विक्रम सेठ की मां पूर्व न्यायाधीश लीला सेठ का निधन

  • 6 मई 2017
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भारत में हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनने वाली पहली महिला लीला सेठ का निधन हो गया है. जाने-माने लेखक विक्रम सेठ की मां लीला सेठ ने 86 वर्ष की आयु में नोएडा में अंतिम सांसें लीं.

लखनऊ में वर्ष 1930 में जन्मी लीला सेठ भारत की पहली महिला थीं जिन्होंने 1958 में लंदन बार की परीक्षा पास की थी.

एक साक्षात्कार में लीला सेठ ने बताया था कि वो बचपन में नन बनना चाहती थीं लेकिन पिता राज बिहारी सेठ की मौत के बाद उनका जीवन अचानक बदल गया था.

शानदार करियर

लीला सेठ के मुताबिक पिता उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे और कहते थे कि वो उनकी शादी में दहेज बिल्कुल नहीं देंगे.

लीला सेठ का कहना था कि क़ानून की पढ़ाई करना उनकी किस्मत में लिखा था और पढ़ाई के लिए बहुत कम समय मिलने के बावजूद उन्होंने लंदन बार की परीक्षा में टॉप किया.

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Image caption 2013 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से एनडीटीवी इंडियन ऑफ़ द ईयर अवार्ड लेते हुए.

जुलाई 1978 में लीला सेठ को न्यायाधीश की शपथ दिलाई गई और अगले ही वर्ष दिल्ली हाईकोर्ट में नियुक्त किया गया. इसके साथ ही वे भारत में किसी हाईकोर्ट में पहली महिला न्यायाधीश बनीं.

कालांतर में पदोन्नति मिलने पर लीला सेठ को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायायल का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया. ये साल 1992 की बात है और तब ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी महिला को किसी उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश बनने का अवसर मिला.

श्रद्धांजलि

लीला सेठ की मौत पर कई नामी हस्तियों और नेताओं ने दुख जताया है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, "जस्टिस लीला सेठ की मौत पर दुख है. मानव अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई अतुलनीय है. मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं."

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनके मौत पर दुख जताया है.

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने लिखा, "वो बेहद अच्छी इंसान थी, एक बढ़िया भारतीय थीं और समझदारी, सादगी और साहस की मिसाल थीं."

इतिहासकार इरफ़ान हबीब ने लिखा, "जस्टिस लीला सेठ की मौत के बारे में सुन कर दुख हुआ. वो महान जज थीं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली महिला थीं और एक अच्छी इंसान थीं."

ध्रुवो ज्योति ने लिखा, "समलैंगिक लोगों के हकों की लड़ाई लड़ने वालों में उनका नाम एक उदाहरण की तरह है."

लीला सेठ 15वें विधि आयोग की सदस्य थीं. इसके अलावा वे साल 2012 में बनाई गई जस्टिस वर्मा समिति की भी सदस्य थीं जिसे दिल्ली के निर्भया बलात्कार कांड के बाद कानून में बदलाव संबंधी सुझाव देने के लिए गठित किया गया था.

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