तीस्ता जल बंटवारे को लेकर समाधान निकलेगा?

  • 7 अप्रैल 2017
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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ढाका यात्रा पर जाने के दो साल बाद भारत आ रही हैं.

वो पिछली बार सात साल पहले भारत के दौरे पर आई थीं.

इन सात सालों के दौरान दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों में उत्साहजनक इजाफा हुआ है. कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग भी विकसित हुए हैं.

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मील का पत्थर

भारत ने बांग्लादेशी प्रधानमंत्री की इस यात्रा को एक मील का पत्थर कहा है तो वहीं बांग्लादेश के विदेश मंत्री एएच महमूद अली ने इसे दोनों देशों के बीच 'रिश्ते की नई ऊंचाई' तक पहुंचना कहा है.

पिछले सात सालों के दौरान भारत और बांग्लादेश ने लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और नई संभावनाओं को भी तलाशा है.

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शेख हसीना के मौजूदा दौरे के दौरान उम्मीद है कि कई समझौतों पर हस्ताक्षर हो जिससे कि दोनों देशों के बीच सहयोग और व्यापक होगा.

ये समझौते ऊर्जा, व्यापार, निवेश और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र पर केंद्रित होंगे.

उम्मीद है कि भारत बांग्लादेश को पावर प्लांट, सोलर प्लांट, पावर ट्रांस्मीशन लाइंस, बंदरगाहों को विकसित करने, नई रेल लाइनें और विशेष आर्थिक ज़ोन जैसे आधारभूत संरचना से जुड़े प्रोजेक्ट्स को विकसित करने के प्रस्ताव देने वाला है.

कुछ दूसरे समझौतों पर भी बात हो सकती है जिसमें चरमपंथ का मुकाबला, पर्यटन और दक्षिण एशियाई सैटेलाइट में बांग्लादेश की भागीदारी की बात शामिल हो सकती है.

इसरो दक्षिण एशियाई सैटेलाइट लांच करने की योजना बना रहा है.

यह सैटेलाइट मौसम की भविष्यवाणी, मैपिंग, टेलीमेडिसिन और संचार के क्षेत्र में काम करेगी.

दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाली नियमित बैठकों की वजह से आपसी संबंधों में महत्वपूर्ण विकास हुए हैं.

दोनों ही देश सीमा से जुड़े हुए मुद्दों को सुलझाने में भी कामयाब हुए हैं. पिछले साल दोनों देशों के बीच दर्जनों गांवों की अदला-बदली हुई है. समुद्री सीमा के मुद्दों को पहले ही सुलझाया जा चुका है.

भारत ने सभी बांग्लादेशी समानों पर सीमा शुल्क में छूट दे रखी है. इसके बदले बांग्लादेश ने चरमपंथ के मुद्दे पर आपसी सहयोग में वृद्धि किया है.

इस दिशा में बांग्लादेश ने अपने ज़मीन से सक्रिय भारतीय विद्रोही गुटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है.

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सार्क बैठक में बांग्लादेश का साथ

आपसी सहयोग के इन सभी कदमों ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को बढ़ाया है और कई क्षेत्रों में सामंजस्य स्थापित करने में मदद की है.

सार्क के कामकाज को लेकर कोई प्रगति नहीं होने पर दोनों देशों की समान दृष्टि है.

पिछले साल सार्क बैठक से पीछे हटने के भारत के फ़ैसले पर बांग्लादेश ने भी साथ दिया था. यह बैठक पाकिस्तान में होने वाली थी.

आख़िरकार यह बैठक बाद में रद्द हो गई.

भारत और बांग्लादेश ने दोनों देशों की बीच की दूरी को कम करने की कोशिश के तहत पुराने सड़क और रेल संपर्क को दुरुस्त किया है.

कभी इस क्षेत्र में आवागमन के लिए इन माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था.

समुद्र के रास्ते माल ढुलाई को लेकर नए समझौते हुए हैं. ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की वजह से भारत ने बांग्लादेश को व्यवसायिक स्तर पर पिछले साल बिजली मुहैया करायी है.

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पूर्वोत्तर और संभावित बाज़ार

भारत के पूर्वोत्तर का हिस्सा लंबी दूरी तक बांग्लादेश की सीमा से लगा हुआ है. लंबे समय से भारत अपने इस हिस्से में समान भेजने के लिए बांग्लादेश के रास्ते का इस्तेमाल करना चाहता था.

ताकि उसे अपने पूर्वी-उत्तर हिस्से में पहुंचने में कम समय और दूरी तय करनी पड़े. बांग्लादेश के पिछले दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए है जिसके तहत भारत को चिटगांव बंदरगाह और मोंगला नदी के बंदरगाह के रास्ते माल भेजने की सुविधा प्राप्त हुई है.

इससे त्रिपुरा तक माल पहुंचने में कम समय और लागत लगती है.

यह रास्ता भारत के पूर्वी-उत्तरी हिस्से में बांग्लादेश के लिए संभावित बाज़ार के रास्ते भी खोलता है.

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बांग्लादेश पहले से ही त्रिपुरा को इंटरनेट बैंडविथ निर्यात कर रहा है और उम्मीद है कि वो पूर्वोत्तर के दूसरे राज्यों जहां डिजिटल कनेक्टीविटी कम है वहां भी मुहैया करवाएगा.

दोतरफा संबंधों के प्रगाढ़ होने के साथ ही कुछ दूसरे मुद्दे भी हैं जिनका समाधान जरूरी है.

पिछले साल भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार में 17 फ़ीसदी (साढ़े पांच अरब अमरीकी डॉलर) का इज़ाफा हुआ है लेकिन इसका ज्यादातर हिस्सा भारत को ही गया है.

बांग्लादेश के उद्यमियों को शिकायत है कि उन्हें गैर-टैरिफ अवरोधकों की वजह से निर्यात में मुश्किलें पैदा होती हैं.

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तीस्ता जल संधि बांग्लादेशियों के लिए एक भावनात्मक मुद्दा है. इस दिशा में बहुत कम प्रगति हो सकी है क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीस्ता का पानी देने का विरोध किया है.

उनकी दलील है कि इसे पश्चिम बंगाल के किसानों को नुकसान होगा.

लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि शेख हसीना का सफल दौरा दोनों देशों के बीच की दोस्ती को एक नया मुकाम प्रदान करेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति को बढ़ावा देगा.

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