मंदिर पर कोर्ट ही फ़ैसला दे तो अच्छा: राम माधव

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इसी हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर विवाद पर दोनों पक्षों को साथ मिलकर सहमति बनाने का भी एक विकल्प दिया था. सुप्रीम कोर्ट के इस ऑब्जर्वेशन को दोनों पक्षों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आई है. कुछ लोगों ने इसका स्वागत किया है तो कई लोगों ने असहमति जताई है.

भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव ने बीबीसी से कहा कि बीजेपी बातचीत के ख़िलाफ़ नहीं है, लेकिन फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए आए तो ज़्यादा अच्छा रहेगा. राम मंदिर का मामला एक बार फिर से गर्मा गया है.

उन्होंने कहा कि इससे पहले भी राम मंदिर के मसले को बातचीत से सुलझाने की कोशिश की जा चुकी है, लेकिन कोशिशें विफल रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट के ऑब्जर्वेशन के बाद बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा कि अगर बातचीत से ये मामला नही सुलझाया जाता तो 2018 में क़ानून के ज़रिए राम मंदिर बनाएंगे.

इस पर राम माधव ने कहा, ''यह सुब्रमण्यन स्वामी का विचार है और कोई भी अपना विचार व्यक्त कर सकता है. क़ानून के ज़रिए राम मंदिर बनाने का विचार नया नहीं है, लेकिन इससे पहले कोर्ट को इस पर निर्णय लेना होगा और इसके बाद ही नए विचार खुलते हैं.''

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आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर राम माधव ने कहा, ''योगी आदित्यनाथ काफ़ी वरिष्ठ और लोकप्रिय नेता हैं. किसी विशेष संदर्भ में उनके बयानों को अलग परिप्रेक्ष्य में दिखाकर विवाद किया गया है.''

राम माधव ने कहा, ''भाजपा के अभियान को लेकर जो व्यापक ग़लतफ़हमी है उसके शिकार वो भी हैं. उनके अच्छे बयानों को सब भूल जाते हैं.''

उन्होंने कहा कि मोदी जी का दृष्टिकोण है- विकास और एकता. हम इसे ही आगे बढ़ाएंगे और योगी भी यही करेंगे.

राम माधव का कहना है कि योगी पर आरोप राजनीति से प्रेरित हैं. उन्होंने कहा, ''जब कोई दोषी पाया जाता है तो चुनाव लड़ने पर रोक है. इसलिए सिर्फ़ आरोपों के आधार पर किसी की छवि बनाना ठीक नहीं है.''

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योगी के घर वापसी जैसे मुद्दों पर उन्होंने कहा, ''अगर एक को धर्मपरिवर्तन कराने का अधिकार है तो दूसरे को कैसे रोका जा सकता है.''

राम माधव कहते हैं कि धोखाधड़ी, जबरन या फिर लालच देकर धर्म परिवर्तन नहीं होना चाहिए. अगर एक बार धर्म परिवर्तन हुआ तो फिर घर वापसी भी हो सकती है.

योगी आदित्यनाथ से मुस्लिमों में कथित डर और दबाव की स्थिति की बात को राम माधव ने ख़ारिज कर दिया. उन्होंने कहा, ''डर और आरोप बेबुनियाद हैं. भाजपा के ढाई साल के शासन में सांप्रदायिक सौहार्द्र बढ़ा है और दंगा फ़साद नहीं हुआ है.''

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