11 साल के अगस्त्य ने पास की 12वीं, कैसे?

  • 18 अप्रैल 2017

वो कहते हैं न...पूत के पांव पालने में दिखाई दे जाते हैं .हैदराबाद में रहने वाले 11 साल के अगस्त्य और उनकी बहन नैना जायसवाल पर ये कहावत फिट बैठती है.

अगस्त्य ने 11 साल की उम्र में 12वीं पास की है . उनकी बहन नैना ने भी सिर्फ 10 साल की उम्र में 12वीं पास कर ली थी.

अश्विनी और भाग्यलक्ष्मी जायसवाल के बेटे अगस्त्या अब बी. कॉम की पढ़ाई करना चाहते हैं और उसके बाद डॉक्टर बनने की ख्वाहिश रखते हैं.

बच्चों ने दिखाया कमाल

साल 2008 में अश्विनी ने अपना स्कूल बंद करके अपना पूरा समय बच्चों को देना शुरू कर दिया.

अश्विनी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "महात्मा गांधी ने बताया है कि किसी भी बच्चे की पहली शिक्षक उसकी मां होती है, हम इसी रास्ते पर चलना चाहते थे. क्योंकि, एक मां और बच्चे के बीच जो भावनात्मक रिश्ता होता है वह किसी अन्य रिश्ते में नहीं होता."

Image caption परिवार के साथ अगस्त्या जायसवाल

कैसे हुआ ये करिश्मा?

अश्विनी और भाग्यलक्ष्मी ने अपने दोनों बच्चों को स्कूली शिक्षा देने की जगह खुद से घर पर पढ़ाने का फैसला किया.

भाग्यलक्ष्मी ने अपने दोनों बच्चों नैना और अगस्त्य के लिए पढ़ाई को खेल की तरह रोचक बनाने पर काम किया. वहीं, अश्विनी ने उन्हें गोद में खेलते वक्त ही हैंडराइटिंग और क्रिएटिव स्किल्स सिखाना शुरू किए.

उद्देश्य बस एक था कि दोनों बच्चों को डिग्री की तरफ भागने की बजाए ज्ञान अर्जन करने के लिए प्रेरित करना था.

अश्विनी कहते हैं, "मुझे नहीं लगा कि ये ठीक होगा कि दो से ढाई साल के बच्चों को प्लेस्कूल भेज दिया जाए क्योंकि बच्चे ग्रुप में नहीं सीखते. बच्चों में सीखने की लगन पैदा करना संभव नहीं है."

5 साल की उम्र में गीता-रामायण का ज्ञान

अश्विनी ने 5 साल की उम्र में पहुंचने पर दोनों बच्चों को मातृ-भाषा हिंदी समेत गीता और रामायण के श्लोक सिखाए.

अगस्त्य के पिता अश्विनी कहते हैं, "वर्णमाला से जुड़े सभी टेस्ट्स को पास करने के बाद हमनें बच्चों को अखबार पढ़ने के लिए दिया. फिर, उन्हें गीता और महाभारत के श्लोक पढ़ाए जिससे उनका उच्चारण बेहतर हो सके. इसके बाद 6 महीनों में उन्होंने हिंदी सीख ली. इसके बाद हमनें उन्हें तेलंगाना की आधिकारिक भाषा तेलगु पढ़ाना शुरू किया. इसके 6 महीनों बाद विज्ञान, सामाजिक अध्ययन और गणित जैसे विषयों के लिए एक-एक साल दिया."

इसके बाद उन्होंने नजदीकी स्कूल में बच्चों का नाम लिखवाया जहां ये बताया गया कि बच्चों को घर में पढ़ाया जा रहा है. स्कूल भी बच्चों के घर में पढ़ने पर राजी हो गया.

पर क्या अगस्त्य और नैना आम बच्चों की तरह अपनी उम्र के बच्चों से मेलजोल के अभाव में नहीं जी रहे?

इस सवाल पर अश्विनी ने कहा कि दोनों बच्चें उन बच्चों के साथ मिलते-जुलते हैं जो उनसे पढ़ने आते हैं और फिटनेस ट्रेनिंग के दौरान भी वे अपने दोस्तों से मिलते हैं.

आईएएस का सपना

अगस्त्य के 12वीं पास कर लेने के बाद अब अश्विनी अपनी बेटी पर फोकस कर सकते हैं.

17 साल की नैना ने पीएचडी की पढ़ाई शुरू कर दी है. यही नहीं, नैना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर टेबल टेनिस खेल में भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं. अब उनके पिता नैना को भारत की ओलंपिक टीम में प्रवेश लेने के लिए तैयार कर रहे हैं.

अश्विनी कहते हैं कि अब वह नैना को सिविल सर्विसेज़ के साथ-साथ ओलंपिक टीम के लिए भी तैयार करना चाहते हैं.

डॉक्टर बनना चाहते हैं अगस्त्य

अगस्त्य ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि अब वह पत्रकारिता में बीए करना चाहते हैं लेकिन उनका लक्ष्य डॉक्टर बनना है.

पर पत्रकारिता की पढ़ाई करके डॉक्टर कैसे बने सकते हैं?

अगस्त्य ने इसके जवाब में कहा, "मैं या तो बीए करूँगा या बी. कॉम और मेडिसिन की पढ़ाई. मैं और मेरी बहन डिग्रियों के लिए नहीं बल्कि ज्ञान के लिए पढ़ाई करते हैं. "

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