ये हैं ओडिशा में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वाले

  • 22 अप्रैल 2017
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पहले भद्रक और फिर केंद्रापड़ा. पिछले 15 दिन में इन दो शहरों में फैले सांप्रदायिक तनाव से आम तौर पर आपसी भाईचारे वाले राज्य के रूप में मशहूर ओड़िशा सकते में आ गया है.

हालाँकि इन दोनों जगह किसी की जान नहीं गई. लेकिन इससे 1991 में भद्रक में हुई भीषण सांप्रदायिक हिंसा याद ज़रूर ताज़ा हो गई.

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भद्रक और केंद्रापड़ा ओडिशा के उन चंद शहरों में हैं, जहां मुसलमान बड़ी संख्या में रहते हैं. भद्रक में मुसलामानों की संख्या क़रीब 50 फ़ीसद और केंद्रापाड़ा में क़रीब 30 फीसद है.

सोशल मीडिया का इस्तेमाल

ऐसे में इन शहरों में दोनों संप्रदायों में तनाव पैदा करना सांप्रदायिक तत्वों के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है.

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दोनों ही शहरों में हिंसा भड़काने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया. भद्रक में जहां हिंदू देवा देवियों की खिलाफ आपत्तिजनक टिपण्णी से हिंसा भड़की वहीँ केंद्रापड़ा में पैगंबर के खिलाफ टिपण्णी से.

केंद्रापड़ा में प्रशासन और पुलिस की ओर से समय पर की गई कार्रवाई से स्थिति पर तत्काल काबू पा लिया गया. वहीं भद्रक में प्रशासन की नाकामी के कारण हिंसा भड़क उठी. इसमें करोड़ों का नुकसान हुआ.

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भद्रक के निवासी और नाबार्ड के सेवानिवृत्त अधिकारी सरल दास कहते हैं, ''भद्रक मुग़ल के ज़माने से भाईचारे का शहर रहा है. लेकिन कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए तनाव पैदा करते हैं. इस बार भी ऐसा ही हुआ."

दंगों में भूमिका

भद्रक में हिंसा के लिए बीजू जनता दल (बीजद) के स्थानीय विधायक युगल किशोर पटनायक और उनके बेटे पर उंगलियां उठीं हैं जबकि बीजद के काउंसिलर शुभंकर महापात्र को गिरफ़्तार किया गया है.

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सांप्रदायिक तनाव पैदा करने में बीजद नेताओं की कथित भूमिका के सवाल पर पार्टी के नेता तेजेश्वर परिदा ने इसका सीधा जवाब नहीं दिया. लेकिन कहा कि जांच में अगर इसमें किसी के हाथ होने के बारे में पता चलता है, चाहे वह नेता हो या अफसर तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा.

भाजपा का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय पार्टी उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों की तरह ओडिशा में भी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है.

वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता सज्जन शर्मा ने बीबीसी से कहा,"किसी भी सांप्रदायिक घटना के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराना गैर भाजपा पार्टियों की पुरानी आदत है. लेकिन भद्रक में स्पष्ट हो गया कि स्थानीय बीजद विधायक और उनके परिवार वालों ने ही हिंसा भड़काई. भाजपा को बदनाम करने की यह एक सोची, समझी साजिश है."

ध्रुवीकरण की तैयारी

लेकिन केंद्रापड़ा के निवासी और स्थानीय पत्रकार मनोज कर मानते हैं कि भाजपा के सहयोगी संगठन पिछले कई दिनों से शहर में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश में जुटे हैं.

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वो कहते हैं, "हाल ही में महावीर जयंती के दिन शहर में एक विशाल रैली निकाली गई. वैसे इस अवसर पर शहर में रैली हर साल निकलती है. लेकिन इस बार जैसा आयोजन पहले कभी नहीं देखा गया. आप जानते हैं कि इस तरह की रैलियां कई बार सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के लिए काफी होती हैं. इसे खुशकिस्मती कहा जान चाहिए की ऐसा कुछ हुआ नहीं. पिछले शुक्रवार को भी सांप्रदायिक आग भड़काने की कोशिश हुई. लेकिन प्रशासन की मुस्तैदी कारण स्थति पर जल्द ही काबू पा लिया गया."

सवाल यह उठता है कि प्रशासन ने इस प्रकार की चुस्ती भद्रक में क्यों नहीं दिखाई?

प्रशासन की ग़लती

केंद्रापड़ा से मोर्चा संभल रहे केंद्रांचल के आईजी सौमेंद्र प्रियदर्शी का कहना थ, "हर जगह प्रशासन अपनी सूझ बुझ के अनुसार काम करता है. अगर भद्रक में प्रशासन से कोई चूक हुई है तो यह जांच के दौरान ज़रूर पता चलेगा और उचित करवाई होगी."

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भद्रक में प्रशासन से गलती हुई है इस बात को खुद सरकार ने एक तरह से उसी समय स्वीकार कर लिया था जब घटना के तत्काल बाद वहाँ के एसपी दिलीप दास को हटाकर उनके स्थान पर पड़ोसी जाजपुर ज़िले के एसपी अनूप साहू को नियुक्ति दी गई.

कंधमाल के अपवाद को छोड़ दिया जाए तो ओडिशा हमेशा सांप्रदायिक सद्भाव का राज्य रहा है.

जगन्नाथ संस्कृति की महान परंपरा के कारण जाति और धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश यहां कभी कामयाब नहीं हुई. लेकिन प्रेक्षकों का मानना है कि 2019 के चुनाव को देखते हुए सांप्रदायिक तनाव को हवा देने की कोशिश आगे भी जारी रहेगी.

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