मिर्ची पाउडर साथ लेकर चलेंगी मुंबई की ऑटोवालियां!

  • 3 अप्रैल 2017
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Image caption मुंबई में ऑटो चलाने के लिए लर्निंग लाइसेंस हासिल करने वाली प्रमिला चव्हाण

"मेरी हमेशा से इच्छा थी कि मेरा अपना एक वाहन हो और सभी कहें ये चव्हाण भाभी की गाड़ी है. जैसी ही मेरे घर के सामने रिक्शा आती है तो सभी लोग मुड़ कर देखते हैं और घर आ कर पूछते हैं कि भाभी ये आपकी गाड़ी है क्या?"

ये हैं प्रमिला चव्हाण जिन्हें हाल ही में मुंबई के रोड ट्रांस्पोर्ट ऑफ़िस से ऑटोरिक्शा चलाने का लर्निंग लाइसेंस मिला है.

एक और ऑटोवाली 26 साल की सुप्रिया गायकवाड़ का कहना है, "मैं अपने 8 साल के बेटे और ढाई साल की बेटी, अपनी सास और अपने पति को रिक्शा में बैठा कर घुमाने ले कर जाती हूं. बेटी को रिक्शा का रंग बहुत पसंद है."

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वो बताती हैं, "मेरे मायके में मेरे सभी भाई चार पहिया वाहन चलाते हैं और अब तो मैं भी ड्राइवर बन गई, तीन पहिया वाहन की."

425 महिलाओं को मिला मौका

हाल ही में महाराष्ट्र राज्य के वाहन विभाग ने महिला ऑटो ड्रायवर्स को 5% का आरक्षण दिया है.

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इस बात की पुष्टि करते हुए राज्य के परिवहन मंत्री दिवाकर राऊत कहते हैं, "जब हमारे देश में महिलाएं ट्रक चला सकती हैं या हवाई जहाज़ और हेलीकॉप्टर उड़ा सकती हैं, सेना में जा कर दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकती हैं, तो रिक्शा क्यों ना चलाएं? बस यही सोच कर हमने इन महिला ऑटो ड्राइवर्स को 5% आरक्षण दिया है. हमें भी इसका इंतज़ार है कि जनता इस कदम को कैसे लेगी."

ये कदम ना सिर्फ़ नई पहल के तौर पर लिया गया है बल्कि सरकार ने राज्य में महिलाओं को सक्षम और सशक्त बनाने के लिए भी ये शुरु किया गया है. पूरे राज्य की बात करें तो करीब 425 महिलाओं को ऑटोरिक्शा चलाने के लिए तैयार किया जा रहा है.

सबको मिली है ट्रेनिंग

मुंबई से सटे इलाके ठाणे और नवी मुंबई सूखा पीड़ित इलाके मराठवाड़ा में भी ये ऑटोवालियां काम करेंगी.

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पहले महिलाओं की अर्ज़ी मंगाई गई और फिर उनमें से चुन कर कुछ महिलाओँ को ऑटो चलाने की ट्रेनिंग दी गई.

ऐसी ही ट्रेनिंग पाने वाली दीपा गोंधले बताती हैं, "हमें अपनी सुरक्षा की भी ट्रेनिंग मिली है. हम मिर्ची पाउडर और स्प्रे साथ में रखती हैं ताकि किसी आपातकाल में हम स्प्रे करें और नज़दीकी पुलिस थाने तक पहुच सकें."

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Image caption दीपा गोंधले के मुताबिक वो सुरक्षा का इंतेज़ाम भी साथ में रखती हैं.

एक और ऑटोवाली स्नेहा कदम का कहना है, "मैं अपनी सहेलियों से कहती थी कि खाली समय में क्यों आस पास की बातें करते हो, रिक्शा चलाओ कुछ पैसे आ जाएँगे घर में."

वे आगे कहती हैं, "मेरी 70 साल की बूढ़ी मां को कई बार दूसरे रिक्शावाले अपनी गाड़ी में बैठाने से मना कर देते थे और युवा लड़कियों को बैठा लेते थे. मैं तो दोनों को बैठाऊंगी और सबकी सुरक्षा और सहूलियत का ध्यान रखूंगी."

भारी वाहन में भी मिलेगी जगह?

परिवन मंत्री दिवाकर राऊत का कहना है, "हमें तो राज्य परिवहन में भी महिला ड्राइवर्स की अर्ज़ियां आई हैं. वो कहती हैं कि हमें भी इस काम करने के लिए स्थान दिया जाएं ताकि ड्राइवर और कंडक्टर दोनों महिलाएँ हो सकें. अगर महिलाएं भारी वाहन चलाने के टेस्ट में पास हुईं तो राज्य परिवहन में 3% आरक्षण दिए जाने पर भी विचार किया जाएगा."

कौन कहता है कि महिलाएँ ऑटो नहीं चला सकतीं?

महिलाओँ के लिए ये ऑटो भी ख़ास तैयार किए गए है जो एक बटन दबाने से शुरु होंगे. साथ ही ऑटो बनाने वाली कंपनी ने इन्हें ऑटो बंद हो जाने पर गाड़ी को चालू करने जैसी बातें भी सिखाई हैं.

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Image caption स्नेहा कदम के मुताबिक ऑटो चलाने से घर में कुछ पैसे आ जाएंगे

शुरुआत में इन लोगों को स्कूली बच्चे लाने ले जाने और शेयर्ड ऑटो जैसे सीमित जगहों पर चलाने के काम दिए जाएँगे ताकि हाथ साफ़ कर सकें और बाद में ये जहां चाहें वहां गाड़ियां चला सकती हैं.

इनकी बाकी ज़िम्मेदारियों को देखते हुए इनकी दो शिफ्ट बनाई गई हैं सुबह छह से दोपहर दो बजे तक और दोपहर दो से रात 10 बजे तक. इन्हीं में से एक 59 साल की सुप्रिया जावेकर कहती हैं, "एक ना एक दिन सभी को साहस करना होता है ना, तो मैंने इस उम्र में भी साहस कर लिया."

ये ऑटोवालियां कहती हैं, 'पुरुष ऑटो वाले भी हमें थम्प्सअप करते हैं...हालांकि अभी तो हम समंदर में कूदे ही हैं. मेहनत करेंगे तभी समुदर पार कर सकेंगे.'

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