विक्रमशिला के खंडहरों से झांकता इतिहास

  • 5 अप्रैल 2017
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सोमवार को भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्राचीन विक्रमशिला महाविहार के खंडहरों को देखा.

इसे एक प्राचीन राजकीय विश्वविद्यालय के रूप में भी जाना जाता है.

सिल्क सिटी के नाम से मशहूर भागलपुर शहर से करीब 50 किलोमीटर पूरब में कहलगांव के पास अंतीचक गांव स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय का खंडहर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है.

इससे कुछ किलोमीटर उत्तर में गंगा नदी बहती है.

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Image caption मुख्य स्तूप के प्रवेश द्वार का सुपर स्ट्रक्चर और वहां रखे पिलर

सातवीं शताब्दी में भारत भ्रमण पर आए मशहूर चीनी यात्री ह्वेन सांग के यात्रा-वृतांत में विक्रमशिला विश्वविद्यालय का कोई जिक्र नहीं मिलता है, जो यह बताता है कि उस समय तक यह महाविहार वजूद में नहीं आया था.

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Image caption मुख्य स्तूप के प्रवेश द्वार पर रखे पिलर्स

इस विश्वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने आठवीं सदी के अंतिम वर्षों या नौवीं सदी की शुरुआत में की थी.

करीब चार सदियों तक वजूद में रहने के बाद तेरहवीं सदी की शुरुआत में यह नष्ट हो गया था.

एक मान्यता यह है कि महाविहार के संस्थापक राजा धर्मपाल को मिली उपाधि 'विक्रमशील' के कारण संभवतः इसका नाम विक्रमशिला पड़ा.

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Image caption स्तूप के मुख्य हिस्से में बुद्ध की मूर्ति रखने के लिए बना पेडेस्टल, यहां मिली बुद्ध की मूर्ति अभी पटना विवि के पास है.

सौ एकड़ से ज्यादा भू-भाग में स्थित इस विश्वविद्यालय की खुदाई की शुरुआत साठ के दशक में पटना विश्वविद्यालय द्वारा की गई थी,

इसे 1978 से 1982 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पूरा किया.

विक्रमशिला विश्वविद्यालय में अध्यात्म, दर्शन, तंत्रविद्या, व्याकरण, तत्त्व-ज्ञान, तर्कशास्त्र आदि की पढ़ाई होती थी.

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Image caption मुख्य स्तूप के बाहर बनाए गए मनौती स्तूपों के साथ विश्वविद्यालय स्तूप

यहां पढ़ने आने वाले हर किसी को विश्वविद्यालय के द्वार पर ही कठिन प्रवेश परीक्षा से गुजरना पड़ता था.

यहां एक साथ करीब एक हज़ार विद्यार्थी पढ़ते थे और सौ प्राध्यापक रहा करते थे.

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Image caption एक टेराकोटा मूर्ति

इस विश्वविद्यालय के प्रबंधन द्वारा ही बिहार की एक दूसरे मशहूर नालंदा विश्वविद्यालय के काम-काज को भी नियंत्रित किया जाता था.

दोनों के शिक्षक एक-दूसरे के यहां जाकर पढ़ाया भी करते थे.

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केंद्र सरकार ने भी इस विश्वविद्यालय के नाम पर भागलपुर में केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा कर रखी है.

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