ग्रेटर नोएडा: अफ्रीकी छात्र दहशत में, स्थानीय लोग ग़ुस्से में

  • 28 मार्च 2017
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ग्रेटर नोएडा में कुछ अफ्रीकी छात्रों की कथित पिटाई के मामले में पांच लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और कई अन्य की पुलिस तलाश कर रही है.

इलाक़े में जहां अफ्रीकी छात्रों में दहशत है, वहीं स्थानीय लोग पुलिस और प्रशासन पर अफ्रीकी छात्रों की तरफ़दारी करने और स्थानीय लोगों के उत्पीड़न का आरोप लगा रहे हैं.

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तीन दिन पहले मनीष खारी नाम के बारहवीं कक्षा के एक छात्र की मौत और उसके बाद कुछ अफ्रीकी छात्रों की पिटाई के बाद स्थानीय लोगों और अफ्रीकी छात्रों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.

यहां के तमाम कॉलेजों में पढ़ने वाले नाइजीरियाई छात्र यूं तो अक़्सर घूमते-टहलते मिल जाते हैं लेकिन मंगलवार को ढूंढ़ने पर भी नहीं मिल रहे थे.

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बताया गया कि सोमवार को कुछ नाइजीरियाई छात्रों को कथित तौर पर पीटने की घटना के बाद से ये लोग दहशत में हैं.

शारदा विश्वविद्यालय के एक छात्र अली अब्दुल्लाही से हमारी मुलाक़ात विश्वविद्यालय कैंपस में हुई.

उनका कहना था, "हम लोग यहां काफी डरे हुए हैं. हम लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं. यहां तक कि ज़रूरी सामान ख़रीदने के लिए भी हम नहीं जा रहे हैं. डर है कि कहीं काला व्यक्ति समझ कर लोग पीट न दें."

छात्र की मौत के मामले में परिवार वालों ने पांच नाइजीरियाई छात्रों पर संदेह जताया था और उनके ख़िलाफ़ रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

उसकी मौत के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने सोमवार को कैंडल मार्च निकाला था लेकिन उसी दौरान शहर के एक मॉल में कुछ अफ्रीकी छात्रों पर स्थानीय लोगों ने हमला बोल दिया जिसमें कई छात्रों को चोटें आईं.

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Image caption मनीष खारी नाम के एक छात्र की मौत के बाद स्थानीय नागरिकों और अफ़्रीकी छात्रों के बीच तनाव पैदा हो गया

घटना के बाद से इलाक़े में काफी तनाव है. गौतमबुद्ध नगर ज़िले की एसपी सिटी सुजाता सिंह ने बताया कि पांच लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और कई अन्य की तलाश जारी है.

सुजाता सिंह का कहना था, "हमने नाइजीरियाई दूतावास के दो सदस्यों, अफ्रीकी छात्रों और स्थानीय लोगों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की है. दोनों पक्षों की शिकायतों को सुना गया है और कोशिश की जा रही है कि शांति और सौहार्द क़ायम किया जा सके."

नाइजीरियाई छात्रों से बातचीत के बाद उनकी शिकायत थी कि यहां के लोग उनके साथ सही बर्ताव नहीं करते तो दूसरी ओर स्थानीय लोग इन छात्रों से काफी ख़फ़ा दिखे.

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ग्रेटर नोएडा में ही रहने वाले एक टैक्सी ड्राइवर दयाल का कहना था, "हम लोग डर के मारे इन्हें अपनी गाड़ी में नहीं बैठाते. एक तो सही क़िराया नहीं देते दूसरे विरोध करने पर मारने-पीटने लगते हैं."

स्थानीय लोगों की शिकायत है कि पुलिस में शिकायत करने पर इन्हीं लोगों की सुनी जाती है, हमारी नहीं. कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि इलाक़े में कुत्ते नहीं बचे हैं और ये लोग सभी जानवरों को मारकर खा जाते हैं और आस-पास के लोगों को परेशानी होती है.

यही नहीं, मृत छात्र के परिजनों का भी आरोप है कि पुलिस दबाव में आकर उनकी एफआईआर पर कार्रवाई नहीं कर रही है जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को जबरन गिरफ़्तार किया जा रहा है.

बहरहाल, मामला शांतिपूर्ण भले ही दिख रहा है लेकिन दहशत में अफ्रीकी छात्र भी दिखे और मृत छात्र के परिजन भी.

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