पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं यूनिटेक के संजय चंद्रा

संजय चंद्रा इमेज कॉपीरइट Unitech Group

रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक के महाप्रबंधक संजय चंद्रा और उनके भाई अजय चंद्रा को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस के इकनॉमिक ऑफेंस विंग ने गिरफ़्तार कर लिया.

चंद्रा पर फ्लैट ख़रीदारों के साथ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है.

यूनिटेक गुड़गांव के सेक्टर 70 में अपना प्रोजेक्ट पूरा करने में नाकाम रहा और उसने ग्राहकों के पैसे भी नहीं वापस किए. पुलिस के मुताबिक़ चंद्रा ने फ्लैट ख़रीदारों के पैसे दूसरी कंपनी में निवेश में कर दिए थे.

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मधुर वर्मा ने कहा, ''इकनॉमिक ऑफेंस विंग की एक टीम शुक्रवार रात गुरुग्राम पहुंच गई थी. रात में ही संजय चंद्रा और अजय चंद्रा की घर पर छापेमारी की गई. पुलिस ने करीब 35 करोड़ की मनी लॉन्डरिंग मामले में इन्हें गिरफ़्तार किया है.''

इमेज कॉपीरइट Unitech Group
Image caption संजय चंद्रा के पिता रमेश चंद्रा

वर्मा ने कहा कि चंद्रा भाइयों के ख़िलाफ़ गुरुग्राम प्रोजेक्ट को लेकर 91 शिकायतें की गई थीं. चंद्रा को 2011 में भी टूजी स्पेक्ट्रम में गिरफ़्तार किया गया था.

नवंबर 2011 में ज़मानत पर रिहा होने से पहले वह 8 महीने जेल में रहे थे. चंद्रा पर ग्रेटर नोयडा में भी फ्लैट ख़रीदारों को साथ ग्राहकों के साथ ठगी करने का आरोप है. ग्राहकों को कहना है कि यूनिटेक ने न तो अब तक फ्लैट दिया और न ही पैसे वापस किया.

12 जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक को दो करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा था. सुप्रीम कोर्ट में 39 ग्राहकों ने अपने पैसे की वापसी याचिका दर्ज कराई थी.

कोर्ट ने 20 फ़रवरी 2017 को यूनिटेक को निर्देश दिया था कि वह 39 फ्लैट ख़रीदारों को 14 फ़ीसदी ब्याज के साथ पैसे वापस करे.

संजय चंद्रा ने रियल एस्टेट में आई अस्थिरता को देखते हुए ही यूनिटेक की एंट्री टेलिकॉम बिज़नेस में कराई थी. हालांकि चंद्रा का यह क़दम रंग नहीं लाया और उन पर भारी पड़ा. यूनिनॉर के कारण ही संजय चंद्रा का नाम टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में आया.

इमेज कॉपीरइट unitechgroup
Image caption संजय चंद्रा के भाई अजय चंद्रा

संजय 2001 में अमरीका से बिज़नेस मैनेजमेंट की डिग्री लेकर लौटे थे. उनके पास कपड़े का फर्म चलाने का भी अनुभव था. यूनिटेक पहले से ही एक स्थापित कंपनी थी. संजय के पिता आईआईटी खड़गपुर से सिविल इंजीनियर हैं.

उन्होंने ही इस फर्म की नींव रखी थी. संजय के पिता ने यूनिटेक को भारत की दूसरी सबसे बड़ी लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनी बना दिया था.

जैसे ही यूनिटेक ने नई राह अपनाई वैसे ही सारी मुश्किलें खड़ी हो गईं. यूनिटेक के टेलिकॉम बिज़नेस में आने के बाद से सारी समस्या शुरू हुई. टूजी स्पेक्ट्रम की जांच में कहा गया है कि संजय अवैध समझौतों में शामिल थे.

सीबीआई ने संजय पर जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला तय किया था. दावा किया गया का टूजी के लिए जब लंबी लाइन लगी थी उसमें संजय को जानबूझकर प्राथमिकता दी गई.

जांच एजेंसियों का कहना है कि संजय की कंपनी ने अवैध तरीके से टूजी स्पेक्ट्रम का लाइसेंस हासिल किया था. सीबीआई जांच कर रही है कि अगर टाटाग्रुप की यूनिट टाटा रिएल्टी एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर से यूनिटेक को 2007 में अडवांस में 1,700 करोड़ मिला और इस कैश का इस्तेमाल भारत भर में मोबाइल परमिट के लिए इस्तेमाल किया गया.

कहा जाता है कि संजय ने टेलिकॉम बिज़नेस में जो किया वह उनकी हैसियत से बाहर का था. संजय की ज़्यादा चाहत ही उन पर भारी पड़ी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे