फ़िल्म थ्री इडियट्स की याद दिलाता कश्मीरी फ़ोटोग्राफ़र

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Image caption साक़िब माजिद

भारत प्रशासित कश्मीर के 25 वर्षीय युवा फ़ोटो पत्रकार साक़िब माजिद की एक तस्वीर को विस्डन-एमसीसी 2016 " फोटो ऑफ़ द ईयर" के लिए चुना गया है.

साक़िब पेशे से इंजीनियर हैं और फ़ोटोग्राफ़ी शौक़ के लिए करते हैं.

साक़िब की जिस तस्वीर को फ़ोटो ऑफ़ द ईयर के लिए चुना गया, वह तस्वीर उन्होंने बीते साल श्रीनगर के निशात बाग़ में क्रिकेट खेल रहे लड़कों की ली थी.

उनका कहना है कि इस तस्वीर के लिए उन्हें दो हज़ार पाउंड का इनाम दिया गया है.

तस्वीरें जो पतंगों ने​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​ खींची हैं

जिसने फ़ोटोग्राफ़ी की तस्वीर बदल दी

फ़ोटोग्राफ़ी, स्टूडियोज़ और बदलाव!

साक़िब ने श्रीनगर और राजस्थान से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और आजकल श्रीनगर में इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट चलाते हैं.

बचपन से फोटोग्राफ़ी का शौक़ रखने वाले साक़िब बीते सात वर्षों से फ्रीलांसर फ़ोटो पत्रकार के तौर पर भारत प्रशासित कश्मीर और कश्मीर से बाहर अख़बारों और समाचार पत्रिकाओं के साथ जुड़े रहे हैं.

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Image caption साक़िब की इस तस्वीर को चुना गया 'फोटो ऑफ़ द ईयर'

'फोटो ऑफ़ द ईयर ' के लिए उनकी जिस तस्वीर को चुना गया है उसके बारे में वो कहते हैं," पिछले साल पतझड़ के मौसम के दौरान मैंने श्रीनगर के निशात बाग़ में कुछ लड़कों को क्रिकेट खेलते देखा था. फिर मैंने सोचा कि मैं इस क्रिकेट की ऐसी तस्वीर लेना चाहता हूँ, जो सबसे अलग हो. मैंने कई एंगल तब्दील किए अब अब पता चला कि ये तस्वीर क्या है."

साक़िब को इस बात की कोई उम्मीद नहीं थी कि उनकी इस तस्वीर को इनाम के लिये चुना जाएगा.

वो कहते हैं, "मैं तो ऐसा नहीं सोचा था. शायद मेरी मेहनत रंग लाई है. मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा था कि इस तस्वीर को इतना सराहा जाएगा. बस इतना था कि मैं कुछ अलग करना चाहता था."

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साक़िब ने फोटोग्राफी का कोई भी कोर्स नहीं किया है, फ़ोटो पत्रकारिता की पढ़ाई की ख़्वाहिश तो थी लेकिन परिवार वालों ने ऐसा करने नहीं दिया.

श्रीनगर के सोनवार में रहने वाले साक़िब के पिता एक सरकारी कर्मचारी हैं.

नेचर फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता

जब उन्होंने फ़ोटो पत्रकारिता की शुरुआत की तो पहले डेढ़ साल तक कोई उनकी तस्वीर नहीं छापता था, साक़िब इससे निराश तो होते थे लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.

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वो कहते हैं कि लोग शुरू में उनका मज़ाक भी उड़ाते थे.

उन्होंने कहा, " मैं सुबह से शाम तक सिर्फ़ तस्वीरें खींचता था. शुरू के डेढ़ साल में तो मेरी कोई तस्वीर कहीं नहीं छपी. सब आलोचना करते थे. परिवार वालों को भी लगता था कि मैं अपना समय ज़ाया कर रहा हूँ. लेकिन आज दिल खुश है. हर कोई मुझे बधाई दे रहा है."

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साक़िब ज़्यादातर नेचर फ़ोटोग्राफ़ी करना पसंद करते हैं, बीते दो तीन सालों से अब वह कश्मीरियों की आम ज़िन्दगी को भी अपने कैमरे में क़ैद करते हैं.

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जब साक़िब ने एक बार फ़ेसबुक पर एक तस्वीर अपलोड की थी तो उनकी काफ़ी आलोचना हुई थी.

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उनका कहना था, " मुझे अभी भी याद है कि बहुत लोगों ने उस तस्वीर पर मुझे बहुत कोसा था. किसी ने कहा कि इस को फ़ोटो फ्रेम नहीं आता है, किसी ने कहा था कि इस को फ़ोटो स्कैनिंग नहीं आती है. वह समय कभी नहीं भूलता हूँ."

कश्मीर के युवा फोटो पत्रकारों के बारे में साक़िब कहते हैं कि उनको कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए.

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