भारत- उत्तर कोरिया में कितने का सालाना कारोबार?

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कुछ दिन पहले तक कुछ ही लोगों को ये मालूम होगा कि भारत, उत्तर कोरिया का संभवत तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है.

इसका पता भी तब चला जब अप्रैल के अंतिम सप्ताह में भारत के विदेशी व्यापार के महानिदेशक ने उत्तर कोरिया के साथ खाने पीने और दवाईयों के सिवाए सभी तरह के कारोबार पर पाबंदी लगा दी गई.

भारत की ओर से कहा गया है कि वो उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से लगाई पाबंदी के समर्थन में हैं.

पाबंदी लगाए जाने से पहले भारत और उत्तर कोरिया के बीच करोड़ों रुपया आपसी कारोबार था.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2014-2015 में भारत ने कोरिया को 7.65 करोड़ डॉलर का निर्यात किया था जबकि इसी दौरान भारत ने वहां से 13.25 करोड़ डॉलर मूल्य के सामानों का आयात भी किया था.

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भारत मुख्य तौर पर उत्तर कोरिया को खाद्य तेल, कपास, कपड़ा, खनिज अयस्क, ड्रग्स, रसायन, रत्न-आभूषण, धातु और मांस का निर्यात करता है.

कंज्यूमर प्रॉडक्ट की मांग

उत्तर कोरियाई सरकार भारत से ज़्यादा से ज़्यादा कंज्यूमर प्रॉडक्ट मंगाने में दिलचस्पी दिखाती रही है. लेकिन स्थापित बैंक और इंश्योरेंस सिस्टम के ज़रिए भुगतान की व्यवस्था नहीं होने और सीमित विदेशी मुद्रा के चलते दोनों देशों बीच कारोबार को मुश्किलों का सामना करना पड़ता रहा है.

संयुक्त राष्ट्र की ओर से उत्तर कोरिया पर आर्थिक पाबंदी लगाए जाने के बाद ज़्यादातर पश्चिमी देशों ने कारोबार पर पाबंदी लगा दी.

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हालांकि भारत सरकार ने बीते कई सालों से उत्तर कोरिया के साथ सीमित स्तर पर कूटनीतिक रिश्ता कायम रखा है, वो भी तब जब उत्तर कोरिया का पाकिस्तान से नज़दीकी रणनीतिक रिश्ते हैं.

हर तरह की पाबंदी

दो साल पहले, अप्रैल 2015 में, उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री री सु योंग ने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की थी. अपनी मुलाकात में उन्होंने कथित तौर पर भारत से अनुरोध किया था कि वे उत्तर कोरिया को 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' में शामिल करें.

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बीते दो दशक में ये पहला मौका था, जब दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल के बीच मुलाकात हुआ था. लेकिन भारत के विदेश व्यापार के महानिदेशक ने खाने पीने और दवाईयों के सिवाए सभी तरह के कारोबार पर पाबंदी लगाया है.

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जिन उत्पादों के कारोबार पर पाबंदी लगाई गई है, उनमें रक्षा संबंधी उपकरण, टैंक, सशस्त्र वाहन, सशस्त्र एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, मिसाइल और हल्के हथियार शामिल हैं.

कारोबार के अलावा भारत ने उत्तर कोरिया के लिए सभी तरह के ट्रेनिंग पर पाबंदी लगा दी है- पुलिस और मिलिट्री ट्रेनिंग, भौतिक विज्ञान, विमानिकी और आण्विक इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग इनमें शामिल हैं.

बीते सालों में उत्तर कोरियाई सेना के कई अधिकारी हर साल भारत के सैनिक सेंटरों पर प्रशिक्षण हासिल करने के लिए आते रहे हैं.

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