सोशल: 'शास्त्रीय संगीत की सबसे मधुर आवाज़ हुई गुम'

जानीमानी शास्त्रीय संगीत गायिका किशोरी अमोनकर का सोमवार रात निधन हो गया है. वे 84 वर्ष की थीं.

ख्याल, ठुमरी और भजनों को शास्त्रीय संगीत से सराबोर करने वाली किशोरी अमोनकर ने अपनी माता मोघूबाई कुर्दिकर से संगीत की शिक्षा हासिल की जो स्वयं एक नामी गायिका थीं.

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सुर की पक्की किशोरी अमोनकर से जुडी कुछ यादें

भारत सरकार ने किशोरी अमोनकर को वर्ष 1987 में पद्म भूषण और साल 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था.

किशोरी अमोनकर के निधन के बाद लोग उन्हें सोशल मीडिया पर भी याद कर रहे हैं.

शबाना आज़मी ने ट्विट पर लिखा, "ये बहुत बड़ा नुकसान है. मैं उनकी बहुत बड़ी फ़ैन हूं और ऐसे समय में रहने के लिए ख़ुद को भाग्यशाली समझती हूं जिसमें मैं किशोरी अमोनकर जी को गाते हुए सुन पाई."

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शंकर माधवन ने लिखा, "महानतम किशोरी अमोनकर जी नहीं रही. ये भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए बहुत बड़ी क्षति है. उनका संगीत हमेशा जीवित रहेगा."

कंचन गुप्ता ने ट्वीट किया, "किशोरी अमोनकर की मौत से भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे मधुर आवाज़ ग़ुम हो गई. उनके कंसर्ट स्तब्ध करने वाले होते थे. ओम शांति"

सुप्रिया सुले ने किशोरी अमोनकर के साथ अपनी एक फोटो ट्वीट की है और लिखा है 'मेरी सबसे प्रिय क्लासिकल सिंगर अब इस दुनिया में नहीं रहीं. मैं बहुत बहुत दुखी हूं.'

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डॉ. प्रकाश सोनटके ने ट्वीट किया, "विदुषि किशोरी अमनोकर ऐसी सबसे कामयाब कलाकार के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने बॉलीवुड के ख़िलाफ़ अपना मुक़दमा जीता."

संदीप नाइक ने फ़ेसबुक पर लिखा, "आज की सुबह किशोरी ताई अमोनकर के दुखद निधन की खबर लेकर आई है. निशब्द हूँ और लग रहा है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत का मजबूत स्तम्भ ढह गया. शब्द ही खत्म हो गए है मानो. ताई को नमन ओर श्रद्धांजलि."

आशुतोष कुमार ने फ़ेसबुक पर लिखा, "किशोरी अमोनकर की आवाज़ में 'प्रेम की पीर' थी. गहरा इंसानी दर्द. महान प्रतिभाओं से भरे पूरे अतरौली-जयपुर घराने की बेमिसाल लयकारी को कामना,वियोग और एकाकीपन के दुख से जोड़कर किशोरी अमोनकर ने 'रस' को एक नई पहचान दी. उन्हें सुनते हुए लगता है जैसे किसी वियोगिनी की रेगिस्तानों में भटकती कंपकंपाती गूंजती पुकार सुन रहे हों."

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