'लोग समझते हैं हम नरभक्षी हैं'

  • 29 मार्च 2017
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हमले का शिकार हुए भारत में रह रहे अफ़्रीकी छात्र

उत्तर प्रदेश से सटे ग्रेटर नोएडा में अफ़्रीकी मूल के छात्रों पर हुए हमलों से इन छात्रों में न सिर्फ डर है बल्कि कुछ वापस जाने को तैयार है.

इन छात्रों के साथ मारपीट के बाद प्रशासन ने कई स्थानीय लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है और पांच को हिरासत में भी लिया है.

लेकिन इलाके के तमाम कॉलेजों में पड़ने वाले छात्रों को अपनी सुरक्षा की चिंता है और उनमे से ज़्यादातर पिछले तीन दिनों से घरों/ हॉस्टलों से बाहर निकलने में डर रहे हैं.

रेडियोग्राफी पढ़ने वाली छात्रा इसाबेला ने बताया कि, "कुछ लोगों की धारणा है कि अफ़्रीकी छात्र नरभक्षी होते है और हमें संदेह से ही देखा जाता है".

जबकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पढ़ने वाले नजीब को लगता है कि, "बंगलौर के बाद इस तरह की घटनाओं से कई छात्रों को पढाई बीच में त्याग, घर वापस लौटने का मन बना लिया है".

मामला तब शुरू हुआ जब तीन दिन पहले मनीष खारी नामक बारहवीं कक्षा के एक छात्र की मौत हुई.

पड़ोस में रहने वाले कुछ नाइजीरियाई छात्रों को पुलिस पूछताछ के लिए ले गई और छात्र के वापस घर के पास मिलने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया.

लेकिन कुछ घंटों बाद ही इस छात्र ने अस्पताल में दम तोड़ दिया और उसके बाद आरोप फिर से नाइजीरियाई छात्रों पर लगे.

स्थिति तनावपूर्ण तब से हुई जब से कुछ अफ़्रीकी छात्रों की एक मॉल में कथित पिटाई के बाद तनाव बढ़ गया.

विदेश मंत्रालय और उत्तर प्रदेश प्रशासन ने मामले पर आश्वासन भी दिए.

हालांकि इलाके में स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन पर अफ़्रीकी छात्रों की तरफ़दारी करने के भी आरोप लगाए हैं.

इधर नाइजीरिया के कुछ छात्र मामले पर कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की मांग कर रहे हैं और हिंसा की निंदा कर रहे हैं.

इसाबेला ने कहा, "हमारे साथ भेदभाव इसलिए होता है क्योंकि हम काले हैं. महँगी सब्ज़ी खरीदने से लेकर महंगे किराए के कमरे लेने तक हम इसी बात का ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं. ये सही नहीं है".

इस मामले में एक मौत का सवाल जुड़ा है जिसकी जांच जारी है, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब भारत में अफ़्रीकी छात्रों के साथ मारपीट हुई है.

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