कश्मीरी मीडिया: 'छात्र क्लास में जाएं और पुलिस उनसे दूर रहे'

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भारत प्रशासित कश्मीर के तमाम अख़बार, छात्रों और सैन्य बलों के बीच ताज़ा मुठभेड़ पर गंभीर चिंता जता रहे हैं और मोदी सरकार से अपील कर रहे हैं कि वो पाकिस्तान समेत 'सभी पक्षों' से बातचीत करे.

सोमवार को श्रीनगर के लाल चौक में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प में एक वरिष्ठ अधिकारी और दो छात्राएं घायल हो गई थीं.

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राज्य भर में हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों के मद्देनज़र एक सप्ताह के लिए स्कूल और कॉलेज बंद भी कर दिए गए थे.

कई कश्मीरी अख़बारों ने लिखा, "छात्र क्लास में जाएं और पुलिस उनसे दूर रहे."

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अंग्रेज़ी अख़बार 'डेली राइज़िंग' कश्मीर ने लिखा, "छात्रों के विरोध प्रदर्शन से दहला कश्मीर."

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अख़बार के मुताबिक़, "छात्र चुपचाप क्लास में जाएं और पुलिस इनके कॉलेज से दूर रहे, क्योंकि उनकी उपस्थिति मात्र से ही तनाव पैदा हो जाता है. दोनों ही पक्ष संयम बरतें."

जम्मू के अंग्रेज़ी अख़बार 'अर्ली टाइम्स' ने लिखा, "कश्मीर में हो रही गड़बड़ी के लिए पाकिस्तानी एजेंट्स, अलगाववादी और देशद्रोही तत्व ज़िम्मेदार हैं."

कई अख़बारों ने राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के इस बयान को पहले पन्ने पर जगह दी जिसमें उन्होंने कहा कि ये मसला राजनीतिक है और इसका राजनीतिक हल ही निकल सकता है.

अख़बार 'ग्रेटर कश्मीर' ने लिखा, "पिछले ढाई दशकों से केंद्र सरकार इस राजनीतिक समस्या को सैन्य नज़रिए से देख रही है. इस नज़रिए ने स्थिति को और ख़राब कर दिया है."

कई अख़बारों ने पीडीपी-भाजपा की गठबंधन सरकार को राज्य के ख़राब हालात के लिए ज़िम्मेदार ठहराया और इसे 'नाकाम गठबंधन' क़रार दिया.

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कुछ अख़बारों ने राज्य में राज्यपाल शासन लगाने की वकालत की तो वहीं 'कश्मीर ऑब्ज़र्वर' नाम के एक पेपर की हेडलाइन थी, "राज्यपाल शासन समस्या का समाधान नहीं."

पेपर ने लिखा, "केंद्र सरकार ने कश्मीर समस्या को हमेशा सेना के इस्तेमाल के ज़रिए ही सुलझाना चाहा. इससे हालात और बिगड़े हैं. कश्मीर समस्या का हल किसी गठबंधन के होने या ना होने पर निर्भर नहीं करता बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या के हल के लिए गंभीरतापूर्वक सोचा जा रहा है या नहीं."

उदारवादी समझे जाने वाले अंग्रेज़ी अख़बार 'स्टेट टाइम्स' ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के फ़ारुख़ अब्दुल्लाह के उस बयान को प्रमुखता दी है जिनमें उन्होंने सरकार से पाकिस्तान समेत हर पक्ष से बातचीत की अपील की है.

उर्दू अख़बार 'रोशनी' ने भी कहा कि समस्या का हल सिर्फ़ बातचीत से मुमकिन है.

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