... यूपी में और भी ग़म हैं बूचड़खानों के सिवा

  • 27 मार्च 2017
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया है कि जो बूचड़खाने ग़ैर-कानूनी हैं या फिर जिनके पास लाइसेंस नहीं है, उन्हें बंद कर दिया जाए.

लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में ऐसी बहुत सी ग़ैरकानूनी गतिविधियां हैं जिन पर सरकार को ध्यान देने की ज़रूरत है, उन पर सरकार क्यों कार्रवाई नहीं कर रही है.

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ग़ैरकानूनी बालू खनन

अमरीका के टेंपल्टन विश्वविद्यालय के अंशुल रेगे के 2015 के एक शोध के मुताबिक भारत में ग़ैरकानूनी खनन का हर महीने का कारोबार करीब 1.7 करोड़ डॉलर का है.

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वर्ष 2013 में ग्रेटर नोएडा की एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल का निलंबन बेहद चर्चा में रहा था. चर्चाएं थीं कि बालू माफ़िया के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के कारण ही उन्हें सस्पेंड किया गया. इसके बाद कई लोगों का ध्यान राज्य के ग़ैरकानूनी बालू खनन पर गया.

दिल्ली से सटे एनसीआर के अलावा लखनऊ और अन्य शहरों में भारी निर्माण के कारण बालू की खपत बढ़ी है.

यमुना और हिंडन नदियों के अलावा झांसी, हमीरपुर औऱ बांदा से होकर गुज़रने वाली बेतवा और केन नदियों से भी लगातार अवैध बालू खनन की ख़बरें आती रहती हैं, हालांकि 2015 में नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने यमुना से बालू खनन पर रोक लगा दी थी.

लखनऊ में आरटीआई कार्यकर्ता नूतन ठाकुर के मुताबिक एक ट्रक बालू की कीमत हज़ारों में होती है जिसमें से दो साल पहले तक सरकार को मात्र 1200 रुपए जाते थे.

यानी सरकार को कीमत का एक बेहद छोटा हिस्सा मिलता है.

नूतन कहती हैं कि अवैध बालू ले जा रहे ट्रक की चेकिंग नहीं होती थी उन पर वीआईपी लिखा रहता था.

नूतन बताती हैं, "हर टोल प्लाजा पर लिखा रहता था कि ट्रक किसका है और कोई उसे हाथ नहीं लगाता था. इसका हिस्सा स्थानीय नेताओं और अधिकारियों को जाता था." नूतन ठाकुर ने ये जानकारी लोकायुक्त को भेजी शिकायत में दी थी.

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ग़ैरकानूनी खनन

उत्तर प्रदेश में आरोप लगते रहे हैं कि जिस तरह अधिकारियों ने ग़ैरकानूनी बालू खनन पर आंखें बंद कर रखी हैं, ग़ैरकानूनी खनन पर भी उनका वही रवैया है.

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उत्तर प्रदेश के खनन मंत्री गायत्री प्रजापति की याद सभी को ताज़ा हैं जिन पर खनन में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जुलाई 2016 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को इस बारे में जांच करने और सरकार को छह हफ़्तों में रिपोर्ट भेजने को कहा था.

वैसे तो ग़ैरकानूनी खनन प्रदेश के कई हिस्सों में हो रहा है, सोनभद्र और बुंदेलखंड सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाके हैं. आरटीआई एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर के मुताबिक ठेकेदारों को जो पट्टे खुदाई के लिए दिए जाते थे वो उससे ज़्यादा के इलाके पर खुदाई करते थे.

एक ट्रक मोरम 30 हज़ार से 40 हज़ार के बीच में आता था जिसमें से 1000 रुपए से 1200 रुपए सरकारी खाते में जाते थे और बचा पैसा निजी जेबों में जाता था.

यानी जिस दाम पर मोरम बिकती है, सरकार को उस दाम का मात्र एक छोटा सा अंश जाता है. और हम यहां बात वैध रूप से बेचे जा रहे मोरम की कर कर रहे हैं.

खानों से कितना खनन अवैध होता है, इसका कोई हिसाब नहीं है.

भारत भर में बग़ैर इजाज़त रेत खनन पर रोक

नूतन बताती हैं कि ठेकेदारों कि जितना पट्टा दिया जाता है, वो उससे ज़्यादा ज़मीन पर खनन करते हैं और इसके लिए कोई सरकारी इजाज़त भी नहीं ली जाती.

अवैध शराब

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समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार भारत में हर साल दो अरब लीटर देसी शराब पी जाती है और इसमें से एक बड़ी मात्रा अवैध रुप से बनाई गई शराब की होती है. उत्तर प्रदेश में अवैध शराब पीकर मरने वालों से जुड़ी ख़बरें आती रहती है. उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले भी पुलिस ने कई सौ कार्टन अवैध शराब ज़ब्त की थी.

शराब व्यापारी पॉन्टी चड्ढा जिस तेज़ी से उत्तर प्रदेश में बुलंदियां चढ़े और राजनेताओं से उनकी नज़दीकी रही, उसने राज्य में शराब के कारोबार पर कई सवाल खड़े किए. नए मुख्यमंत्री इस बारे में क्या कर पाते हैं, ये देखना दिलचस्प होगा.

अवैध ट्रांसपोर्ट

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उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में जिस तरह से अवैध ऑटो चलते हैं, उनसे वसूली की जाती है, ये एक बड़ा व्यापार है. इस तरीके से इकट्ठा किया गया पैसा कई लोगों की जेबों में जाता है. जिन ऑटो, टैक्सियों के पास लाइसेंस नहीं होता, वो चलती हैं. उन्हें चलाने के लिए दिए गए पैसे कहां जाते हैं, ये जानने में ज़्यादा वक्त नहीं लगेगा.

ज़मीन हड़पना

उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने से पहले भाजपा नेताओं ने दावा किया था कि पार्टी राज्य में ज़मीन हड़पने की घटनाओं पर रोक लगाएगी. कुछ वक्त पहले मथुरा में पुलिस और कथित तौर पर ज़मीन पर कब्ज़ा कर बैठे कुछ लोगों के बीच गोलीबारी हुई थी जिसमें कई लोग मारे गए थे. मथुरा में कई एकड़ में फैले इस पार्क पर कथित तौर पर करीब 4000 लोगों ने कब्ज़ा किया हुआ था और अधिकारियों के बार-बार कहने के बाद भी उन्होंने ये ज़मीन नहीं छोड़ी.

माना जाता है कि कब्ज़ा किए लोग राजनेताओं के संपर्क में थे. योगी आदित्यनाथ के लिए चुनौती होगी कि वो कैसे भूमाफ़िया से उत्तर प्रदेश के मुक्ति दिलाएं.

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