रोहतक की गुलाबी ऑटो वालियां...

रोहतक की महिला ऑटो ड्राइवर इमेज कॉपीरइट Aarju Siddiqui

दो साल पहले हरियाणा के रोहतक में छह महिला ऑटो ड्राइवरों के साथ शुरू हुआ गुलाबी ऑटो रिक्शा का सफर पूरी रफ़्तार से जारी है.

आम तौर पर ये रोहतक रेलवे स्टेशन से बस अड्डा, मेडिकल, आस-पास के कॉलेज और कोचिंग सेंटर्स तक चलते हैं.

यातायात में महिलाओं और कॉलेज जाने वाली लड़कियों की सुरक्षित और सहज यात्रा के लिए गुलाबी ऑटो रिक्शा की शुरुआत की गई थी.

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शुरुआती दिनों में इसमें सिर्फ महिला यात्रियों को ही सफ़र करने की इजाज़त थी.

हालांकि अब महिला चालक वाले इन ऑटो रिक्शा में पुरुष भी सफ़र कर सकते हैं.

रोहतक स्टेशन से मेडिकल तक अमूमन रोज जाने वाले एक वृद्ध यात्री बताते हैं, "गुलाबी ऑटो में सफ़र करने के कई कारण हैं. पहले तो ड्राइवर बीड़ी-सिगरेट नहीं पीते. दूसरे ये गाड़ी धीरे और तरीक़े से चलाती हैं. इनके ऑटो में चलना सुरक्षित लगता है."

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Image caption 12वीं तक पढ़ाई करने वाली रीना लगभग एक साल से गुलाबी ऑटो रिक्शा चला रही हैं

आज गुलाबी ऑटो रिक्शा की संख्या आज 40 के पार हो गई है.

रोहतक में पुरुष ऑटो ड्राइवर, महिलाओं के बनिस्बत कोई बहुत ज़्यादा नहीं है.

महिला ड्राइवर अपने साफ-सुथरे व्यवहार और सधी हुई ड्राइविंग की वजह से ये आम यात्रियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं.

12वीं तक पढ़ाई करने वाली रीना लगभग एक साल से गुलाबी ऑटो रिक्शा चला रही हैं.

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वो बताती हैं, "मैं पहले एक कंपनी में गार्ड की नौकरी करती थी, जहाँ लगभग 10 घंटे की शिफ्ट करने पर महीने में मुश्किल से छह हजार रुपये मिलते थे. इसके अलावा मैं वहाँ असुरक्षित भी महसूस करती थी. जिससे मेरे पति को भी असुविधा होती थी. जबसे गुलाबी ऑटो चला रही हूं, वो भी खुश हैं और मैं भी."

इन औरतों में कुछ 45 साल से भी ऊपर हैं तो कुछ 20 साल की नवयुवतियाँ भी हैं. लेकिन ड्राइविंग में सभी सधे और चौकस दिखे.

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इन औरतों में कई विधवाएं भी हैं तो कुछ के घर में कमाने वाली एकमात्र 'आदमी' भी वही हैं.

दिनभर में 300-400 रुपये तक कमाने वाली इन महिलाओं ने ऑटो लोन पर ले रखा है और हर महीने सात हज़ार रुपये की किश्त देती हैं.

वो कहती हैं कि सरकार अगर किश्त में थोड़ी कटौती करवा देती तो उन्हें थोड़ा सहारा मिल जाता.

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चटकीले गुलाबी रंग का साफ सुथरे ऑटो रिक्शे में गुलाबी यूनीफॉर्म में बेख़ौफ़ रिक्शा चलाती इन महिलाओं को देख कर आपके दिमाग में सहसा ये बात आती है कि क्या ये वही हरियाणा है जहाँ के घटते लिंगानुपात को लेकर चिंता जताई जाती है.

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महिला चालकों के पीछे सुकून से बैठे हरियाणवी पुरुषों को देखकर बदलाव से गुजरते हरियाणा को महसूस किया जा सकता है.

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