नज़रिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार गुजरात क्यों जाते हैं ?

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गुजरात में भारतीय जनता पार्टी 1998 से सत्ता में है. पार्टी लगातार चार विधानसभा चुनाव जीत चुकी है.

क्या भारतीय जनता पार्टी को इस बार गुजरात में अपनी जीत का भरोसा नहीं है.

बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी ने इसी मसले पर अहमदाबाद के वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार मिश्र से बात की.

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राजेंद्र कुमार मिश्र की राय

मोदी के बार-बार गुजरात जाने के दो-तीन कारण हैं. एक तो ये कि मोदी खुद यहां लंबे अरसे तक रहे. और वे यहां एक ऐसे वट वृक्ष की तरह थे जिसके नीचे कोई चीज़ उगी नहीं.

इसलिए 2014 में उनके दिल्ली चले जाने के बाद जो लीडरशिप यहां पनपनी चाहिए थी, वो हो नहीं पाया और गुजरात में एक वैक्यूम जैसी स्थिति देखने को मिली.

सरकार चलाने की मोदी की शैली के कारण ये वैक्यूम बना है. मोदी के दिल्ली जाने के बाद उनकी करीबी सहयोगी आनंदी बेन पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया.

लेकिन भारतीय जनता पार्टी की आंतरिक कलह और नौजवानों के विरोध में खड़े हो जाने से चीजें बदल गईं.

इसके पीछे कई कारण थे. बड़े-बड़े वादे, बड़ी-बड़ी बातें की गई थीं. शिक्षा का निजीकरण किया गया.

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बीजेपी की समस्या

लेकिन प्राइवेट स्कूल-कॉलेजों में बहुत ज्यादा पैसा खर्च करके नौजवान जब डिग्री लेकर बाहर निकले तो उनके सामने नौकरी की समस्या थी.

पाटीदारों के आंदोलन की मुख्य वजह यही थी. इसके अलावा पिछले तबकों में कुछ असंतोष रहा और बाद में दलितों का मामला भी उठ खड़ा हुआ.

इन्हीं वजहों से आनंदी बेन पटेल की सत्ता गई. और उनकी जगह गुजरात में विजय रूपानी मुख्यमंत्री के तौर पर लाए गए.

कुल मिलाकर देखा जाए तो अलग-अलग समूहों में असंतोष का माहौल देखा गया है और गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की समस्या भी यही है.

( अगला विधानसभा चुनाव इस साल के आखिर में होने वाला है. ऐसी चर्चा है कि ये चुनाव उससे पहले भी हो सकता है. बीते नौ महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये आठवां गुजरात दौरा है. )

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