सरहद पर बार बार क्यों फट जाता है सबसे ऊंचा तिरंगा?

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पिछले तीन दिनों से भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा अटारी पर 350 फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज फहराने में नाकामी के कारण अधिकारियों पर उंगली उठने लगी है. कहा जा रहा है कि अधिकारियों ने झंडा स्थापित करने से पहले तकनीकी चीज़ों का ख़याल नहीं रखा.

ख़बरों के मुताबिक़ 350 फुट के ध्वज स्तंभ में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा पिछले कई दिनों से नहीं लहरा रहा है. इन सब के बीच अमृतसर इम्प्रोवमेंट ट्रस्ट (एआईटी) ने सरकार से आग्रह किया है कि इस मामले में वह जांच शुरू करे.

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Image caption बिना झंडे का स्तंभ

इस ध्वज को स्थापित किए एक महीने से भी कम वक़्त हुआ है. 1.25 लाख के इस झंडे को तीन बार बदला जा चुका है.

तेज हवा के कारण यह झंडा बार-बार फट जाता है. कई कारणों से इसे चौथी बार नहीं बदला गया है.

एआईटी के चेयरमैन सुरेश महाजन ने बीबीसी से कहा कि इस प्रोजेक्ट को बिना तकनीकी पहलू को ध्यान में रखे शुरू कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि इसमें जल्दीबाजी की गई. महाजन ने इसे जुर्म करार दिया है.

उन्होंने कहा, ''राष्ट्रीय ध्वज हमारा गर्व है. मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इस मामले में जांच बैठाई जाए और जो भी ज़िम्मेदार है उसे सज़ा दी जाए.''

महाजन ने बताया कि अब तक तीन झंडे बदले जा चुके हैं और तीन अभी बचे हैं. अब इस पर बात चल रही है कि झंडे की गुणवत्ता को सुधारा जाए या तकनीकी सलाह ली जाए कि तेज हवा में भी झंठा नहीं फटे.

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सामाजिक कार्यकर्ता मनदीप सिंह माना ने आरोप लगाया कि सरहद पर सबसे ऊंचा ध्वज स्थापित करने वाले प्रोजेक्ट में वित्तीय गड़बड़ी संभव है.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हमारा गर्व है और इसे किसी को चोट पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. मनदीप ने इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

एक महीने से भी कम वक़्त हुए हैं जब दावा किया जा रहा था कि सरहद पर सबसे ऊंचा झंडा लहराया गया है.

फिलहाल सीमा के पास तिरंगा नहीं लगा है और लोगों में इससे निराशा है.

अटारी सीमा पर एक दुकान चलाने वाले गुरप्रीत सिंह सोनी ने कहा, ''यह दुखद है कि पिछले 10 दिनों से झंडा नहीं बदला गया. यहां आने वाले लोग इस झंडे को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं.''

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