बूचड़खानों पर नहीं,'किस्मत' पर लटक गए ताले!

  • 29 मार्च 2017
इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash

कुरैशी मोहल्ले की सुलेमा खातून की चार बेटियां हैं. इनका निकाह करना है. वे बीमार रहती हैं, सो दवा का खर्च भी उठाना पड़ता है.

बेटा बूचड़खाने में काम करता था. तो कुछ पैसों की कमाई हो जाती थी. दाल-रोटी का जुगाड़ भी.

कल से वह बूचड़खाना बंद है. सो, घर में एक भी रुपया नहीं आया. उन्हें इस बात की चिंता है कि अगर यही हालत रही, तो कुछ दिनों बाद खाने के लाले पड़ जाएंगे.

ऐसा झारखंड सरकार के उस आदेश के कारण हुआ है, जिसमें राज्य भर के अवैध बूचड़खानों को 72 घंटे के अंदर बंद किए जाने की बात कही गई है. गुरुवार की शाम यह मियाद भी खत्म हो जाएगी.

'यूपी में मीटबंदी, बंगाल में होम डिलीवरी'

जयपुर में भी बंद होंगे अवैध बूचड़खाने

क्या करेंगे हमलोग?

इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash

सुलेमा खातून ने बीबीसी से कहा, "क्या करेंगे बाबू. पइसा नहीं था, तो बच्चों को पढ़ा-लिखा नहीं सके. कोई बिजनेस भी नहीं है. कोई और काम नहीं आता. हमारी तो किस्मत पर ताला लग गया है. अब क्या करें? क्या खाएं?"

उनकी पड़ोसी रमीला खातून के शौहर का कुछ साल पहले इंतकाल हुआ. बड़ा बेटा 12 साल का था. तभी से बूचड़खाने में काम पर लग गया.

उसी की कमाई से घऱ का खर्च चलता था. उन्होंने बीबीसी से कहा, "हम लोग भूख और दुख से परेशान हैं. मुसीबत काट रहे हैं. घर में आटा बचा था, तो आज खाना बन गया. कल कैसे खाएंगे, इसका पता नहीं."

उनका बेटा बूचड़खाने के लिए ठेला चलाता था. जानवरों को ढोने के एवज में वह रोज 50-100 रुपये कमा लेता था. वह कल से घर में बैठा है. कुछ पूछिए, तो बताता कम, रोता ज्यादा है.

'भाजपा शासित राज्यों में बंद हो बीफ़ का कारोबार'

यूपी के मांस व्यापारी हड़ताल पर

इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash
Image caption अपने बेटे के साथ रमीला खातून

हजारों लोगों पर असर

मांस के व्यापारी तबरेज कुरैशी ने बताया कि सरकार के इस आदेश के कारण हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है.

उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे झारखंड में सालों से हमारे लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया गया है. सरकार स्वयं इसको टालती रही है. ऐसे में रांची के सभी बूचड़खाने अवैध हो गए हैं. पूरे राज्य में भी वैध बूचड़खानों की संख्या नाममात्र की ही होगी.

तबरेज कुरैशी ने बीबीसी से कहा, "सरकार का यह निर्णय समझ में नहीं आ रहा. हमे अपने लाइसेंस के नवीनीकरण या फिर फ्रेश आवेदन के लिए कमसे कम दो महीने का समय देना चाहिए था. ताकि, हमारा रोजगार प्रभावित नहीं होता."

वो कहते हैं, "72 घंटे के अंदर दुकानों को बंद करने का आदेश देना मुनासिब नहीं है. उसमें भी तब जब 12 घंटे रात होने के कारण बीत गए और 30 मार्च को सरहुल की छुट्टी है. मतलब, हमें कुछ भी सोचने या करने के लिए वास्तविक तौर पर सिर्फ 36 घंटे ही मिले."

गाय को लेकर किया वादा पूरा करेंगे: सैनी

सोशलः 'तुम मुझे शराब दो, मैं तुम्हें कबाब दूंगा'

इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash

छुट्टी के कारण समय सीमा में रियायत नहीं

इधर झारखंड के गृह सचिव एस के जी रहाटे ने बीबीसी से कहा, "हमसे किसी अफसर ने सरहुल की छुट्टी के कारण समय सीमा में छूट देने की क्वैरी नहीं की है. लिहाजा, उन 72 घंटों की गिनती आदेश निकलने के तुरंत बाद से ही की जाएगी.

यह पूछने पर कि राज्य में कितने बूड़खाने वैध हैं, तो उन्होंने बताया कि उनके पास इसका कोई डेटा नहीं है.

गृह सचिव ने कहा कि यह डेटा नगर विकास विभाग दे सकता है. क्योंकि, लाइलेंस जारी करने का अधिकार उनके पास है.

कहीं बीफ़ पर पाबंदी है, कहीं लोग ख़ुद छोड़ रहे हैं..

'अपवित्र' मांस-व्यापार के ख़िलाफ़ 'पवित्र अभियान'

इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash

इस बीच सरकार ने बुधवार के अखबारों में मुख्यमंत्री रघुवर दास की तस्वीर के साथ एक इस संबंधित विज्ञापन प्रकाशित कराया है.

इस विज्ञापन को पढ़ने के बाद भी यह रहस्य बरकरार रहता है कि झारखंड में कितने बूचड़खाने वैध या अवैध हैं.

क्या कहते हैं बूचड़खानों के हिंदू मालिक?

'हिंदू-मुसलमान दोनों का जाएगा रोज़गार'

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे