'वीडियो पोस्ट करने, नौकरी जाने का ग़म नहीं'

  • 21 अप्रैल 2017

फ़ेसबुक पर ख़राब खाने की शिकायत का मुद्दा उठाने वाले सीमा सुरक्षा बल के बर्ख़ास्त जवान तेज बहादुर सिंह अपने घर रेवाड़ी लौट आए हैं.

बीबीसी के फेसबुक लाइव में उन्होंने अपनी बर्ख़ास्तगी के बारे में कहा कि जांच में उनकी तरफ से कोई गवाह नहीं था.

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उन्होंने बीबीसी को बताया, "फ़ोर्स का कोर्ट साइलेंट कोर्ट होता है, इसमें उनके विटनेस होते हैं, लेकिन जवान के विटनेस के लिए काफ़ी मुश्किल होती है. उन्होंने अनुशासनहीता का मामला बताया, जबकि मैं साबित कर सकता हूं कि जो खाना दिखाया गया था, वही खाना जवानों को खिलाया जा रहा था. लेकिन फिर भी अनुशासनहीनता का केस बनाकर मुझे बर्ख़ास्त कर दिया गया."

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तेज बहादुर का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो डालने से पहले 23 नवंबर को रजिस्ट्री से डायरेक्टर जनरल के के शर्मा, गृहमंत्रालय, पीएमओ और मानवाधिकार आयोग को चिट्टी लिखकर मामले की शिकायत की थी.

लेकिन जब कोई जवाब नहीं आया तो मजबूर होकर उन्होंने वीडियो सोशल मीडिया पर डाला.

जवानों के कैंपों में आने वाले राशन पर तेज बहादुर का कहना है, "सरकार से राशन ख़ूब आता है और इसके मेरे पास रिकॉर्ड भी हैं कि क्या आया और क्या राशन नहीं मिला, वो राशन कहां गया. इसके लिए सिस्टम है, लेकिन ये सिस्टम टाइट टू टाइम सिर्फ़ काग़जों में मेंटेन किया जाता है, लेकिन ग्राउंड पर इसका उल्टा होता है."

तेज बहादुर ने बीबीसी के फ़ेसबुक लाइव में संवाददाता सलमान रावी को बताया, "मुझे बर्ख़ास्त करने का मक़सद है जवानों को मैसेज देना कि अपने अफसरों के ख़िलाफ़ आप आवाज़ उठाओगे तो जैसे तेज बहादुर को बर्ख़ास्त किया, आपके साथ भी यही किया जाएगा. वैसे नियमों के तहत ऐसे किसी जवान को बर्ख़ास्त नहीं किया जा सकता."

जिस वीडियो की वजह से तेज बहादुर की नौकरी चली गई क्या अब उस सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने को लेकर उन्हें पछतावा है?

इसके जवाब में तेज बहादुर ने कहा, "पछतावा तो नहीं है. इसलिए नहीं है क्योंकि जैसे ही मैंने ये वीडियो डाला, उसके बाद बहुत से भ्रष्ट अधिकारियों के तबादले भी हुए हैं, खाने में 70 प्रतिशत सुधार हुआ है, उससे मुझे ख़ुशी भी बहुत है. मेरी तो कोई बात नहीं, वीआरएस नहीं हुआ मुझे बर्खास्त कर दिया, लेकिन न्यायालय से तो मैं वो ले ही लूंगा. लेकिन जो साथी जवान हैं उनका तो भला हुआ है."

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तेज बहादुर का कहना है कि 21 साल की नौकरी में उन्होंने कई बार आवाज़ उठाई है, एक बार पहले भी उनके ख़िलाफ़ जांच बैठाई गई थी, लेकिन इस बार उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया.

तेज बहादुर कहते हैं, "मुझे इस बात का दुख है कि मुझे बर्ख़ास्त किया गया लेकिन किसी अफ़सर के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई, यहां तक कि जांच भी उन्हीं अफ़सरों से कराई गई जो वहां पर मौजूद थे. जबकि मैंने कहा था कि बाहर के अधिकारियों को बुलाया जाए. लेकिन वो भी नहीं किया गया."

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