ग्रेटर नोएडा: मनीष खारी के वो 'आख़िरी पल'

  • 30 मार्च 2017

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक स्थानीय स्कूल छात्र की मौत और उसके बाद अफ़्रीकी मूल के लोगों पर हुए हमले से जुड़ा मामला गहराता जा रहा है.

कुछ नाइजीरियाई छात्रों के साथ खुलेआम हुई मारपीट और उसके बाद की गिरफ़्तारियों के बाद अब मृत छात्र मनीष खारी के परिवार ने बीबीसी से हुई बातचीत में अपना पक्ष रखा है.

25 मार्च को 'नशे' में पेट की दर्द की शिकायत करने वाले मनीष खारी को बी-16, एनएसजी सोसायटी से अस्पताल तक ले जाने का दावा उनके बुआ के लड़के उधम सिंह ने किया है.

उधम सिंह के मुताबिक़, "मनीष अपने भाई के साथ रात का खाना खाकर बाहर टहलने निकला था, छोटे भाई ने कहा मैं भीतर से पापा को बुलाकर लाता हूँ. उसके पिता यानी मेरे मामा ने आने पर देखा बाहर दो बड़ी गाड़ियां खडी थी जो हमारे पड़ोस के घर बी-14 में रहने वाले नाइजीरियाई छात्रों के यहाँ अक्सर आती थी".

उधम सिंह ने कहा, "मेरे मामा ने देखा कि मनीष को उनमें से एक गाड़ी में बैठाया गया. इसके बाद मामाजी ने 100 पर पुलिस को कॉल किया. पुलिस आई, पड़ोस के घर की और कुछ दूसरी सोसायटियों में रहने वाले नाइजीरियाई छात्रों के घर भी तलाशी ली गई लेकिन मनीष कहीं नहीं मिला."

मनीष खारी के पड़ोसी नाइजीरियाई छात्रों ने अपनी शिकायत में कहा है कि उन्हें 'बिना किसी सबूत के, लेकिन मनीष के घरवालों की शिकायत के बाद, पुलिस थाने में रात भर रखा गया और अगले दिन सुबह तब छोड़ा गया जब मनीष अपने घर के पास मिला'.

ग्रेटर नोएडा के एक महंगे निजी स्कूल में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा देने वाले मनीष जब अपने घरवालों को अगले दिन मिले, तो होश में नहीं थे.

मनीष के फुफेरे भाई उधम के मुताबिक, "अपने घर से थोड़ी दूर की झाड़ियों से सुबह मनीष नशे की हालात में कुछ लोगों को मिला जो उसे घर लाए. उसका बयान दर्ज करवाने के लिए मैं उसे गाड़ी में थाने ले जा रहा था कि बोला पेट में दर्द हो रहा है. मैंने गाड़ी रोकी तो उसने उल्टियां करनी शुरू कर दी और मैंने गाड़ी अस्पताल की तरफ मोड़ दी."

Image caption अफ़्रीकी मूल के तमाम छात्रों में भय का माहौल है

नोएडा पुलिस के मुताबिक़ मनीष की मौत 25 मार्च की शाम अस्पताल में हुई.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई शुरूआती जांच में मौत के कारणों का पता नहीं चल सका है और जांच जारी है.

इस बीच ग्रेटर नोएड़ा में रहने वाले अफ़्रीकी मूल के तमाम छात्रों में भय का माहौल है और ज़्यादातर अपने घरों/हास्टलों से बाहर नहीं निकल रहे हैं.

नाइजीरियाई छात्र एसोसिएशन के सदस्य नजीब ने कहा, "हम खुद चाहते हैं कि मामले की जांच हो और न्यायिक प्रक्रिया से दोषियों को सजा मिले. लेकिन जिनका घटना से कोई लेना देना नहीं है, उनके साथ मारपीट क्यों हो. रहा सवाल मनीष के उन पांच पड़ोसियों का जिन पर मनीष के घरवालों ने हत्या यानी सेक्शन 302 का आरोप लगाया है, वे लगातार कह रहे हैं कि उनका मामले से कोई लेना देना है ही नहीं."

इस बीच मनीष के रिश्तेदार और परिवार वाले इस बात का विरोध कर रहे हैं कि नाइजीरियाई छात्रों के साथ हुई सार्वजनिक मारपीट के लिए "उनके परिवार और दोस्तों को निशाना बनाया जा रहा है.''

मैंने मनीष के भाई उधम सिंह से पूछा कि क्या एक घटना के लिए सभी अफ्रीकी मूल के लोगों को ज़िम्मेदार ठहराना ठीक है? उनका जवाब था, "आप इलाके में जाकर पता कीजिए, इनके साथ कोई भेदभाव नहीं होता. हम लोग मानते हैं सभी दोषी भी नहीं है लेकिन जो हैं उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए."

जबकि इलाके में रहने वाले तमाम नाइजीरियाई छात्रों का दावा है कि वे लगातार भेद-भाव का शिकार होते रहते हैं.

एक तरफ जहाँ मामले में भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी दखल दिया है, वहीं दूसरी तरफ नाइजीरियाई सरकार ने भी घटना पर चिंता जताई है.

इधर ग्रेटर नोएडा में तनाव भी जस का तस बना ही हुआ है.

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