छत्तीसगढ़ सरकार खुद से ही बेचेगी शराब

  • 4 अप्रैल 2017
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छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की ओर से खुद ही शराब बेचने के निर्णय को लेकर हंगामा मचा हुआ है.

विपक्षी दलों समेत सामाजिक संगठन सड़कों पर हैं. हर दिन धरना-प्रदर्शन और घेराव हो रहे हैं, लाठियां चल रही हैं, गिरफ़्तारियां हो रही हैं. लेकिन राज्य सरकार ने भी साफ कर दिया है कि वह अपने निर्णय से पीछे नहीं हटने वाली है.

राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा, "सरकार ने जनहित में निर्णय लिया है और किसी के धरने-प्रदर्शन से कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा."

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असल में राज्य सरकार ने ठेके पर शराब बिक्री को बंद कर खुद ही एक निगम बनाकर शराब बिक्री का निर्णय लिया है.

हालांकि इससे पहले कई अवसरों पर सरकार ने शराबबंदी की दिशा में पहल करने का दावा किया था. लेकिन सरकार शराब बिक्री से होने वाले राजस्व को ध्यान में रखते हुये ऐसा कोई निर्णय नहीं ले पाई.

'तुम मुझे शराब दो, मैं तुम्हें कबाब दूंगा'

मध्यप्रदेश से अलग जब छत्तीसगढ़ राज्य बना, उस समय 2001-02 में शराब से होने वाली आय 32.61 करोड़ रुपए थी, जो पिछले साल सौ गुना से भी ज़्यादा बढ़कर 3,347.54 करोड़ रुपए तक जा पहुंची और अनुमान है कि मार्च के अंत तक यह आंकड़ा 3800 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.

जाहिर है, अब जब सरकार ने खुद ही शराब बेचने का निर्णय लिया है तो वह शराब बिक्री के लिये गांव-गांव में नई शराब दुकान का निर्माण भी करवा रही है. इसके लिये पंचायतों को भी मौखिक आदेश जारी किये गये हैं. लेकिन इन आदेशों पर विवाद हो रहे हैं. सरकार के शराब बेचने का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा है.

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इसके अलावा इन निर्माणों को आम लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. हर दिन दुकान निर्माण के काम को रोकने और उनमें तोड़फोड़ के मामले सामने आ रहे हैं. राजधानी रायपुर समेत राज्य के कई हिस्सों में महिलाओं ने ऐसी दुकानों को ढहा दिया है.

क्या शराबबंदी के लिए अभी तैयार नहीं है बिहार?

बुधवार को राजधानी रायपुर के महात्मा गांधी नगर और डूमरतराई में ऐसी ही दो शराब दुकानों के निर्माण को पहले स्थानीय लोगों ने रुकवा दिया और पूरे निर्माण को गिरा कर, ज़मीन पाट दी गई.

इलाके की पार्षद श्रद्धा मिश्रा ने कहा, "जनता के विरोध के बाद भी सरकार शराब की दुकान का निर्माण कर रही है. यह सरकार की नीति का भी कानूनन उल्लंघन है और जनता की भावनाओं का भी."

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विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी भी राज्य सरकार के ताज़ा फ़ैसलों का विरोध कर रहे हैं. अजीत जोगी और उनकी पार्टी शराबबंदी के सवाल पर लगातार आंदोलन कर रही है. गुरुवार को युवा कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने शराबबंदी के मुद्दे पर अपनी गिरफ़्तारी दी.

दिलचस्प ये है कि सरकार के शराब बेचने के निर्णय का विरोध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी कर रहा है और भारतीय जनता पार्टी भी. यहां तक कि शराबबंदी आंदोलनों में भी भारतीय जनता पार्टी के नेता अपनी सरकार के ख़िलाफ़ मैदान में हैं.

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भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय कहती हैं, "मैं पूरी तरह से राज्य में शराबबंदी के पक्ष में हूं और मुख्यमंत्री रमन सिंह जी से भी हमारी चर्चा हुई है. कोई भी प्रक्रिया क्रमबद्ध तरीके से लागू होती है और छत्तीसगढ़ में भी शराबबंदी लागू होगी."

हालांकि राज्य के आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल विपक्ष के विरोध को शराब माफिया के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश बता रहे हैं.

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अमर अग्रवाल का कहना है कि सरकार ने शराब को लेकर दीर्घकालीन नीति बनाने के लिये एक कमेटी बनाई है, जो शराबबंदी वाले राज्य समेत दूसरे राज्यों की स्थिति का आकलन करते हुये अपनी रिपोर्ट देगी.

अमर अग्रवाल कहते हैं, "पूरे देश में सरकार की अनुमति से ही शराब की बिक्री होती है. छत्तीसगढ़ में जब शराब ठेकेदार शराब बेच रहे थे, तब विरोध करने वाले कहां थे? अगर सरकार शराब बेचेगी तो अवैध तरीके से बिकने वाली शराब पर रोक लग सकेगी."

नशे पर हर महीने का औसत खर्च

नशा सामग्री भारत छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ का क्रम
शराब 20.26 रुपये 34.44 रुपये 12
देसी शराब 9.92 रुपये 18.86 रुपये 5
तंबाकू उत्पाद 8.14 रुपये 22.45 रुपये 4
गांजा 0.15 ग्राम 0.07 ग्राम 7
ताड़ी/सल्फी 1.79 लीटर 1.42 लीटर 5

स्रोत: NSSO, Govt Of india

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