भारत: क़ानूनन कहां-कहां हो सकती है गो हत्या?

  • 31 मार्च 2017
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अब गुजरात में गो हत्या करने वालों को उम्र क़ैद की सज़ा हो सकती है.

राज्य विधानसभा ने गुजरात पशु संरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2011 शुक्रवार को पारित कर दिया.

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इस अधिनियम के क़ानून बन जाने पर किसी भी आदमी को बीफ़ ले जाने पर भी उम्र क़ैद की सज़ा हो सकती है.

इसके अलावा बीफ़ लाने- ले जाने और गाय काटने पर एक लाख रुपए से पांच लाख रुपए तक का ज़ुर्माना भी लग सकता है.

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इसके पहले साल 2011 में क़ानून बना कर गाय लाने-ले जाने, काटने और बीफ़ बेचने पर रोक लगा दी गई थी. उस समय राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे.

नया संशोधन अधिनियम शनिवार को ही लागू हो जाएगा.

भारतीय संस्कृति

गुजरात के गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा, "गो माता भारतीय संस्कृति की प्रतीक है. राज्य के लोगों से सलाह मशविरा कर ही ये बदलाव किए गए हैं."

मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने कहा कि क़ानून में संशोधन गो हत्या से जुड़े लोगों से 'सख्ती' से निपटने के लिए किया गया है.

नए संशोधनों के तहत इससे जुड़े सभी अपराध अब ग़ैर ज़मानती हो गए.

इसके साथ ही सरकार उन गाड़ियों को भी ज़ब्त कर लेगी, जिनमें बीफ़ ले जाया जाएगा.

कोई प्रतिबंध नहीं

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भारत के 29 में से 11 राज्य ऐसे हैं जहां गाय, बछड़ा, बैल, सांड और भैंस को काटने और उनका गोश्त खाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, बाक़ी 18 राज्यों में गो-हत्या पर पूरी या आंशिक रोक है.

भारत की 80 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी हिंदू है जिनमें ज़्यादातर लोग गाय को पूजते हैं. लेकिन ये भी सच है कि दुनियाभर में 'बीफ़' का सबसे ज़्यादा निर्यात करनेवाले देशों में से एक भारत है.

दरअसल 'बीफ़', बकरे, मुर्ग़े और मछली के गोश्त से सस्ता होता है. इसी वजह से ये ग़रीब तबक़ों में रोज़ के भोजन का हिस्सा है, ख़ास तौर पर कई मुस्लिम, ईसाई, दलित और आदिवासी जनजातियों के बीच.

गो-हत्या पर कोई केंद्रीय क़ानून नहीं है पर अलग राज्यों में अलग-अलग स्तर की रोक दशकों से लागू है. तो सबसे पहले ये जान लें कि देश के किन हिस्सों में 'बीफ़' परोसा जा सकता है.

पूरा प्रतिबंध

गो-हत्या पर पूरे प्रतिबंध के मायने हैं कि गाय, बछड़ा, बैल और सांड की हत्या पर रोक.

ये रोक 11 राज्यों - भारत प्रशासित कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महराष्ट्र, छत्तीसगढ़, और दो केन्द्र प्रशासित राज्यों - दिल्ली, चंडीगढ़ में लागू है.

गो-हत्या क़ानून के उल्लंघन पर सबसे कड़ी सज़ा भी इन्हीं राज्यों में तय की गई है. हरियाणा में सबसे ज़्यादा एक लाख रुपए का जुर्माना और 10 साल की जेल की सज़ा का प्रावधान है.

वहीं महाराष्ट्र में गो-हत्या पर 10,000 रुपए का जुर्माना और पांच साल की जेल की सज़ा है.

हालांकि छत्तीसगढ़ के अलावा इन सभी राज्यों में भैंस के काटे जाने पर कोई रोक नहीं है.

आंशिक प्रतिबंध

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गो-हत्या पर पूरे प्रतिबंध के मायने हैं कि गाय और बछड़े की हत्या पर पूरा प्रतिबंध लेकिन बैल, सांड और भैंस को काटने और खाने की इजाज़त है.

इसके लिए ज़रूरी है कि पशु को 'फ़िट फ़ॉर स्लॉटर सर्टिफ़िकेट' मिला हो. सर्टिफ़िकेट पशु की उम्र, काम करने की क्षमता और बच्चे पैदा करने की क्षमता देखकर दिया जाता है.

इन सभी राज्यों में सज़ा और जुर्माने पर रुख़ भी कुछ नरम है. जेल की सज़ा छह महीने से दो साल के बीच है जबकि जुर्माने की अधितकम रक़म सिर्फ़ 1,000 रुपए है.

आंशिक प्रतिबंध आठ राज्यों - बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा और चार केंद्र शासित राज्यों - दमन और दीव, दादर और नागर हवेली, पांडिचेरी, अंडमान ओर निकोबार द्वीप समूह में लागू है.

कोई प्रतिबंध नहीं

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दस राज्यों - केरल, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और एक केंद्र शासित राज्य लक्षद्वीप में गो-हत्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है.

यहां गाय, बछड़ा, बैल, सांड और भैंस का मांस खुले तौर पर बाज़ार में बिकता है और खाया जाता है.

आठ राज्यों और लक्षद्वीप में तो गो-हत्या पर किसी तरह को कोई क़ानून ही नहीं है.

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असम और पश्चिम बंगाल में जो क़ानून है उसके तहत उन्हीं पशुओं को काटा जा सकता है जिन्हें 'फ़िट फॉर स्लॉटर सर्टिफ़िकेट' मिला हो.

ये उन्हीं पशुओं को दिया जा सकता है जिनकी उम्र 14 साल से ज़्यादा हो, या जो प्रजनन या काम करने के क़ाबिल ना रहे हों.

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक़ इनमें से कई राज्यों में आदिवासी जनजातियों की तादाद 80 प्रतिशत से भी ज़्यादा है. इनमें से कई प्रदेशों में ईसाई धर्म मानने वालों की संख्या भी अधिक है.

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