कौन हैं फ़ेसबुक पोस्ट पर निलंबित हुई वर्षा डोंगरे

  • 7 मई 2017
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छत्तीसगढ़ में सरकारी अफ़सरों और प्रतियोगी परीक्षा देने वालों के लिए वर्षा डोंगरे एक जाना-पहचाना नाम है. वर्षा डोंगरे एक बार फिर अपनी कथित सरकार विरोधी पोस्ट के लिए चर्चा मे आई हैं.

रायपुर सेंट्रल जेल में डिप्टी जेलर के पद पर कार्यरत वर्षा को शनिवार को उनके पद से निलंबित कर दिया गया है. स्वास्थ्यगत कारणों से अवकाश पर गईं वर्षा डोंगरे के बंद पड़े मकान पर सरकार ने इस संबंध में सूचना चस्पा कर दी है.

राज्य के गृहमंत्री रामसेवक पैकरा के अनुसार उन पर फ़ेसबुक और सोशल मीडिया पर बस्तर में आदिवासियों पर सुरक्षाबलों के कथित अत्याचार को लेकर सरकार की गंभीर और तीखी आलोचना के आरोप हैं.

कबीर धाम ज़िले के एक दलित परिवार में जन्मी 35 साल की वर्षा डोंगरे ने जीव विज्ञान में स्नातक की पढाई की है. मां शिक्षिका के पद से सेवानिवृत हुई हैं और पिता वकालत के पेशे में रहे हैं. परिवार में दो बहनें और एक भाई शिक्षक हैं, जबकि एक भाई सरकारी अस्पताल में डॉक्टर हैं.

पढ़ाई में हमेशा अच्छे अंक लाने वाली वर्षा ने 2003 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी थी, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ. इसके बाद की परीक्षा में वे सफल हुईं और उन्हें डिप्टी जेलर की पोस्ट मिली.

वर्षा डोंगरे पहली बार उस समय चर्चा में आईं, जब उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की 2003 में आयोजित राज्य सेवा आयोग की परीक्षा में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की.

वर्षा ने इस मामले में लंबी अदालती लड़ाई लड़ी है.

छत्तीसगढ़ः फ़ेसबुक पोस्ट के लिए डिप्टी जेलर निलंबित

हाईकोर्ट का फ़ैसला और 147 अफ़सरों की नौकरी

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उनकी याचिका पर सुनाए गये हाईकोर्ट के एक फ़ैसले से राज्य के डेढ़ सौ से अधिक अफ़सरों की नौकरी प्रभावित हो सकती है. इनमें बड़ी संख्या डिप्टी कलेक्टर और सहायक पुलिस अधीक्षक शामिल हैं. इनमें से कई की नौकरी भी जा सकती है, लेकिन फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित होने के कारण इस मामले में कार्रवाई नहीं हो सकी है.

असल में 2003 में वर्षा डोंगरे ने छत्तीसगढ़ में पीएससी की परीक्षा में हुए भ्रष्टाचार को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.

कई सालों तक चले इस मामले में वर्षा डोंगरे ने खुद ही अपने मामले की पैरवी की थी.

हाईकोर्ट ने पिछले साल अगस्त में वर्षा डोंगरे द्वारा पेश सबूतों के आधार पर लोक सेवा आयोग के काम को आपराधिक कृत्य की संज्ञा दी थी और भ्रष्टाचार को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी. इसके अलावा माना था कि वर्षा समेत कई प्रतियोगियों को अधिक नंबर मिलने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं दी गई.

अदालत ने राज्य सरकार के ख़िलाफ़ आदेश दिया कि सरकार फिर से 2003 में हुई परीक्षा के परिणाम की स्केलिंग करे और उस आधार पर फिर से साक्षात्कार करे. अदालत ने वर्षा डोंगरे को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया.

महाधिवक्ता और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने वर्षा डोंगरे को अदालत में ही पुलिस उपाधीक्षक के पद की पेशकश की. लेकिन वर्षा डोंगरे ने इससे इनकार कर दिया और हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

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Image caption अधिवक्ता प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में वर्षा डोंगरे का केस लड़ रहे हैं.

वर्षा का कहना है कि वे अदालत में केवल पद या अपने हिस्से का न्याय लेने के लिये नहीं गई थी. लोक सेवा आयोग की गड़बड़ियो की जांच हो, सभी प्रतियोगियों को न्याय मिले और दोषियों को सज़ा मिले, इसलिये उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. बिना किसी परिचय के अधिवक्ता प्रशांत भूषण इस मामले में निःशुल्क पैरवी कर रहे हैं.

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में कार्रवाई जारी है, लेकिन वर्षा बस्तर में सुरक्षाबल के जवानों द्वारा आदिवासियों पर किए जा रहे कथित अत्याचार संबधी अपनी एक पोस्ट के लिए चर्चा में है.

देश भर में उनके निलंबन को लेकर बहस चल रही है. सोशल मीडिया में वर्षा डोंगरे छाई हुई हैं. सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण भी उनके पक्ष में खड़े दिखते है तो पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी भी. मानवाधिकार कार्यकर्ता तो वर्षा के पक्ष में बयान दे ही रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और विधायक भूपेश बघेल साफ़ कहते हैं, "वो एक दलित की बेटी है, इसलिये उसे निलंबित होना पड़ा. यहां सरकारी अफ़सर फेसबुक पर क्या-क्या नहीं लिखते. सरकार को कार्रवाई करनी है तो नान घोटाले में करे, भ्रष्टाचार के मामलों में करे."

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