पीएम मोदी सोचें गोरक्षकों को कैसे सुधारें: शंकराचार्य

  • 12 अप्रैल 2017
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गोवर्धनपुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद महाराज का कहना है कि गोरक्षा के नाम पर जो भय का माहौल बना है उसका लेखा-जोखा उन राजनेताओं को करना चाहिए 'जिन्होंने भय मुक्त समाज-व्यवस्था कायम करने की शपथ ली है'.

उन्होंने कहा कि क़ानून अपने हाथ में लेने वाले कथित गोरक्षकों को सुधारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहल करनी चाहिए.

शंकराचार्य अधोक्षजानंद ने बीबीसी से कहा, "भारत के प्रधानमंत्री ऐसे गोभक्तों के बारे में कुछ दिन पहले अपना बयान स्पष्ट कर चुके हैं. इससे ज़ाहिर है कि सारी जानकारियां प्रधानमंत्री जी को भी हैं. वो स्वत: इस पर निर्णय लें कि जिन कारणों से समाज का वातावरण और क़ानून व्यवस्था की स्थिति खराब होती है, उसे किस तरह सुधारना है."

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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री आज़म खान ने हाल में ही शंकराचार्य अधोक्षजानंद को एक गाय लौटाई है, जो उन्होंने करीब डेढ़ साल पहले आज़म ख़ान को दी थी.

आज़म खान ने गाय लौटाने का फ़ैसला राजस्थान में कथित गोरक्षकों की ओर से कुछ मुसलमानों पर हुए हमले के बाद लिया.

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इसे लेकर शंकराचार्य कहते हैं, "उन्होंने हमें एक दो पन्ने का पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने कहा है कि आपकी ओर से दी गई गाय मुझे मजबूरी में वापस करनी पड़ रही है. राजस्थान में गाय ले जाने वाले मुसलमानों को कुछ कथित गोरक्षकों की ओर से नुक़सान पहुंचाया गया, उसे लेकर पत्र में उन्होंने चिंता दर्शायी है और भय भी दर्शाया है."

शंकराचार्य अधोक्षजानंद बताते हैं कि आज़म खान को ये गाय साल 2013 में इलाहाबाद में आयोजित कुंभ की बेहतर व्यवस्था करने के लिए दी गई थी.

शंकराचार्य का दावा है कि आज़म खान खुद भी काली गाय की सेवा करना चाहते थे.

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हालांकि, शंकराचार्य कहते हैं कि वो आज़म ख़ान के गाय लौटाने के फ़ैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते.

उन्होंने कहा, "मैं ये ज़रूर चाहूंगा कि देश में अमन-शांति बनी रहे. सांप्रदायिक सद्भाव कायम रहे. एक दूसरे के जो आस्था केंद्र हैं उनका सम्मान सब लोग करें."

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शंकराचार्य अधोक्षजानंद कहते हैं कि सरकार को क़ानून बनाकर गायों की रक्षा करनी चाहिए.

उन्होंने कहा, "एक क़ानूनी लाइन बन जाए कि देश के अंदर गाय को नुक़सान पहुंचाने वाले को फांसी की सज़ा है. जब ये क़ानून बन जाएगा तो इस पर किसी प्रकार की ग़फलतखोरी करने का हकट न गोभक्तों और न गोकशी करने वालों को होगा. इसकी गुंजाइश भी नहीं होगी."

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