राजस्थान के मेव समुदाय में 'गोरक्षकों का ख़ौफ़'

  • 8 अप्रैल 2017
इमेज कॉपीरइट Rajendra Sharma

राजस्थान के अलवर जिले में अल्पसंख्यक मेव समुदाय सदमे और सकते में है.

गो-तस्करी के आरोप में कथित गोरक्षकों की भीड़ ने पिछले दिनों हमला कर मेव समुदाय के एक व्यक्ति को इतना पीटा कि उसकी जान चली गई.

मेव समुदाय के लोगों का कहना है कि पशुपालन और खेती उनकी रोज़ी रोटी का ज़रिया है मगर अब इस घटना के बाद समुदाय के लोगों में ख़ौफ़ है.

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब तालीम में पिछड़े मेव समाज के लड़के लड़कियां पढ़ लिखकर मेवात में तरक्की की इबारत लिखने में लगे हुए थे.

पिछले एक दशक में गो-तस्करी को लेकर अलवर जिले में छिट पुट घटनाएँ होती रही हैं.

लेकिन क्षेत्र के समाजिक कार्यकर्ता इस घटना को लेकर कहते हैं कि यह अल्पसंख्यक समुदाय में भय पैदा करने का नियोजित प्रयास था.

इमेज कॉपीरइट Rajendra Sharma

अलवर मेव समुदाय के सिफ़त मैनेजर कहते हैं , ''दरअसल मुदाय को भयभीत और हतोत्साहित करने का योजनाबद्ध प्रयास था.''

सिफ़त मैनेजर के बेटे मक़सूद, मेव बिरादरी के ऐसे पहले नौजवान हैं जो भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुने गए है.

वे कहते हैं,'' आप सोच सकते हैं इस घटना से हमारे बच्चों में तरक्की के अरमानों को कितना धक्का लगा होगा.''

राज्य के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने घटना के बाद मीडिया से कहा गोरक्षा के कानून और चौकसी के लिए चौकियां बनाने के बाद भी गो-तस्करी की घटनांए हो जाती हैं.

उन्होंने कहा,'' गोरक्षकों के गोतस्करी पर नज़र रखने में कोई बुराई नहीं है. मगर कानून किसी को भी हाथ में नहीं लेना चाहिए. इसके लिए पुलिस कार्रवाई कर रही है. ''

इमेज कॉपीरइट Rajendra Sharma

मगर सिफ़त मैनेजर कहते हैं, ''आप जिले की जनगणना के आंकड़े देख लीजिए. इस क्षेत्र में मेव समुदाय के पास दस हजार गाएँ हैं. वे खेती और पशुपालन करते हैं. यह घटना एक एजेंडे का हिस्सा है. ''

सिफ़त मैनेजर का कहना था 1990 -92 में देश के कई भागों में घटनाएँ हुई लेकिन इस क्षेत्र में शांति रही.

अलवर जिले में सत्तारूढ़ बीजेपी के विधायक रामहेत यादव कहते हैं, '' यह घटना कुछ लोगों का कुत्सित प्रयास था. जनता हक़ीक़त जानती है. सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी. कोई भी कानून से बड़ा नहीं है. ''

क्या यह धार्मिक ध्रुवीकरण का एक प्रयास था ? यादव कहते हैं कि यह महज़ एक आपराधिक घटना है.

मगर अलवर के सामाजिक कार्यकर्त्ता वीरेंद्र विद्रोही कहते हैं,'' यह अल्पसंख्यक और वंचित वर्गो में डर पैदा करने की नीयत से किया गया काम है. ये उन लोगों का काम है जो धर्म का नाम लेकर सियासत करते हैं.''

इमेज कॉपीरइट Rajendra Sharma

मेवात क्षेत्र में लम्बे समय से शिक्षा का अभियान चला रहे नूर मोहम्मद कहते हैं, ''इस घटना से लोग बहुत डरे हुए हैं. मगर राहत की बात है कि बहुसंख्यक समाज के लोग मेव समुदाय के साथ खड़े हैं. ''

मेव समुदाय के लड़के लड़कियों ने हाल के वर्षों में पढ़ लिख कर उम्मीद जगाई है.

नूर मोहम्मद बताते हैं कि इस बार भी मेव समाज के पांच लोगों ने अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा का मुख्य इम्तिहान पास किया है. लड़कियां आई आई टी तक पहुंची हैं और पढ़ रही हैं. लेकिन इस घटना ने सबको हिला कर रख दिया है

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अलवर जिले में अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी 14 प्रतिशत से ज्यादा है.

अलवर और भरतपुर के मेवात क्षेत्र में 789 गावों में मेव बिरादरी के लोगों की अच्छी संख्या है.

इमेज कॉपीरइट Rajendra Sharma

इनमें से 515 गांव अलवर ज़िले में आते हैं. पिछली बार मेव समुदाय की सफ़िया खान अलवर की ज़िला प्रमुख चुनी गई थी.

मेवात की राजनीति में मेव समुदाय और अन्य पिछड़ा वर्ग में मुकाबला होता रहा है. लेकिन रिश्तों में कभी दरार नहीं आई.

मेव समाज के सिफ़त मैनेजर कहते हैं, '' सियासी प्रतिद्व्न्दिता चुनाव तक सीमित रहती है. बागोड़ा ग्राम पंचायत मेव बहुल है लेकिन यादव समाज के रामप्रसाद सरपंच चुने गए.''

नूर मोहम्मद का कहना है कि बागोड़ा में यादव समाज का महज एक घर है और रामप्रसाद पांच साल तक सरपंच रहे हैं. यह मेवात में सौहार्द के सामाजिक ताने बाने का सुबूत है.

इमेज कॉपीरइट Reuters

अलवर जिला यादव समाज के अध्यक्ष भारत यादव कहते हैं ,'' चुनावी राजनीति में पिछड़े वर्ग की जातियों और मेव समुदाय में मुकाबला भी होता है और दोनों कई जगह एक दूसरे के उम्मीदवारों को वोट भी देते हैं. मुझे नहीं लगता कि कोई धार्मिक ध्रुवीकरण खड़ा होगा.''

नागरिक अधिकार और सामाजिक कार्यकर्त्ता अरुणा रॉय , कविता श्रीवास्तव, निशात हुसैन और गांधीवादी सवाई सिंह ने राज्य सरकार से गोरक्षक दलों पर रोक लगाने की मांग की है. इन कार्यकर्ताओं ने सरकार से बहरोड़ की घटना में न्याय की मांग की है.

कोई इस घटना पर राजनीतिक नफ़े नुकसान का हिसाब लगा रहा है तो कोई अपने वैचारिक मंसूबों के नारे बुलन्द कर रहा है.

लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जिसे समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे सदमे से उबरे और फिर से रोज़मर्रा की जिंदगी शुरू करे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे