अमित शाह की निगाहें अब पश्चिम बंगाल पर...

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उत्तर प्रदेश में मिली भारी कामयाबी और पूर्वोत्तर में मणिपुर में सरकार बनाने के बाद भाजपा की निगाहें अब पश्चिम बंगाल पर हैं.

अगले कुछ महीनों में तीन बड़े राज्यों गुजरात, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

भाजपा उन प्रदेशों भी सरकार बनाने के लिए अपना पूरा जोर लगा रही है जहां उसकी सरकार कभी नहीं रही.

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह यहां लगातार दौरे कर रहे हैं और अभी भी वो तीन दिवसीय दौरे पर यहीं हैं.

हाल में पश्चिम बंगाल की कांथी दक्षिण विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव के नतीजों से बीजेपी के हौसले बुलंद हैं और वहां अभी से वो आक्रामक तरीक़े से प्रचार में जुट गई है.

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बंगाल पर ज़ोर

उमा भारती जैसे नेताओं ने तो अगले विधानसभा चुनावों के बाद यहां बहुमत के साथ सरकार बनाने का भी दावा कर दिया है.

फ़िलहाल भाजपा नेतृत्व की निगाहें अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों और साल 2019 के लोकसभा चुनावों पर है.

वैसे, पार्टी के नेता मानते हैं कि सांगठनिक कमजोरी की वजह से पंचायत चुनावों में फ़िलहाल तृणमूल को मात देना मुश्किल है.

लेकिन सही रणनीति के साथ आगे बढ़ने पर लोकसभा में मौजूदा सीटों की तादाद को दो से बढ़ा कर दो अंकों तक तो पहुंचाया ही जा सकता है.

इसके लिए भाजपा ने धुव्रीकरण की राजनीति करने वाली पार्टी की अपनी छवि तोड़ कर मोदी के विकास कार्यों के प्रचार के साथ ही ममता बनर्जी सरकार के कथित भ्रष्टाचार और अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की उनकी नीति को निशाना बनाने की रणनीति तैयार की है.

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भाजपा की ज़मीन

अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों से पहले भाजपा की ज़मीन मजबूत करने की क़वायद के तहत पार्टी ने पूरे राज्य में 10 हजार कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारने का फैसला किया है.

भाजपा यहां शारदा चिटफंड घोटाला और नारदा न्यूज स्टिंग वीडियो को भी अपने प्रचार का हथियार बनाएगी.

कांथी सीट पर भाजपा भले ही वाममोर्चा और कांग्रेस को पछाड़ कर नंबर दो पर आ गई हो, यह उसके नेताओं को भी पता है कि उसे वाममोर्चा और कांग्रेस के वोट ही मिले हैं.

तमाम कोशिशों के बावजूद वह ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध नहीं लगा सकी है.

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संघ भी साथ है

प्रदेश भाजपा के एक नेता मानते हैं कि तृणमूल के वोट बैंक में सेंध लगाए बिना यहां उसका (तृणमूल कांग्रेस का) विकल्प बनना मुश्किल है.

यही वजह है कि अब खासकर ग्रामीण इलाकों में संगठन को मजबूत करने के लिए पार्टी संघ परिवार से जुड़े संगठनों का सहारा ले रही है.

इस साल रामनवमी के मौके पर राज्य भर में दो सौ ज्यादा रैलियां कर संघ ने अपने इरादे जता दिए हैं.

भाजपा ने संघ परिवार के इन कार्यक्रमों का समर्थन किया है.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, "रामनवमी के मौके पर आयोजित कार्यक्रमों को पार्टी का समर्थन हासिल था. इससे राष्ट्रविरोधी ताकतों व वोट बैंक की राजनीति के ख़िलाफ़ लोगों को एकजुट करने में सहायता मिलेगी."

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Image caption भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष

बूथ स्तर की रणनीति

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा भी दावा करते हैं कि अगले साल होने वाले ग्राम पंचायत चुनावों में उनकी पार्टी ही तृणमूल कांग्रेस के एकमात्र विकल्प के तौर पर उभरेगी.

वो कहते हैं, "वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा के केंद्र की सत्ता में आने के बाद देश के विभिन्न राज्यों में हुए चुनावों में आम लोगों ने नरेंद्र मोदी सरकार की ईमानदारी और सुशासन पर ही भरोसा जताया है."

वे तृणमूल कांग्रेस पर आज़ादी के बाद राज्य की सबसे भ्रष्ट सरकार चलाने का आरोप लगाते हैं.

भुवनेश्वर में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अगले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ओडिशा के अलावा बंगाल में संगठन को मजबूत करने की भावी रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया.

इसी रणनीति के तहत पार्टी प्रमुख अमित शाह 25 अप्रैल से राज्य के तीन-दिवसीय दौरे पर हैं. उनकी रणनीति बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को खड़ा करने की है.

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धुव्रीकरण की राजनीति

भाजपा नेतृत्व का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस यहां पार्टी पर धुव्रीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाती रही है. इस छवि को तोड़ने के लिए ज़मीनी स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाना जरूरी है.

प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, "पार्टी विकास का वैकल्पिक मॉडल भी आम लोगों के सामने रखेगी."

राहुल सिन्हा कहते हैं, "ममता बंगाल में अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की राजनीति पर आगे बढ़ा रही हैं. ममता और तृणमूल कांग्रेस के चेहरे से इस नकाब को हटाना जरूरी है."

पार्टी ने इसके साथ ही मोदी सरकार के तीन साल के कामकाज के दौरान होने वाले विकास को भी प्रचार का मुख्य मुद्दा बनाने का फैसला किया है.

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ग्रामीण इलाक़ों पर ज़ोर

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि सही रणनीति के साथ आगे बढ़ने पर कांथी दक्षिण सीट के नतीजे बंगाल में हर सीट पर दोहराए जा सकते हैं. भाजपा फिलहाल ग्रामीण इलाकों में अपने पांव पसारने में जुटी है.

उसका तात्कालिक लक्ष्य अगले साल होने वाले ग्राम पंचायत चुनाव हैं. उसके बाद ही लोकसभा चुनाव भी सिर पर होंगे. इसलिए वह पूरे राज्य में संगठन को मजबूत करने की कवायद में जुटी है.

भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय कहते हैं, "राज्य में ममता बनर्जी सरकार की तुष्टिकरण की नीति अब सीमा पार कर गई है. आम लोगों का इस सरकार से मोहभंग हो गया है और वे अब बदलाव चाहते हैं."

भाजपा महिला मोर्चा की प्रमुख रूपा गांगुली कहती हैं, "राज्य के लोग तृणमूल कांग्रेस का विकल्प तलाश रहे हैं. भाजपा उनको यह विकल्प मुहैया कराएगी."

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हाल में कोलकाता के दौरे पर आईं केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने तो दावा किया कि भाजपा हरियाणा और असम की तरह यहां भी अगला विधानसभा चुनाव जीत कर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी.

उनका कहना था कि उन दोनों राज्यों में भी कभी पार्टी के एक या दो विधायक ही चुने जाते थे.

भाजपा के दावों में कितना दम है, यह तो भविष्य ही बताएगा.

लेकिन फ़िलहाल तृणमूल कांग्रेस के विकल्प के तौर पर उभरने की कवायद में वह संघ परिवार के साथ मिल कर अपने तरकश के तमाम तीरों को चलाने के लिए कमर कसती नज़र आ रही है.

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