वो 6 दिन तक अपनी पत्नी के शव के साथ सोया

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ब्रिटेन में डर्बीशायर के रहने वाले रसल डेविसन अपनी पत्नी की मौत के बाद 6 दिन तक अपनी पत्नी के शव के साथ उन्हीं के कमरे सोए.

सर्वाइकल कैंसर से 10 साल तक लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 50 साल की वेंडी डेविसन ज़िंदगी की जंग हार गईं.

वेंडी की मौत से दुखी उनके पति रसेल डेविसन नहीं चाहते थे कि वेंडी के शव को शवगृह में रखा जाए. वो मौत के प्रति नज़रिए को चुनौती देना चाहते थे.

रसेल ने कहा "हमारे समाज में मौत शब्द एक टैबू की तरह है जिस पर कोई भी बात नहीं करना चाहता."

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Image caption बेटे के साथ रसेल और वेंडी

जब कैंसर का पता चला

रसल कहते हैं, "मैं नहीं चाहता कि उन्हें शवगृह में ले जाया जाए या उन्हें अंतिम संस्कार का इंतज़ाम करने वालों के सुपुर्द कर दिया जाए. मैं चाहता कि हम उनकी घर में ही देखभाल करें, उन्हें उनके बेडरूम में ही रखें ताकि मैं उसी कमरे में सो सकूं."

2006 को रसल और वेंडी की 40वीं जन्मदिन पार्टी के बाद जब उन्हें पता चला कि वेंडी को कैंसर है, उन्होनें फ़ैसला किया कि वो इलाज के 'प्राकृतिक' तरीक़े अपनाएंगे.

रसेल ने बताया, "हम उनकी ज़िंदगी डॉक्टरों के हाथों में देने के लिए तैयार नहीं थे, हम अपनी ख़ुद की रिसर्च करना चाहते थे और वेंडी को ज़िंदा रखने के लिए जो बेहतर हो सकता था वो करना चाहते थे."

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कीमोथेरेपी के लिए मना किया

रसल का मानना है कि उनके तरीक़ों ने जिसमें कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी को ख़ारिज करना शामिल था, वेंडी के जीवन को "बहुत लंबे समय तक" बढ़ाया था.

2014 में वेंडी डेविसन को बताया गया कि उनके जीवन के सिर्फ़ 6 महीने बाक़ी हैं, तब ये जोड़ा यूरोप घूमने निकल पड़ा जिसे वो अपने ज़िंदगी का सबसे बेहतरीन वक़्त कहते हैं.

लेकिन सितंबर में जब उनका दर्द बहुत बढ़ गया तो उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा.

उन्हें रॉयल डर्बी अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन वो इस बात पर अड़े रहे कि वेंडी की मौत अस्पताल में नहीं होगी.

रसल और वेंडी ने तय किया उनकी देखभाल परिवार घर में ही होगी और मरने के बाद अंतिम संस्कार होने तक उनका शव घर में ही रहेगा.

21 अप्रैल को वेंडी की मौत हो गई.

रसल बताते हैं, "वेंडी की मौत मेरे और डिलेन की बांहों में बहुत शांति से हुई, कोई दर्द नहीं हुआ, हमारा वफ़ादार कुत्ते उनके पास ही बैठा था."

उन्होनें कहा कि उस वक़्त परिवार और दोस्तों का उनके पास होना एक ख़ूबसूरत और सुक़ून देने वाला अनुभव था.

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शव को घर में रखने के नियम

जब तक डॉक्टर को सूचित किया जाता है और मौत को पांच दिन के अंदर रजिस्टर किया जाता है, शव को अंतिम संस्कार से पहले क़ानूनी तौर पर घर पर रखा जा सकता है.

अंतिम संस्कार का इंतज़ाम करने वाले व्यक्ति या नर्स की ज़रूरत शव को नहलाने के लिए होती है.

अगर शव को घर में ज़्यादा दिनों कर रखा जाता है तो अंतिम संस्कार का इंतज़ाम करने वाले व्यक्ति को शव पर लेप लगाना पड़ता है.

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