जोश में भाजपा, पर नवीन पटनायक को हराना आसान नहीं

  • 30 अप्रैल 2017
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हाल ही में भुवनेश्वर में समाप्त हुई भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिन की बैठक के बाद पार्टी के राज्य कार्यकर्ता काफी उत्साहित हैं और अभी से 2019 में राज्य में होनेवाले विधानसभा चुनाव में सत्ता में आने की बातें कर रहे हैं.

बैठक के दौरान ही यह स्पष्ट हो गया था कि भाजपा के लिए ओडिशा उन चंद राज्यों में है जहां पार्टी को लगता है कि वह सत्ता में आ सकती है.

देश भर में पार्टी के विस्तार की योजना में ओडिशा कितना महत्वपूर्ण है इस बात का अंदाजा सोमवार को एक बार फिर मिला जब राज्यशाखा की ओर से यह घोषणा की गई कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अगले चार महीनों में दो चरणों में छह दिन राज्य में बिताएंगे.

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पहले जून 22 से 24 और फिर अगस्त 8 से 10 तक शाह ओडिशा में रहेंगे और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं से मिलकर पार्टी संगठन को मज़बूत बनाने के लिए योजना प्रस्तुत करेंगे. लेकिन राज्य में बीजद को हराकर सत्ता में आने की अपनी मुहिम में वह कौन से मुद्दे हैं जिस पर भाजपा अपना ध्यान केंद्रित करेगी?

इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ भाजपा नेता और पार्टी के प्रवक्ता सज्जन शर्मा का कहना था, "मुद्दे तो वैसे कई हैं. लेकिन हम सबसे अधिक जोर राज्य में पार्टी के संगठन को मज़बूत बनाने में लगाएंगे. पिछले तीन सालों में सांगठनिक स्तर में जो काम हुआ, उसका फ़ायदा हमें पंचायत चुनाव में मिला. आनेवाले दिनों में हम उन इलाकों पर ध्यान देंगे जहाँ हमें उतनी सफलता नहीं मिली."

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शर्मा ने कहा कि पार्टी केंद्र सरकार की उन योजनाओं के बारे में लोगों को बताएगी जिनसे ओडिशा को विशेष फ़ायदा होगा. इस सन्दर्भ में उन्होंने 14वें वित्त कमीशन के फॉर्मूले और जीएसटी का विशेष रूप से उल्लेख किया.

उन्होंने कहा, "14वें वित्त कमीशन से राज्य को मिलनेवाली राशि 22 हज़ार करोड़ से बढ़कर 63 हज़ार करोड़ तक पहुँच गई है. इसी तरह ओडिशा चूँकि एक 'कंज्यूमिंग' राज्य है, जीएसटी के लागू होने से राज्य को काफ़ी फ़ायदा होनेवाला है."

शर्मा ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक मर्यादा देने की घोषणा का भी जिक्र किया और कहा कि इससे ओडिशा के 60 प्रतिशत लोगों को लाभ मिलेगा.

भाजपा क्यों हो रही है मज़बूत?

लेकिन क्या ऐसा कर भाजपा जातिवाद को बढ़ावा नहीं दे रही जिसके लिए उसने दूसरी पार्टियों को आड़े हाथों लेती रही है? उनका कहना था; "हमने जातिवाद की राजनीति कभी नहीं की. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि समाज का एक बड़ा तबका जो आर्थिक और सामजिक रूप से पिछड़ा हुआ है उसे ऊपर उठाने की कोशिश न की जाए."

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Image caption ओडिशा में बीजेपी के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी प्रवक्ता सज्जन शर्मा के मुताबिक पार्टी राज्य में संगठन को मज़बूत कर रही है

साम्प्रदायिकता फ़ैलाने के लिए भाजपा पर लग रहे आरोप पर शर्मा ने कहा, "हाल ही में भद्रक में जो हुआ, उससे स्पष्ट है की कौन साम्प्रदायिकता फैला रहा है. ख़ुद बीजद के सांसद ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया, जबकि सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के लिए पुलिस ने बीजद के एक काउंसलर को गिरफ़्तार किया है."

भाजपा नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार की सफलताओं के अलावा पार्टी राज्य में नवीन पटनायक की बीजद सरकार की विफलताओं पर भी मुहिम चलाएगी.

नवीन पर भ्रष्टाचार के आरोप

पार्टी के महासचिव युवा नेता भृगु बख्शीपात्र ने बीबीसी से कहा, "नवीन सरकार की 17 साल की सरकार में राज्य में विकास पूरी तरह से ठप हो गया है. राज्य का युवा वर्ग बेरोजगारी की मार से त्रस्त है. ऊपर से भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया है. 17 साल के शासन के बारे में दिखाने के लिए बीजद के पास कुछ भी नहीं है. नवीन सरकार की नाकामियां और भ्रष्टाचार के बारे में हम लोगों को आगाह करेंगे."

भाजपा के नेता और कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं इसमें कोई शक नहीं. लेकिन लोग इस बारे में क्या सोचते हैं? भुवनेश्वर में पान की दुकान चलानेवाले गौरहरि प्रधान कहते हैं, "भाजपा सत्ता में आएगी या नहीं, अभी से कहना मुश्किल है. लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं की अगले चुनाव में बीजद को भारी नुकसान होने वाला है."

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Image caption पार्टी के महासचिव और युवा नेता भृगु बख्शीपात्र दावा करते हैं कि राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है

लेकिन रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की भुवनेश्वर शाखा में करेंसी ट्रांसपोर्ट का ठेका ले रखे परीक्षित राउत मानते हैं कि 2019 में भाजपा ही सरकार बनाएगी.

वे कहते हैं; "बीजद और नवीन काफी तेज़ी से नीचे जा रहे हैं जबकि भाजपा और मोदी उतनी ही तेज़ी से ऊपर आ रहे हैं. बीजद में आपसी रंजिश काफी बढ़ गई है जो अगले चुनाव में पार्टी की हार का कारण बनेगी. नवीन पटनायक की छवि भी काफी धूमिल हुई है, जिसका खामियाज़ा बीजद को भुगतना पड़ेगा."

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2019 में चाहे कोई भी पार्टी चुनाव जीते, लेकिन इतना ज़रूर स्पष्ट है कि पिछले चुनाव के मुक़ाबले बीजद काफ़ी कमज़ोर हुई है.

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