कई गोलियां खाईं, पर फिर उठे चेतन चीता!

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Image caption सीआरपीएफ़ के कमांडेंट चेतन कुमार

बीती फरवरी को जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा एनकाउंटर में घायल सीआरपीएफ़ कमांडेंट चेतन कुमार 'चीता' कई हफ्ते कोमा में रहने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहे हैं.

उनका एक महीने से एम्स में इलाज़ चल रहा था और गुरुवार को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा.

गृहराज्य मंत्री किरण रिजिजु ने ट्वीट किया है, "चमत्कार! बहादुर सीआरपीएफ़ कमांडेंट चेतन कुमार चीता जम्मू कश्मीर में हुई मुठभेड़ के दौरान लगी गोलियों से उबर गए. एम्स के डॉक्टरों को शुक्रिया. उनके साहस को सलाम."

भारत प्रशासित कश्मीर के बांदीपोरा में चरमपंथियों के साथ हुई एक मुठभेड़ में चेतन कुमार को 9 गोलियां लगी थीं.

उनके सिर, जबड़े और आंख में गोली लगी थी और उनका हाथ टूट गया था. शुरुआती इलाज़ के दौरान ही वो कोमा में चले गए थे.

मुठभेड़ में तीन सैनिकों और एक चरमपंथी की मौत

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एम्स के न्यूरोसर्जरी के प्रोफ़ेसर डॉ दीपक अग्रवाल ने कहा कि उनके दिमाग में कई सर्जरी करनी पड़ी ताकि जमे हुए खून के धब्बों को निकाला जा सके.

अस्पताल के चिकित्सकों ने कहा कि जब उन्हें यहां भर्ती किया गया था तो उनके बचने की उम्मीद बहुत कम थी.

हालांकि इलाज़ करने वाले चिकित्सकों का कहना है कि अब उन्हें रिहैबिलिटेशन की ज़रूरत है.

14 फ़रवरी को हुई इस मुठभेड़ में तीन सैनिक और एक चरमपंथी की मौत हो गई थी.

सोशल मीडिया पर चेतन कुमार के साहस को सराहा जा रहा है.

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फ़ेसबुक पर प्रदीप बिसारिया ने लिखा है, "नौ गोलियां लगी थीं, चेतन कुमार चीता फिर से बात करने लगे हैं. वेलकम होम."

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया है, "भाग्य बहादुरों का साथ देता है. चीता का चमत्कारिक रूप से ठीक होने की ख़बर से बहुत खुशी हुई."

उत्कर्ष कुमार शाही ने ट्वीट किया है, "उन्हें नौ गोली लगी थी. फिर भी उन्होंने संघर्ष किया. बांदीपोरा एनकाउंटर के हीरो सीआरपीएफ़ कमांडेंट चेतन चीता दो महीने बाद डिस्चार्ज किए जा रहे हैं."

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