यूपी के एंटी रोमियो स्क्वॉड के साथ एक दिन

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Image caption एंटी रोमियो दस्ता

योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद लड़कियों से होने वाली छेड़छाड़ की घटना को रोकने के लिए पुलिस बल के एक ख़ास दस्ते का गठन किया गया है- एंटी रोमियो स्कवॉड.

हालांकि इस दस्ते पर सवाल भी उठ रहे हैं. इलाहाबाद में ऐसे ही एक दस्ता जब एक पार्क में पहुंचा तो युवा जोड़े छिपने की कोशिश करने लगे.

इलाहाबाद पुलिस के एएसपी नीरज कुमार जादून ने उनसे कहा, "छिपने की जरूरत नहीं, हम आपकी सुरक्षा के लिए आए हैं."

तब लड़का सामने आकर माफ़ी मांगने लगा, जब नीरज कुमार ने उसे बताया कि तुम ग़लत नहीं हो और कुछ देर की बातचीत के बाद वो जोड़ा पार्क में कहीं गुम हो गया.

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Image caption युवा जोड़े को समझाते हुए नीरज कुमार जादून

नीरज कुमार जादून कहते हैं, "कुछ लोग पुलिस से डरते हैं, इस धारणा को बदलने की चुनौती है. लेकिन छेड़छाड़ भी एक सच्चाई है. उससे लड़ने की ज़रूरत है."

पुलिस के मुताबिक राज्य में यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं के चलते इस दस्ते का गठन किया गया है, हालांकि इसको लेकर भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध नहीं है.

इस दस्ते में फिलहाल 1400 अधिकारियों को तैनात किया गया है. प्रत्येक दस्ते में तीन सामान्य वेशभूषा वाले अधिकारी और एक महिला अधिकारी होती है.

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Image caption पार्क में बैठे जोड़े

ये लोग कार से पेट्रोलिंग करते हैं. इस दस्ते पर प्रेमी जोड़ों को प्रताड़ित करने का आरोप भी लगा है. लेकिन यूपी पुलिस के मुख्य प्रवक्ता राहुल श्रीवास्तव का कहना है कि कुछ ही अधिकारियों से ग़लती हुई है.

उन्होंने बताया, "हम अपने कर्मचारियों को लगातार ट्रेनिंग दे रहे हैं. हमने नौ अधिकारियों को सस्पेंड भी किया है. हमने साफ़ निर्देश दे रखा है कि सहमति से एक दूसरे के साथ घूम रहे वयस्कों को तंग नहीं किया जाए."

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नीरज कुमार जादून को पार्क में एक युवक मिला. वो कह रहा था, "मेरा नाम अभिलाष डेनिस है. मैं आपको इस पहल के लिए धन्यवाद देता हूं. लेकिन मुझे कुछ समस्याएं भी हैं."

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Image caption अभिलाष डेनिस पुलिस की इस पहल का समर्थन करते हैं

अभिलाष डेनिस ने आगे कहा, "छेड़छाड़ करने वाले मनचले पार्क के आसपास घूमते हैं. वे छींटाकशी किया करते थे. ऐसे में दस्ते की वजह से वैसे तत्व सार्वजनिक जगहों में कम दिखाई देने लगे हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि पुलिस को किसी भी वक्त हमें डिस्टर्ब करने का अधिकार मिल गया है."

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वहीं एक महिला, अपनी पहचान जाहिर होने के डर से पुलिस पर नाराज दिखीं. उन्होंने कहा, "ये पुलिस की ज़िम्मेदारी है कि हम सुरक्षित महसूस कर सकें. लेकिन मैं अपने पुरुष दोस्त के साथ पार्क में बैठी हूं, इसलिए पुलिस को मुझसे पूछताछ का अधिकार नहीं मिल जाता."

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हालांकि इस महिला ने माना कि राज्य में लड़कियों और महिलाओं के साथ शारीरिक छेड़छाड़ या टीजिंग करना एक समस्या है और पुलिस उन पर अंकुश लगा रही है लेकिन उन्हें ये काम बेहतर ढंग से करना चाहिए.

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शहर के एक दूसरे पार्क में दो कपल एक बेंच पर बैठे नज़र आए. कृतिका सिंह कहती हैं, "ईव टीजिंग कितनी बड़ी समस्या है, ये आपको मालूम होना चाहिए. प्रत्येक लड़की आपको सार्वजनिक जगहों पर होने वाले भयावह अनुभव के बारे में बता सकती है. कई बार तो सार्वजनिक जगहों पर वे हमें ग़लत ढंग से छूते भी हैं."

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Image caption उत्तर प्रदेश में एंटी रोमियो दस्ता से सुरक्षित महसूस करने लगी हैं कृतिका सिंह

कृतिका की दोस्त साधना मौर्या इससे सहमत होते हुए कहती हैं, "हम लोगों ने मोरल पुलिसिंग पर रिपोर्ट देखी है, वह रुकनी चाहिए. लेकिन इस दस्ते को बंद नहीं करना चाहिए. इससे बदलाव हो रहा है, हम थोड़े सुरक्षित तो हुए हैं."

इस स्कवॉड और आम लोगों के बीच शहर भर में लोगों से काफ़ी बात हुई. यह दस्ता स्कूल, मॉल और बाज़ार सब जगह रुका.

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कई लोगों से पूछताछ हुई लेकिन किसी को हिरासत में नहीं लिया गया. नीरज कुमार जादून कहते हैं, "लोगों को गिरफ़्तार करना हमारा उद्देश्य नहीं है. हम ईव टीज़रों को बताना चाहते हैं कि हम उन्हें पकड़ना चाहते हैं."

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Image caption एंटी रोमियो दस्ता

इस दस्ते के बारे में राज्य के पुलिस महानिदेशक जावेद अहमद ने बताया, "ईव टीजिंग सच्चाई है. हमें महिलाओं को संदेश देना है कि हम उनकी सुरक्षा के लिए हैं और उनके साथ छेड़छाड़ करने वाले कड़ी कार्रवाई होगी."

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साथ ही जावेद अहमद ये मानते हैं कि ये शुरुआत हुई है अभी लंबा सफ़र तय करना है.

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Image caption पुलिस अधिकारी

वे कहते हैं, "महिलाएं जब तक सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी तब तक इसे प्रगतिशील राज्य नहीं माना जा सकता."

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