ लोगों को बरी कर दिया. इसके साथ ही यह राज़ हमेशा के लिए दफ़्न हो गया कि आख़िर सुनील जोशी को किसने और क्यों मौत के घाट उतारा.

देवेंद्र गुप्ता

इस धमाके की प्रारंभिक जांच करने वाले राजस्थान पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने अपनी चार्जशीट में देवेंद्र गुप्ता के बारे में पूरी जानकारी दी है.

Image caption देवेंद्र गुप्ता

चार्जशीट के मुताबिक, "देवेंद्र गुप्ता मध्य प्रदेश के मउ में आरएसएस के पदाधिकारी रहे हैं. इसी दौरान वो सुनील जोशी के संपर्क में आया और उनके हिंदुत्व के विचारों से बेहद प्रभावित हुआ. दोनों प्रायः मिलते रहे. यह घनिष्टता वैचारिक थी, व्यक्तिगत भी."

फिर देवेंद्र गुप्ता झारखण्ड के जामताड़ा में आरएसएस के प्रचारक की हैसियत से काम करने लगे. जांच के मुताबिक, इसके बावजूद जामताड़ा से विदिशा का यह फ़ासला उन्हें सुनील जोशी से दूर नहीं ले जा सका.

राजस्थान पुलिस के दस्ते ने जांच में पाया कि ये दोनों फिर आरएसएस से अलग होकर हिंदुत्व की अलग मंज़िल के लिए चल पड़े.

यूं तो देवेंद्र गुप्ता राजस्थान के अजमेर के निवासी हैं, मगर अपने वैचारिक मक़सद की ख़ातिर वो मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों के चक्कर लगाते रहे.

जांच एजेंसी को दिवंगत सुनील जोशी की निजी डायरी हाथ लग गई. इस डायरी से पुलिस को जोशी और उनके समूह के हिंदुत्वादी दृष्टिकोण और संपर्क सूत्रों का पता लगा. जोशी इन सबके बीच एक प्रेरक कड़ी थे.

भावेश पटेल

गुजरात में भरूच के भावेश पटेल पुलिस की जांच में ख़ुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं. वो उन दिनों अंकलेश्वर में एक कम्पनी में काम करते थे.

Image caption भावेश पटेल

पुलिस जांच में उन्हें दरगाह में विस्फोटक रखने वाले व्यक्ति के रूप में बताया गया है.

भावेश ने इकबालिया बयान दिया है. देवेंद्र गुप्ता, भावेश और दिवंगत सुनील जोशी में यह भी समानता है कि तीनों अविवाहित रहे.

आरएसएस का कहना है कि इन में से किसी का भी उनके संगठन से कोई सरोकर नहीं है.

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आरएसएस के एक पदाधिकारी ने कहा, "न तो संघ इस तरह की किसी गतिविधि में भरोसा करता है और न ही यह उसके विचारों में है."

इन धमाकों की जांच बहुत लंबी चली. इसमें कई उतार-चढ़ाव आए. कभी हालात ने हादसे को बयां किया तो कभी दलील, दस्तावेज और गवाह काम आए ताकि कार्यवाही सच्चाई तक पहुंच सके.

मगर कुछ सवाल अभी भी बने रहेंगे.

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