भारतीय जेल में पैदा हिना मां संग जाएंगी पाकिस्तान

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Image caption फ़ातिमा, उनकी बहन मुमताज़ और 10 साल की बेटी हिना रिहाई को लेकर बेहद ख़ुश हैं

अमृतसर की सेंट्रल जेल में 10 साल की सज़ा काटने के बाद जुर्माना जमा नहीं भर पाने के एवज़ में पाकिस्तानी मां और उनकी भारत में जन्मी बेटी को 4 साल के सश्रम कारावास की सज़ा अब नही काटनी पड़ेगी.

एक ग़ैर सरकारी संस्था उनकी मदद के लिए आगे आई है और भारतीय कोर्ट में जुर्माने के 4 लाख रुपए जमा करवा दिए हैं.

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2006 में हुईं थीं गिरफ़्तार

दरअसल, साल 2006 में पाकिस्तानी महिला फ़ातिमा को उनकी बहन के साथ अटारी रेलवे स्टेशन पर तब गिरफ़्तार किया गया था जब वो समझौता एक्सप्रेस से भारत आई थीं.

दोनों को प्रतिबंधित ड्रग्स रखने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. दोषी पाए जाने के बाद भारतीय अदालत ने उन्हें 10 साल सश्रम कारावास और 4 लाख रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई थी. कोर्ट ने जुर्माने की राशि ना चुका पाने के एवज़ में उन्हें और चार साल जेल में गुज़ारने का आदेश दिया था.

जेल जहां मुस्कुराती हैं महिला क़ैदी

यहां जेल तो हैं, लेकिन क़ैदी नहीं!

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Image caption नवजोत कौर छब्बा और रविंदर सिंह रॉबिन

जेल में पैदा हुई बेटी हिना

फ़ातिमा जब भारत आईं थीं तब वो गर्भवती थीं, उन्होंने सज़ा के दौरान जेल में अपनी बेटी को जन्म दिया और उनका नाम हिना रखा. हिना अब 10 साल की हो गईं हैं, वो बाहर की दुनिया देखने को बेताब हैं जो तमाम औपचारिकताएं पूरी हो जाने के बाद ही मुमकिन होगा.

हिना सिर्फ़ स्कूल जाने के लिए ही जेल से बाहर निकलती हैं, बाक़ी वक़्त वो जेल में अपनी मां के साथ ही रहती हैं. फ़ातिमा और उनकी बहन मुमताज़ ने नवंबर में ही अपनी 10 साल की सज़ा पूरी कर ली थी. लेकिन जुर्माने की राशि ना चुका पाने की वजह से वो दोनों और उनके साथ 10 साल की हिना को भी रिहा नहीं किया गया.

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अब मिल सकेगी रिहाई

उनकी मदद की नवजोत कौर छब्बा ने. छब्बा ''सोसाइटी फॉर वुमेन इम्पॉवरमेंट एंड ग्रीन कॉज़ेज़'' की संस्थापक हैं. उनकी संस्था ने ही फ़ातिमा के जुर्माने की राशि चुकाई.

नवजोत बताती हैं कि गुरुवार को वो तीनों से जेल में मिलीं.

नवजोत ने कहा ''वो अपनी रिहाई को लेकर बेहद ख़ुश हैं, उन्होंने उन सभी लोगों का आभार जताया जिन्होंने उनकी इस मामले में मदद की और पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी ग़ैर सरकारी संस्थाओं से पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीयों की मदद की गुहार लगाई.''

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लेकिन इन महिलाओं का संघर्ष अभी ख़त्म नहीं हुआ है, मामले का अंतिम फ़ैसला अभी दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों में होना है.

फ़तिमा और उनके परिवार की रिहाई में छब्बा की मदद करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नवजेत सिंह को उम्मीद है कि उन्हें अब ज़्यादा अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ेगा क्योंकि उन्होने दूतावास के भारतीय अधिकारियों से इस मामले को मानवीय आधार पर लेने को कहा है.

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