लोगों को कब तक आशियाना दिला पाएंगे योगी?

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को नोएडा एक्सटेंशन (ग्रेटर नोएडा वेस्ट) में अपने फ्लैट के लिए परेशान लोगों से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनकी समस्याएं दूर की जाएंगी.

ख़रीददारों के अलग-अलग एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद उन्होंने ये आश्वासन दिया.

नोएडा एक्सटेंशन, दिल्ली से सटे गौतम बुद्ध नगर ज़िले के पश्चिमी हिस्से में 16 गांवों की जमीन को अधिग्रहित करके रिहायशी इलाके के तौर पर विकसित करने की परियोजना है, जिसमें 2010 के बाद से ही काम चल रहा है.

पहले किसानों के विरोध और बाद में प्रोजेक्ट बिल्डरों की कथित मनमानी की वजह से यहां फ्लैट बुक करने वाले लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं.

मोटे तौर पर नोएडा एक्सटेंशन में 58 बिल्डरों के रिहायशी प्रोजेक्ट चल रहे हैं और तीन लाख से भी ज़्यादा लोगों ने इन प्रोजेक्टों में फ्लैट बुक कराया है.

ज़्यादातर लोगों ने 2012 से पहले फ्लैट बुक कराए हैं, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी उन्हें अपना फ्लैट नहीं मिल पाया है.

नोएडा के स्थानीय विधायक पंकज सिंह ने बीबीसी से कहा, "लोग सालों से परेशान हैं. 90 फीसदी तक पैसा दे चुके हैं, फ्लैट नहीं मिल रहा है. मुख्यमंत्री ने समस्याओं को सुनने के बाद कहा है कि किसी ख़रीददार के कोई नाइंसाफ़ी नहीं होगी."

नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक कुमार कहते हैं, "हमें भरोसा दिलाया गया कि जल्द जल्द से फ्लैट मिलें इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं."

नोएडा में फ्लैट बुक कराने वाले लोगों की एक दूसरी संस्था नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स एंड मेंबर्स के अध्यक्ष अन्नू ख़ान ने बताया, "पांच-पांच साल से बिल्डर हमें हमारे फ्लैट नहीं दे रहा है, हम पैसे दे चुके हैं. लेकिन फ्लैट तय समय में तैयार नहीं है. कोई हमारी समस्या पर ध्यान भी नहीं देता था, अब कुछ उम्मीद जगी है."

पंकज सिंह ने बताया, मामले में मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव आलोक सिन्हा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ अमित मोहन को स्पष्ट आदेश दिया है कि इस मामले में बिल्डरों के साथ बैठक करके जल्द से जल्द ख़रीददारों को फ्लैट दिलाने का काम करें.

नोएडा एक्सटेंशन में एक प्रोजेक्ट में अपना फ्लैट बुक करने वाली नीतू गर्ग कहती हैं, "हमने अपने फ्लैट का पूरा भुगतान कर दिया है. एक साल का एडवांस मैंटिनेंस भी जमा करा दिया है. लेकिन बीते चार महीने से बिल्डर रजिस्ट्री के नाम पर टाल रहा है. अभी तक सोसायटी में पानी और बिजली की व्यवस्था भी नहीं हो सकी है."

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किसी ख़रीददार को शिकायत है कि बना हुआ फ्लैट, वादे किए गए नक्शे के मुताबिक नहीं है, किसी को शिकायत है कि फ्लैट की फिनिशिंग ठीक नहीं है को कई को इस बात की शिकायत है कि जितना वादा किया था उससे छोटा फ़्लैट मिला.

ऐसी तमाम शिकायतों के बीच सबसे बड़ी शिकायत ये है कि फ्लैट का पूरा पैसा चुकाने के बाद भी लोगों को कई महीनों से बिल्डरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें फ्लैट का स्वामित्व नहीं मिला है.

और ये हाल केवल नोएडा एक्सेटेंशन का नही हैं. नोएडा के दूसरे हिस्सों में बनने वाले प्रोजेक्टों का भी यही हाल है. नोएडा एक्सप्रेस वे और यमुना एक्सप्रेस वे पर कई विकसित हो रहे प्रोजेक्ट पर काम काफी देरी से चल रहा है.

नोएडा में ही बन रहे जेपी विश टाउन में दर्जनों प्रोजेक्ट सालों से अटके हुए हैं. इन टाउनशिप में एक फ्लैट बुक कराने वाली सुप्रिया राजे बताती हैं कि 2011 में बुकिंग कराने और 2013 तक 95 फ़ीसदी पैसा देने के बाद भी वो फ्लैट का इंतजार कर रही हैं.

वहीं बिल्डरों की शिकायत है कि किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने और नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में कथित भ्रष्टाचार की वजह से उन्हें भी ख़ासी परेशानियां जेलनी पड़ी हैं.

नोएडा एक्सटेंशन के एक प्रोजेक्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर का दावा है कि यहां बेहद सस्ती दर पर फ़्लैट मिल रहे हैं लेकिन लोग कम पैसे देकर भी सुविधाएं सारी चाहते हैं.

नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के पास भी इन बिल्डरों ने पैसे जमाए नहीं कराए हैं. मोटे अनुमान के तौर पर नोएडा- ग्रेटर नोएडा- यमुना एक्सप्रेस वे पर प्रोजेक्ट बना रहे बिल्डरों पर अब तक सरकार का 25 हज़ार करोड़ रुपया बकाया है.

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