ज़ब्त रहेगा एआईएडीएमके का चुनाव चिन्ह

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भारत के चुनाव आयोग ने ऑल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी एआईएडीएमके का चुनाव चिन्ह सीमित समय के लिए ज़ब्त कर लिया है. पार्टी के दो धड़ों के बीच इसे लेकर विवाद चल रहा है.

ओ पनीरसेल्वम और वी के शशिकला के गुट के लिए इसे झटका माना जा रहा है.

पार्टी की पूर्व प्रमुख जे जयललिता की मौत के कुछ ही दिन बाद पार्टी दो धड़ों में बंट गई है. एक गुट का नेतृत्व जयललिता के विश्वस्त रहे ओ पनीरसेल्वम और दूसरे गुट का नेतृत्व जयललिता के साथ लंबे समय से रहीं शशिकला के हाथ में है.

फिलहाल शशिकला आय से अधिक संपत्ति के मामले में बेंगलुरू की जेल में सज़ा काट रही हैं.

आर के नगर विधानसभा सीट के लिए 12 अप्रैल को मतदान होने हैं तब तक इस चुनाव चिन्ह का उपयोग नहीं किया जा सकेगा.

पार्टी की पूर्व प्रमुख और राज्य की मुख्यमंत्री रही जे जयललिता की दिसंबर में हुई मौत के बाद खाली हुई आर के नगर की सीट पर चुनाव के लिए आज(गुरुवार) से नामांकन दाखिल होगा.

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चुनाव चिन्ह ज़ब्त करने का फैसला चुनाव आयोग ने बुधवार को दिन भर सुनवाई करने के बाद देर शाम लिया. दोनों पक्षों की तरफ से कई वकीलों ने लंबी जिरह की और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा जताया.

चुनाव आयोग का कहना है कि दोनों पक्षों ने चुनाव चिन्ह पर दावे के समर्थन में 20000 पन्नों का सबूत पेश किया है. आयोग का कहना है कि उसके लिए इन सबूतों को देख कर उपचुनाव से पहले फैसला दे पाना "मानवीय रूप से संभव" नहीं है.

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पार्टी के पूर्व चेयरमैन ई मधुसूदन, पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम और एस सेम्मालाई ने चुनाव आयोग में 16 मार्च को याचिका दायर कर शशिकला को पार्टी का महासचिव बनाने के फैसले को चुनौती दी थी.

उनका कहना था कि शशिकला महासचिव बनने के लिए पार्टी की पांच साल की उम्मीदवारी की शर्त को पूरा नहीं करतीं और उन्हें एआईएडीएमके पार्टी के बहुत थोड़े सदस्यों का ही समर्थन हासिल है.

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इनलोगों का दावा था कि पार्टी और कार्यकर्ताओं में व्यापक समर्थन उनके लिए है. उधर शशिकला और टीटीवी दिनाकरन ने दावा किया कि पार्टी में कोई विभाजन नहीं हुऐ है और ये केवल आंतरिक विरोध का मामला है. हालांकि चुनाव आयोग ये मानता है कि पार्टी में दो प्रतिद्वंद्वी गुट मौजूद हैं. समय की कमी के कारण चुनाव आयोग ने शशिकला को पार्टी का महासचिव बनाए जाने के मुद्दे पर चर्चा नहीं की.

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चुनाव आयोग का कहना था कि नामांकन भरना शुरू होने से ठीक पहले जल्दबाज़ी में फैसले से दोनों पार्टियों की प्रतिस्पर्धा गलत हो सकती थी या पूर्वाग्रहयुक्त फैसला दोनों में से किसी गुट के हित और अधिकारों को प्रभावित कर सकता है.

यही वजह है कि चुनाव आयोग ने दोनों में किसी भी दल को एआईएडीएमके नाम और दो पत्तियों वाला चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं दी है.

दोनें ही गुट ऐसा कोई नाम चुन सकते हैं जो उनके एआईएडीएमके से संबंध दिखाते हों. दोनों गुटों से गुरुवार को 10 बजे तक अपनी पार्टी का नाम तय करने और पसंदीदा चुनाव चिन्ह बताने को कहा गया है.

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