मज़दूरों की हकीकत बयां करते चंद शेर

  • 1 मई 2017
इमेज कॉपीरइट Getty Images

'...गिरने से ज्यादा पीड़ादायी कुछ नहीं, मैंने कितने मज़दूरों को देखा है. इमारतों से गिरते हुए, गिरकर शहतूत बनते हुए.' - ईरानी कवि सबीर हका

एक मई यानी मज़दूर दिवस. 1886 में शिकागो के हेमार्केट बाज़ार में मज़दूर एक दिन में आठ घंटे काम को लेकर आंदोलन कर रहे थे और इस दौरान पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें कुछ मज़दूर मारे गए.

ये घटना एक मई की थी. इसके बाद इन मारे गए मज़दूरों की याद में एक मई को मज़दूर दिवस के रूप में मनाया जाने लगा.

मज़दूर दिवस पर पढ़िए मज़दूरों की हकीकत बयां करते कुछ शेर और कविताओं के अंश...

इमेज कॉपीरइट Getty Images
इमेज कॉपीरइट Getty Images
इमेज कॉपीरइट Getty Images
इमेज कॉपीरइट Getty Images
इमेज कॉपीरइट Getty Images
इमेज कॉपीरइट Getty Images
इमेज कॉपीरइट Getty Images
इमेज कॉपीरइट Getty Images
इमेज कॉपीरइट Getty Images
इमेज कॉपीरइट Getty Images

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे