पहली बार चार हाईकोर्ट का नेतृत्व महिला जजों के हाथ में

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Image caption जस्टिस मंजुला चेल्लूर, निशिता म्हात्रे, इंदिरा बनर्जी और जी रोहिणी

भारत के न्यायिक इतिहास में पहली बार चार बड़े और सबसे पुराने उच्च न्यायालयों की ज़िम्मेदारी महिला जजों के जिम्मे आई है.

बीते 31 मार्च को इंदिरा बनर्जी के मद्रास हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले मुंबई, दिल्ली और कोलकाता में मुख्य न्यायाधीश के पदों की ज़िम्मेदारी महिला जज निभा रही हैं.

आज भी न्यायपालिका में पुरुष जजों की संख्या अधिक है और महिला जजों की भारी कमी है.

इंदिरा बनर्जी, मुख्य न्यायाधीश, मद्रास हाईकोर्ट

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24 सितम्बर 1957 को जन्मीं जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ लॉ से क़ानून की डिग्री हासिल की.

1985 में उन्होंने वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया और 2002 में कलकत्ता हाईकोर्ट में पहली बार उन्हें स्थायी जज नियुक्त किया गया.

अगस्त 2016 में उनका दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफ़र कर दिया गया और फिर प्रोन्नत करते हुए, मद्रास हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया.

इंदिरा बनर्जी समेत मद्रास हाईकोर्ट में छह महिला जज हैं, जबकि पुरुष जजों की संख्या 53 है.

मंजुला चेल्लूर, मुख्य न्यायाधीश, बांबे हाईकोर्ट

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कर्नाटक के बेल्लारी में पांच दिसम्बर 1955 को जन्मीं जस्टिस मंजुला चेल्लूर ने 1977 में लॉ की डिग्री बेंगलुरू के रेनुकाचार्य लॉ कॉलेज से हासिल की.

जब 1978 में उन्होंने बेल्लारी में वकालत शुरू की तो वो यहां वो पहली महिला वकील थीं.

फ़रवरी सन् 2000 में वो कर्नाटक हाईकोर्ट में जज नियुक्त हुईं. वो यहां जज बनने वाली भी पहली महिला थीं. इसी साल अगस्त में उन्हें अस्थायी जज बनाया गया.

2011 में उन्हें केरल हाईकोर्ट का कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनाया गया और फिर 2012 में मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुईं.

2014 में जब वो कलकत्ता हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनीं तो वो यहां पहली महिला मुख्य न्यायाधीश थीं.

पिछले साल 22 अगस्त को उन्हें बांबे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया.

जस्टिस जी रोहिणी, मुख्य न्यायधीश, दिल्ली हाईकोर्ट

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आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 14 अप्रैल 1955 में पैदा हुईं जी रोहिणी विज्ञान की छात्रा रही हैं और लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद 1980 में हैदराबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की.

1995 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में सरकारी वकील के रूप में उनकी नियुक्त हुई.

2001 में आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनीं और इसके अगले साल उन्हें स्थायी जज बनाया गया.

दो साल पहले अप्रैल 2014 में वो दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुईं.

यहां 35 पुरुष जजों के मुक़ाबले, मुख्य न्यायाधीश समेत सिर्फ 9 महिला जज हैं. यहां भी वरिष्ठता क्रम में नंबर दो पर महिला जज जस्टिस गीता मित्तल हैं.

जस्टिस निशिता म्हात्रे, मुख्य न्यायाधीश, कलकत्ता हाईकोर्ट

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1955 में जन्मीं निशिता म्हात्रे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पुणे से की. विज्ञान से स्नातक करने के बाद उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ की डिग्री हासिल की.

बार काउंसिल ऑफ़ महाराष्ट्र एंड गोवा के तहत उन्होंने बांबे हाईकोर्ट में 1978 में वकालत शुरू की.

2001 में उन्हें बांबे हाईकोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त किया गया और इसके दो साल बाद ही उन्हें स्थायी जज बना दिया गया.

2012 में उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट का जज बनने के चार साल बाद दिसम्बर 2016 में उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट में कार्यकारी मुख्य न्यायधीश के पद पर नियुक्त किया गया.

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