एंटी-रोमियो मुहिम: मोहब्बत करने कहां जाएं रोमियो-जूलियट?

उत्तर प्रदेश में सक्रिय हुए एंटी-रोमियो दल जितनी तारीफ़ बटोर रहे हैं उससे कहीं ज़्यादा आलोचना भी.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वासन दिया है कि ये दल मर्ज़ी से एक साथ घूम रहे लड़के-लड़कियों को परेशान नहीं करेगा.

पर इससे वो कितने आश्वस्त हैं जिनकी सुरक्षा के लिए ये कदम उठाया गया है, उन्हीं की राय जानने के लिए बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य पहुंचीं ग़ाज़ियाबाद.

ऐसे काम कर रहा है एंटी-रोमियो दस्ता

फ़ेसबुक लाइव देखने के लिए क्लिक करें

Image caption पूजा, गाज़ियाबाद की छात्रा

गिरफ़्तार होने का डर

आज सोचा था पार्क जाएंगे, लेकिन फिर सोचा कि कोई नियम बताकर पुलिस कहीं गिरफ्तार ना कर ले.

कॉलेज आने से पहले भी सोच रहे थे कि आना चाहिए या नहीं. कुछ पूछे बग़ैर ही मारपीट हो रही है जो सही नहीं है.

और ये लोग सोचते हैं कि लड़कियों को बहुत सुरक्षा चाहिए पर हम इतनी कमज़ोर नहीं हैं कि अपनी रक्षा खुद ना कर सकें, हमें कोई खा थोड़े ही जाएगा.

जो ग़लत कर रहा है उसे रोको ना, जो सही है उसे क्यों रोक रहे हो?

Image caption हरीश, गाज़ियाबाद का छात्र (दाएं से पहला)

'डेट' करने कहां जाएं?

इसमें क्या बुरा है कि किसी लड़की के साथ एक लड़का व़क्त बिताए. अगर मर्ज़ी से है और लड़की की उम्र 18 की है, लड़का 21 का है तो क्या ग़लत है.

ये संविधान के ख़िलाफ़ तो है नहीं, पर इस व़क्त बहुत डर है, पार्क में नहीं जा सकते, सड़क पर नहीं टहल सकते. अब कैसे गर्लफ्रेंड को डेट करें?

सिर्फ़ मॉल में सुरक्षित लगता है, पर अगर ये इतना ही ग़लत है तो सिनेमा हॉल में भी चेकिंग होनी चाहिए.

और फिर पुलिसवाले घर फ़ोन करने की धमकी देते हैं. रिश्वत दे दो तो रुक भी जाते हैं. तो ये कैसी मुहिम?

Image caption सोनिका, गाज़ियाबाद की छात्रा

घर में भी हो सकती है बदतमीज़ी

पिछले एक हफ़्ते में ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे लगे कि बदलाव आया है. नियम तो बन गया है पर उसे ठीक से लागू नहीं किया जा रहा.

ये कहा जा रहा है कि ये लड़कियों की सुरक्षा के लिए है, पर ऐसा नहीं है.

कई बार ऐसा होता है कि हमें कई जगह अकेले जाना होता है, कई काम खुद ही करने होते हैं.

ये सुरक्षा देने का रवैया तो हमें रोकेगा, फिर तो हमें घर में ही बैठना पड़ेगा. बाकि बुरा व़क्त तो घर बैठे भी आ सकता है.

Image caption कपिल, गाज़ियाबाद का छात्र (बाएं से दूसरा)

पुलिस को दी जाए ट्रेनिंग

ये बिल्कुल उल्टा हो गया है. इस मुहिम के निशाने पर मनचले थे, लेकिन इसका शिकार शादीशुदा दंपति और गर्लफ्रेंड-बॉयफ़्रेंड बन रहे हैं.

पुलिस को देखकर कार्रवाई करनी चाहिए. कभी कोई किसी इमरजेंसी में कहीं जा रहा हो सकता है पर ये रोमियो समझकर उसे परेशान करते हैं.

कॉलेज में कई दोस्त होते हैं जिनके बारे मे घरवालों को नहीं पता होता. अब अगर उनके साथ बाहर जाएं और फिर पुलिस उन्हें परेशान करे तो ये कितना ग़लत है.

पुलिस को इसके लिए ट्रेंनिंग दी जानी चाहिए और ग़ैर-सरकारी संगठनों की मदद लेनी चाहिए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे